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NSE के पूर्व प्रमुख रवि नारायण के खिलाफ सेबी के आदेश पर रोक

NSE chief case नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व प्रमुख रवि नारायण के खिलाफ केस में सैट ने शर्तों के साथ दी राहत। चार सप्ताह में पूंजी नियामक के पास जमा करने होंगे 50 लाख रुपये ।

 प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व प्रमुख रवि नारायण के खिलाफ बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा जारी आदेश पर रोक लगा दी है। यह रोक इस शर्त के साथ लगाई गई है कि नारायण को चार सप्ताह में सेबी के समक्ष 50 लाख रुपये जमा करना होगा।

सैट ने गुरुवार को पारित एक आदेश में कहा कि जमा की गई राशि को सेबी को ऐसे खाते में रखना होगा, जिस पर ब्याज हासिल हो। सेबी ने कामकाज में चूक मामले में उन्हें नोटिस भेजा था। 11 फरवरी को एक आदेश में पूंजी बाजार नियामक ने नारायण को दो साल के लिए किसी भी बाजार बुनियादी ढांचा संस्थान या किसी सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ के साथ जुड़ने से रोक दिया था। साथ ही उन पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि चित्रा रामकृष्ण ने आनंद सुब्रमणियन को भारी वेतन पर निजी सलाहाकार नियुक्त किया था जबकि उनके पास कोई विशेष योग्यता नहीं थी। नारायण पर आरोप है कि वह उन 10 निदेशकों में से एक थे जिन्होंने सुब्रमणियन को कार्यकारी शक्तियां सौंपने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा नारायण एनएसई में खामियों के बारे में सेबी को जानकारी देने में भी विफल रहे।

आदेश में सैट ने प्रथमदृष्टया पाया कि सुब्रमणियन को कार्यकारी शक्तियां सौंपने के लिए जिन प्रस्तावों को पारित किया गया था, उसमें अकेले नारायण को निशाना बनाया गया। सैट ने कहा कि अपीलकर्ता (नारायण) को आरोपित बनाना भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है, क्योंकि यह निदेशक मंडल का सामूहिक निर्णय था। इतना ही नहीं उक्त उल्लंघन के लिए अपीलकर्ता पर लगाया गया जुर्माना भी अत्यधिक प्रतीत होता है।

ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि नारायण से संबंधित आदेश पर रोक रहेगी, बशर्ते वह चार सप्ताह के भीतर सेबी के समक्ष 50 लाख रुपये जमा कर दें। इसने सेबी को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने का भी निर्देश दिया और मामले को सुनवाई के लिए 30 जून को सूचीबद्ध किया।

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