उत्तर प्रदेश में अब एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन मशीन पर कार्य करने के लिए अब एक डिग्री पर्याप्त होगी। हृदय जांच के लिए ईसीजी, टीएमटी, ईको, होल्डर मॉनिटर आदि मशीनों के लिए भी अलग-अलग डिप्लोमा कोर्स करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टेक्नीशियन एक कोर्स करके एक बीमारी से जुड़ी सभी मशीनों का संचालन कर सकेंगे। ऐसे में 36 से अधिक डिप्लोमा कोर्स बंद किए जाएंगे। इसके लिए संयुक्त पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
प्रदेश में अभी तक जांच की जितनी मशीनें हैं, उतने डिप्लोमा कोर्स चल रहे हैं। विभिन्न सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों में करीब 36 डिप्लोमा और 14 सर्टिफिकेट कोर्स चल रहे हैं। इसमें तमाम कोर्स ऐसे हैं, जिनमें जॉब की संभावनाएं न के बराबर रहती हैं। इसलिए स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल ने इस वर्ष सिर्फ पांच कोर्स को मंजूरी दी है। इसमें डिप्लोमा ऑफ एनेस्थिसियोलॉजी एंड ओटी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट और डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनके अलावा अन्य तमाम कोर्स का संयुक्त पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
एक्सरे, एमआरआई और सीटी स्कैन का एक नया कोर्स होगा। इसी तरह हृदय जांच से जुड़ी सभी मशीनों पर कार्य करने के लिए अलग कोर्स तैयार किया जा रहा है। कुछ ऐसी ही व्यवस्था पेट और किडनी संबंधी जांच के लिए भी बनाई जा रही है। पैरामेडिकल विशेषज्ञों की टीम विभिन्न राज्यों में चल रहे कोर्स का अध्ययन करके नए पाठ्यक्रम तैयार करेगी। जिन पाठ्यक्रमों को नेशनल एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल मंजूरी देगी, उसे प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।

