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महिलाओं ने लगाई इस्लामिक अमीरात से मदद की गुहारे पीड़ित एक पूर्ण आर्थिक संकट से जूझ रहा है

तालिबान के कब्जे के करीब छह महीने बाद भी अफगानिस्तान में स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। युद्ध से तबाह देश राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक और मानवीय झटके से उबरा नहीं है।

तालिबान के कब्जे के करीब छह महीने बाद भी अफगानिस्तान में स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। युद्ध से तबाह देश राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक और मानवीय झटके से उबरा नहीं है। इस बीच अब खबरें हैं कि कई कारोबारी दिवालिया हो चुके हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद दिवालिया हो चुकीं और अपनी नौकरी गंवाने वाली अफगान व्यवसायी महिलाओं ने इस्लामिक अमीरात से उनकी चुनौतियों का समाधान करने के लिए ध्यान देने का आग्रह किया है।

‘महिलाओं को दिया जाए काम, अपने भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को तैयार’

काबुल की एक व्यवसायी फरेशता हाशमी ने कहा कि वह लगभग छह वर्षों से कपड़ों की कढ़ाई कर रही हैं। उनका दावा है कि देश में राजनीतिक बदलाव के बाद से कई महिलाओं के कारोबार बंद हो गए हैं। फेरेश्ता हाशमी ने टोलो न्यूज को बताया, “हमारी दुकानें और कारखाने ढह गए हैं, महिलाएं घर पर कैद हो गई हैं और वे कुछ कर नहीं सकती हैं।” हाशमी ने इस्लामिक अमीरात से छोटे और बड़े व्यवसायों में महिलाओं का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “कारखाने खोले जाएं, महिलाओं को प्रोजेक्ट दिए जाएं ताकि वे अपने भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकें।”

महिलाओं ने लगाई इस्लामिक अमीरात से मदद की गुहारे

टोलो न्यूज ने एक व्यवसायी महिला मोझगन हमीदी के हवाले से कहा, “हम इस्लामिक अमीरात से महिलाओं को नौकरी देने के लिए कह रहे हैं। महिलाएं बुरी स्थिति में जी रही हैं और उन्हें नौकरी की जरूरत है।” इस बीच, कुछ अर्थशास्त्रियों ने देश की अर्थव्यवस्था के वृद्धि और विकास में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया और इस्लामिक अमीरात से उनकी समस्याओं का समाधान करने को कहा। टोलो न्यूज ने एक अर्थशास्त्री सैयद मसूद के हवाले से कहा, “अफगानिस्तान बिजनेसवुमन एसोसिएशन (एबीए) एक बहुत अच्छी संस्था है, इसे स्वीकार किया जाना चाहिए और हमें इसके लिए सुरक्षा स्थापित करनी चाहिए। दूसरी बात, हमें ऐसी संस्था को बनाए रखना चाहिए और इसे विकसित करने के लिए कदम उठाना चाहिए।”

आर्थिक संकट से जूझ रहा अफगानिस्तान

तालिबान ने पिछले साल 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था और इसके बाद से देश गहरे आर्थिक, मानवीय और सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। विदेशी सहायता के निलंबन, अफगान सरकार की संपत्ति को जब्त करने और तालिबान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते देश पहले से ही उच्च गरीबी के स्तर से पीड़ित एक पूर्ण आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

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