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कोरोना संक्रमण के बीच डब्ल्यूएचओ ने बच्चों में इस घातक संक्रमण को लेकर किया अलर्ट

पिछले दो साल से अधिक समय से दुनियाभर में कोरोना संक्रमण का कहर जारी है

 कोरोना के तमाम वैरिएंट्स ने सभी आयु वाले लोगों को प्रभावित किया है। मौजूदा समय में दुनियाभर के लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बने ओमिक्रॉन वैरिएंट ने बच्चों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत सहित दुनिया के कई देशों से मिल रहे आंकड़े बताते हैं कि यह वैरिएंट बच्चों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। कुछ अध्ययनों ने तो इसके कारण बच्चों में गंभीर स्थितियों को लेकर भी अलर्ट किया है। कोरोना के जारी संकट के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ ने बच्चों से संबंधित एक और बड़े खतरे को लेकर अलर्ट किया है। 

डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने एक संयुक्त बैठक में खसरे के प्रकोप की आशंकाओं को लेकर सभी देशों को सचेत किया है। स्वास्थ्य संगठनों कहना है कि जिस तरह की परिस्थितियां हाल के वर्षों में देखने को मिली हैं, उसे एक ‘बड़े तूफान’ के संकेत के तौर पर लेने की आवश्यकता है। पिछले वर्षों की तुलना में इस साल दुनियाभर में खसरे का संक्रमण काफी अधिक रिपोर्ट किया जा रहा है। स्वास्थ्य संगठनों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सभी देशों को इस बारे में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि जिस तरह के डेटा सामने आ रहे हैं वह एक बड़ी समस्या का सूचक हो सकते हैं। बच्चों में खसरे के टीकाकरण को बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है।

खसरे के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी  2022 के पहले दो महीनों में, दुनियाभर में खसरे के मामलों में लगभग 80% की वृद्धि हुई। स्वास्थ्य संगठनों ने कहा कि पिछले दो साल से जारी कोरोना महामारी के चलते वैश्विक स्तर पर खसरे के टीकाकरण में असामानता और कमी देखने को मिली है। संभवत: इसी वजह से पिछले वर्षों की तुलना में इस साल के शुरुआती महीनों में ही संक्रमण के मामले में तेजी से उछाल देखा जा रहा है।

बच्चों में होने वाला घातक संक्रमण खसरा, बच्चों को प्रभावित करने वाली अत्यधिक संक्रामक और घातक बीमारी मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी और फरवरी 2022 में दुनियाभर में इसके लगभग 17,338 मामले दर्ज किए गए, जबकि साल 2021 के पहले दो महीनों के दौरान यह आंकड़ा 9,665 के करीब था। स्वास्थ्य संगठनों द्वारा जारी समाचार विज्ञप्ति के मुताबिक यूक्रेन, इथियोपिया, सोमालिया और अफगानिस्तान सहित कई अन्य देशों में सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों के कारण खसरा के नियमित टीकाकरण में कमी आई है। इसके अलावा कोविड-19 के कारण उपजी स्थितियों, स्वच्छ पानी और स्वच्छता की कमी आदि ने भी बच्चों के इस बेहद खतरनाक संक्रमण के मामले को बढ़ा दिया है, जिसको लेकर विशेष अलर्ट रहने की आवश्यकता है। 

खसरा हो सकता है जानलेवा अमर उजाला से बातचीत में इंटेसिव केयर यूनिट के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अतुल भारद्वाज बताते हैं, खसरा सामान्यतौर पर 5 साल से कम आयु के बच्चों को होने वाला बेहद गंभीर संक्रमण है। 20-70 फीसदी बच्चों में संक्रमण के कारण गंभीर मामलों के विकसित होने का जोखिम होता है। वहीं डेटा बताते हैं कि 3-15 फीसदी बच्चों की इस संक्रमण के कारण मौत हो जाती है। खसरे के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 7 से 14 दिन बाद दिखाई देते हैं और इसमें आमतौर पर तेज बुखार, खांसी, नाक बहने की समस्या होती है। इस संक्रमण में त्वचा पर दाने हो जाते हैं। बचाव के लिए टीकारण बहुत जरूरी डॉ अतुल भारद्वाज बताते हैं, भारत में खसरे से बचाव को लेकर चलाए गए अभियान और टीकाकरण के कारण अब इसके मामले पहले की तुलना में काफी कम हुए हैं। सभी माता-पिता को बच्चों में खसरे का टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। दो डोज की यह वैक्सीन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आसानी से उपलब्ध होती है। वैक्सीनेशन असमानता अभी चिंता का विषय जरूर है, इसको लेकर माता-पिता को अलर्ट रहने की विशेष आवश्यकता है।

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