‘ठाकुर हूं मैं’, कहने वाली बैंककर्मी आस्था सिंह आई सामने, HDFC के अंदर क्या हुआ था, बताई वायरल वीडियो की पूरी कहानी

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‘ठाकुर हूं मैं’, कहने वाली बैंककर्मी आस्था सिंह आई सामने, HDFC के अंदर क्या हुआ था, बताई वायरल वीडियो की पूरी कहानी

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें HDFC बैंक की एक महिला कर्मचारी और एक ग्राहक के बीच तीखी बहस देखी गई। इस वीडियो में कर्मचारी को गुस्से में चिल्लाते हुए, अपशब्दों का इस्तेमाल करते और कथित तौर पर जाति आधारित टिप्पणी करते दिखाया गया है। वीडियो कानपुर के पनकी क्षेत्र स्थित HDFC बैंक शाखा का बताया जा रहा है, जहां महिला कर्मचारी का नाम आस्था सिंह बताया गया है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी विवाद खड़ा कर दिया, जहां लोगों ने कर्मचारी के व्यवहार को अनप्रोफेशनल और जातिवादी बताते हुए बैंक से सख्त कार्रवाई की मांग की।

लैपटॉप उठाकर धमकाते दिखी बैंक कर्मचारी

वीडियो में दिखाया गया कि कर्मचारी ग्राहक पर चिल्ला रही हैं, गालियां दे रही हैं और एक समय लैपटॉप उठाकर धमकाने की कोशिश करती नजर आईं। खास तौर पर उनकी टिप्पणी “मैं ठाकुर हूं, बकवास मत करो” इसके साथ ही महिला बैंककर्मी द्वारा कुछ अमर्यादित भाषा का भी इस्तेमाल किया गया था, जिसे सुनकर कई लोगों ने इसे जाति के आधार पर धमकी के रूप में देखा। इस वजह से नेटिजन्स में आक्रोश फैल गया और कई यूजर्स ने बैंक की कस्टमर सर्विस पर सवाल उठाए। कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि कर्मचारी ने ग्राहक को “ऐसी की तैसी कर दूंगी” जैसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे बैंकिंग सेक्टर की छवि पर सवाल खड़े हो गए।

मामले में क्या बोली आस्था सिंह?

हालांकि, अब महिला कर्मचारी ने अपना पक्ष रखते हुए एक सफाई वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने वायरल क्लिप को 6 जनवरी की घटना बताते हुए इस वीडियो को अधूरा और एकतरफा बताया है। उनके अनुसार, वीडियो में केवल बहस का आखिरी हिस्सा दिखाया गया है, जबकि घटना की शुरुआत सामने की ओर से की गई बदतमीजी और धमकी से हुई थी। कर्मचारी ने दावा किया कि वीडियो में जिस शख्स के साथ बहस हो रही है वो ग्राहक नही है। वो बैंक की ही एक महिलाकर्मी के पति थे जिनके साथ बहस हुई थी। आस्था के मुताबिक युवक द्वारा पहले चिल्लाया गया, बदतमीजी की गई और “देख लूंगा” या “गर्मी निकाल दूंगा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ था। आस्था ने कहा कि एक महिला होने के नाते उन्हें असुरक्षित महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी।

देखें वायरल वीडियो पर आस्था सिंह ने क्या कहा?

आस्था ने कहा, “उस युवक ने मुझ पर चिल्लाया और मुझे धमकी दी। एक महिला होने के नाते जब मुझे असुरक्षित महसूस हुआ, तब मैंने अपनी बात रखी। लोग केवल एक तरफा कहानी देखकर मुझे जज कर रहे हैं।” कर्मचारी ने यह भी बताया कि वह बैंकिंग क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों से काम कर रही हैं और पहले कभी किसी ग्राहक के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया। वायरल वीडियो के बाद उन्हें और उनके परिवार को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है, साथ ही सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और अपशब्दों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पूरी सच्चाई छिपाई जा रही है और अधूरे वीडियो से उनकी छवि खराब की जा रही है।

आस्था के अनुसार उस दिन बैंक में क्या हुआ था?

बैंककर्मी आस्था ने बताया, जिस महिला के पति के साथ मेरी बहस हो रही है वह हमारे ही बैंक में काम करती थीं। उन्होंने अपना इस्तीफा दिया था और सेम डे उन्हें रिलीविंग ऑर्डर चाहिए था। उनकी ननद सुबह से आकर बैंक के ब्रांच में बैठी हुई थीं। मेरी उनसे इस मामले को लेकर थोड़ी बहस हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपने भाई यानी महिला के पति को बताया। महिला के पति वर्किंग आवर खत्म होने के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे बैंक घुसकर मेरे साथ अभद्रता की।

‘मैं ठाकुर हूं और अपने स्टेटमेंट पर अब भी कायम हूं’

बैंककर्मी आस्था सिंह के अनुसार महिला के पति ने सीधे मुझसे पूछा कि कौन सी जाति की हो, इतनी अकड़ है। मेरी डेस्क पर आकर कहा कि मैं तुम्हारी हेकड़ी निकाल दूंगा। तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा। खुद को मीडिया कर्मी बताने वाले उसके पति ने पूरे स्टॉफ के सामने बदसलूकी की। जब विरोध किया तो वीडियो बनाने लगा, वायरल करने की धमकी भी दी थी। मेरे साथ उन्होने अभद्र व्यवहार किया, उसके बाद मैंने यह स्टेटमेंट (ठाकुर हूं) दिया था। आस्था सिंह ने यह भी कहा कि मेरे शब्द गलत हैं, मैं लोगों की सेवा के लिए बैठी हूं लेकिन कोई कहेगा कि तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आस्था ने यह भी कहा बोला है कि मैं ठाकुर हूं, मैं अपने उस स्टेटमेंट पर अब भी कायम हूं। इस बात पर मुझे पूरा गर्व है। आस्था ने बताया कि जानकारी ईमेल के जरिए सीनियर को दी थी। 

इस सफाई के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है। एक तरफ कई लोग कर्मचारी के पक्ष में आ गए हैं और कह रहे हैं कि ग्राहक की हरकतों के कारण ऐसा हुआ होगा, कुछ ने महिलाकर्मी का पक्ष लेते हुए कहा कि बैंकिंग कर्मचारियों पर काम का दबाव भी बहुत होता है ऐसे में कुछ लोग अक्सर बदतमीजी करते हैं। दूसरी ओर कुछ यूजर्स का मानना है कि बैंक जैसी संस्था में कर्मचारी को किसी भी स्थिति में संयम बनाए रखना चाहिए, अपशब्द और जाति आधारित टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।

बैंक की भूमिका पर नजर

फिलहाल HDFC बैंक की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बैंक प्रबंधन ने अभी तक कर्मचारी की निलंबन या जांच जैसी कोई जानकारी नहीं दी है, हालांकि इतने बड़े विवाद के बाद जल्द कोई कार्रवाई होने की संभावना है। यह घटना बैंकिंग सेक्टर में कस्टमर सर्विस, कर्मचारियों की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अधूरी खबरों के प्रभाव को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ रही है।

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