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राहुल गांधी – सियासी अग्निपथ का सारथी

भारत जोड़ो यात्रा

पिछले दो महीने से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सियासी अग्निपथ के पथिक बने हुये हैं । आप सोच रहे होंगे कि आखिर मैं किस अग्निपथ की बात कर रहा हूं । तो भाई समझिये राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा को समझने की कोशिश करेंगें कि सियासी तौर पर कितनी दुश्वारियां कितनी आलोचनाओं के झंझावात से राहुल गांधी को इस भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जूझना पड़ा है । कन्याकुमारी से लेकर केरल तक पदयात्रा करने का रिकार्ड किसी भारतीय सियासी घराने के किसी नेता के नाम तो नहीं हीं है जो राहुल गांधी ने कर दिखाया है ।

जैसे हीं राहुल गांधी इस यात्रा पर निकले बीजेपी से लेकर तमाम कांग्रेस विरोधी ताकतों नें आलोचनाओं की झड़ी लगा दी । कई ऐसे मुद्दे आये जिससे ऐसा लगा कि राहुल गांधी अब नये विवादों में घिर जायेंगें और शायद यात्रा पर विराम लगा देंगें । लेकिन तमाम आरोपों प्रत्यारोंपों के बीच सुर्खियां बटोरते राहुल गांधी लगातार उस पथ पर बढ़ते रहे जिसे भारत जोड़ों यात्रा का नाम दिया गया है ।

शुरूआती दौर में यात्रा पर निकले राहुल गांधी की उन तस्वीरों को आपने देखा होगा, और आज अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहे इस यात्रा के दौरान जो छवि दिख रही है आपको आकलन तो हो ही गया होगा कि कितना बदलाव आ गया है । शुरूआती यात्रा में कई ऐसे विवादित बयान आये लेकिन अब ऐसा होता कम हीं नजर आ रहा है । यात्रा में जैसे जैसे लोगों का हुजुम साथ निकला विरोधियों की ओर से हमला करने का दौर तेज होता गया । कभी राहुल गांधी के रहन सहन की तस्वीरें साझा कर सवाल खड़ा किया गया तो कभी राहुल गांधी के टी-शर्ट से लेकर ना जाने क्या क्या मुद्दे खबरिया चैनलों पर चर्चा में रहे वाकयी मुझे आश्चर्य हुआ ।

यात्रा के शुरूआती दौर मे गोवा कांग्रेस विखंडित हो गयी, राजस्थान का ड्रामा चरम पर रहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कई विवाद हुये और ये सारे घटनाक्रम ऐसे रहे कि विरोधियों को कुछ कहने बोलने का मौका तो मिल हीं गया । गुजरात चुनाव में प्रचार के लिये न जाना, हिमाचल में इक्के दुक्के रैलियों में जाने का राहुल का फैसला पार्टी के भीतर भी उतना हीं चर्चा का विषय रहा जितना विरोधियों के मंच पर । लेकिन इन सबके बीच ये तो कहा हीं जा सकता है कि तमाम विवादों के बावजूद लोगों ने राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ने की मुहिम का भरपूर समर्थन किया ।

यूपी से लेकर कर्नाटक मध्यप्रदेश पंजाब या हरियाणा की बात जाये हर जगह राहुल गांधी चर्चा के केन्द्र में अपने इस यात्रा को लेकर बने रहे । अब तो ये यात्रा 30 जनवरी को समाप्त होने वाली है । मैने अपने संवाद के शुरूआत में इस यात्रा को अग्निपथ इसलिये कहा क्योंकि चुनौतियों के अंबार के बीच राहुल की ये यात्रा किसी अग्निपथ से कम नहीं रही।

दरअसल कांग्रेस ने केवल मौजूदा समय में संगठन स्तर पर अपने भीतर हीं चुनौतियों से जूझ रही है बल्कि संगठन के भीतर भीतरघाती, बिखंडनकारी जैसे तमाम तत्व सक्रिय हैं । सोनिया गांधी की सक्रियता में कमी आना उनकी उम्र और बीमारी दोनों की वजह से ना के बराबर रह गया है, प्रियंका गांधी में अभी वो करिश्मा नजर नहीं आ रहा है जिसकी हम उम्मीद करते थे । उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद काफी उम्मीद थी लेकिन चुनाव परिणाम ने उस उम्मीद को धूमिल किया हालांकि हिमाचल में कांग्रेस की जीत से थोड़ा कद जरुर बढ़ा है, अब बचे राहुल गांधी । इसमे दो राय नहीं कि राहुल गांधी के मेहनत में कोई कमी नहीं है लेकिन गाहे बगाहे बयान देकर राहुल गांधी भी कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर देते हैं ।

बहरहाल ये आकलन जरुर हो सकता है लेकिन ये तो कहना हीं पड़ेगा कि राहुल भारत जोड़ो यात्रा से जिस कदर चर्चा में आये हैं उतना शायद पहले कभी नहीं रहे । ये बात भी दीगर है कि अग्निपथ का सारथी राहुल गांधी का सफर आगे क्या कुछ हासिल कर पाता है ये तो देखने वाली बात होगी । बेशक कन्याकुमारी से कश्मीर तक जन जन तक पहुंचने का संकल्प तो राहुल गांधी पूरा कर हीं लिया है लेकिन क्या 2024 के लिये मोदी ताकत को टक्कर दे पायेंगें ये अभी कहना मुश्किल है और ये मैं यूंही नहीं कह रहा हूं बल्कि इसके पीछे तर्क भी है । राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा को नीतिश, अखिलेश, मायावती, तेजस्वी समेत सारे सियासी दलों ने शुभकामना तो दी पर मंच साझा करने से इंकार कर दिया । केजरीवाल अखिलेश यादव, मायावती, नीतिश, ममता बनर्जी जैसे तमाम बड़े छोटे सियासी घटक अपनी अपनी महत्वाकांक्षाओं में सियासी समीकरण बैठा रहे हैं । ये सारे ऐसे मुद्दे होंगे जो मौजूदा सत्ता के लिये बड़ी चुनौती बनते नजर नहीं आ रहे हैं ।चलिये सियासत है, सियासी खेल का दिलचस्प दौर जारी है, आप भी देखते रहिये और हम भी देखते हैं आगे आगे क्या होता है ।

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