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आंखों की प्रॉब्लम को न करें नजरअंदाज, अंधेपन से लेकर मृत्यु तक की गंभीर परेशानियां पैदा कर सकते हैं।

इस खूबसूरत दुनिया को देखने के लिए हमारा साथ देती हैं आंखें। हालांकि अक्सर लोग अपनी आंखों के प्रति काफी ज्यादा हल्के में लेते हैं।

इस खूबसूरत दुनिया को देखने के लिए हमारा साथ देती हैं आंखें। हालांकि अक्सर लोग अपनी आंखों के प्रति काफी ज्यादा हल्के में लेते हैं। आंखों का लाल होना, आंखों से पानी आना, धुंधला दिखना और ड्राई आंखों जैसे लक्षणों को अक्सर मामूली समस्याओं के रूप में नजरअंदाज कर दिया जाता है, कई लोग इन बीमारियों के लिए घरेलू इलाज कर लेते हैं तो कुछ मेडिकल शॉप से दवाई ले आते हैं। ऐसे में इन परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। हालांकि इनमें से अधिकांश लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई मामलों में अगर यूहीं छोड़ दिया जाए तो वे अंधेपन से लेकर मृत्यु तक की गंभीर परेशानियां पैदा कर सकते हैं।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिपोर्ट की मानें तो अधिकांश ओकुलर संक्रमण मामूली होते हैं, वहीं दूसरे काफी जटिल होते हैं। अधिकांश मरीज या तो ओकुलर डिस्चार्ज, विजुअल लक्षण, लाल या दर्दनाक आंख के साथ होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ रोग और संक्रमण पहले आंख के लक्षण के रूप में हो सकते हैं क्योंकि आंखें शरीर का एकमात्र अंग है जहां न्यूरॉन्स और रक्त वाहिकाओं को सीधे देखा जा सकता है और इसलिए किसी भी बीमारी का पहला लक्षण आंखों में नजर आता है। नीचे दी गई लिस्ट में आंखों की उन बीमारियों के नाम हैं जिनका इलाज सही समय पर न किया जाए तो कई परेशानियां हो सकती हैं। 1) राइनो ऑर्बिटल सेरेब्रल म्यूकोर्मिकोसिस  आम भाषा में इसे ब्लैक फंगस के रूप में जाना जाता है, यह म्यूकोरेल्स के कारण होने वाला एक असामान्य संक्रमण है और इसकी हाई मोर्बिडिटी और मोरटेलिटी रेट। यह मुख्य रूप से डायबिटीज, कैंसर, पोस्ट ऑर्गन ट्रांस्प्लांट के बाद क्रोनिक स्टेरॉयड थेरेपी वाले रोगियों में होता है और हाल ही में इसे गंभीर कोविड संक्रमण वाले पेशेंट में भी देखा गया था। फंगस नाक के जरिए से एंटर करने वाली ब्लड वेसेल्स पर आक्रमण करता है और साइनस और नेसल कैविटी में फैल जाता है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये दिमाग तक पहुंच जाता है, जो दिमाग के लिए घातक हो सकता है।
2) एस्परगिलोसिस म्यूकोर्मिकोसिस के समान, ऑर्बिटल एस्परगिलोसिस इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड रोगियों में होता है और नाक के बाद में दिमाग तक पहुंचता है। 3) कंजंक्टिवाइटिस (गुलाबी आंख) कंजक्टिवा टिश्यू की एक पतली परत होती है जो आंखों के सफेद हिस्से और पलकों के अंदरूनी हिस्से को ढकती है। कंजक्टिवाइटिस को कंजंक्टिवा के संक्रमण या सूजन के रूप में वर्णित किया जा सकता है। इसके लक्षण खुजली और पानी बहना है। 4) ब्लेफेराइटिस  यह पलकों की सूजन है, और बैक्टीरिया के संक्रमण, एलर्जी, पलकों में तेल ग्रंथियों के बंद होने और स्किन की कुछ स्थितियों के कारण देखा जाता है। किसी को लाल और पलकों की सूजन, जलन और पानी बहता है। आंखों के चारों ओर परतदार स्किन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ब्लेफेराइटिस से अंधापन नहीं होगा, लेकिन यह कई अन्य परेशानियों को पैदा कर सकता है जैसे कि पलकें गिर सकती हैं।
5) यूवाइटिस  यह यूविया आईरिस युक्त नेत्रगोलक की मध्य परत की सूजन है। यह सोरायसिस, दाद संक्रमण, या रुमेटीइड गठिया जैसी स्थितियों से जुड़ा है। डॉ सेठ के अनुसार, किसी को धुंधली दिखने, आंखों की लाली और फ्लोटर्स जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 6) केराटाइटिस  इसे कॉर्निया की सूजन या संक्रमण के रूप में जाना जाता है। लेंस का दुरुपयोग संक्रमण का कारण हो सकता है। लंबे समय तक लेंस पहनने, उनकी सफाई न करने से कॉर्निया में कीटाणुओं के आने का खतरा बढ़ सकता है। इसका तुरंत इलाज न करने से कॉर्निया पर निशान पड़ सकते हैं और नजरें खराब हो सकती हैं।

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