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बैंकिंग सुधार का सुझाव देने के लिए उद्यमियों, विशेषज्ञों का समूह बनाएं : पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात में आयोजित ग्लोबल पाटीदार बिजनेस समिट में कहा कि बैंकिंग को ही लीजिए। यह क्षेत्र क्यों नहीं बढ़ रहा है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कारोबारी समुदाय से कहा कि वे बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में नीतिगत बदलाव का सुझाव देने और कमियां बताने के लिए उद्यमियों और विशेषज्ञों का समूह बनाएं। मोदी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार सामान्य पृष्ठभूमि के लोगों को उद्यमी बनने में मदद करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री गुजरात के सूरत में ग्लोबल पाटीदार बिजनेस समिट-2022 का आनलाइन उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-मैं आपसे उद्यमियों के 10 से 15 समूह बनाने का आग्रह करता हूं। इनमें युवा और बुजुर्ग, दोनों प्रकार के उद्यमियों को शामिल किया जाए।

विचार करें कि किस तरह से बाजार को विकसित किया जा सकता है

यह समूह उन क्षेत्रों को अपनाए, जिनमें आपको लगता है कि हमें प्रभाव बनाने की जरूरत है। इन क्षेत्रों की वैश्विक प्रथाओं का अध्ययन करें। इस बात पर विचार करें कि किस तरह से बाजार को विकसित किया जा सकता है? इसके अलावा कमियां बताएं और सरकार की नीतियों में बदलाव का सुझाव दें।

समूहों में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए

मोदी ने कहा कि ऐसे समूहों में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, बैंकिंग को ही लीजिए.. बैंकिंग क्षेत्र क्यों नहीं बढ़ रहा है, समस्याओं का पता लगाएं। हर सप्ताह सूरत के हीरा उद्योग के प्रतिनिधि मुझसे मिलकर कहते हैं कि बैंक उन्हें कर्ज नहीं देते। वे मुझसे कुछ करने का अनुरोध करते हैं। इसलिए हमें देखना होगा कि हमारी नीतियां कहां गलत हो रही हैं? हमारे पास प्राथमिकताओं (बैंकिंग क्षेत्रों में) के ऐसे प्रश्न क्यों हैं?

समूहों में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए

मोदी ने कहा कि ऐसे समूहों में विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, बैंकिंग को ही लीजिए.. बैंकिंग क्षेत्र क्यों नहीं बढ़ रहा है, समस्याओं का पता लगाएं। हर सप्ताह सूरत के हीरा उद्योग के प्रतिनिधि मुझसे मिलकर कहते हैं कि बैंक उन्हें कर्ज नहीं देते। वे मुझसे कुछ करने का अनुरोध करते हैं। इसलिए हमें देखना होगा कि हमारी नीतियां कहां गलत हो रही हैं? हमारे पास प्राथमिकताओं (बैंकिंग क्षेत्रों में) के ऐसे प्रश्न क्यों हैं?

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