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आलाेचकों की इस मंशा से एिशयाई छात्रों में डर बैठ गया है। उनका मानना है कि प्रवेश परीक्षा बंद हुई तो प्रतिभावान छात्रों को परेशानी होगी।

बांग्लादेशी प्रवासियों की 17 वर्षीय बेटी तौसीफा हक अमेरिका के ब्रोंक्स में परिवार के साथ रहती है। वह रोज सुबह मेट्रो पकड़कर डेढ़ घंटे की यात्रा के लिए ब्रुकलिन टेक्निकल हाईस्कूल में पढ़ने जाती है

बांग्लादेशी प्रवासियों की 17 वर्षीय बेटी तौसीफा हक अमेरिका के ब्रोंक्स में परिवार के साथ रहती है। वह रोज सुबह मेट्रो पकड़कर डेढ़ घंटे की यात्रा के लिए ब्रुकलिन टेक्निकल हाईस्कूल में पढ़ने जाती है। ब्रुकलिन तक पहुंचते-पहुंचते उसके साथ दोस्तो समेत छात्रों का सैलाब सा उमड़ पड़ता है। इस हाई स्कूल – बंगाली और तिब्बती, मिस्र और चीनी, सिंहली, रूसी, डोमिनिकन और प्यूर्टो रिकन, भारतीय और अफ्रीकी नागरिकों के बच्चे पढ़ते हैं।

कुल मिलाकर 8 मंजिला इमारत में 5,850 छात्र हैं, जो अमेरिका के सबसे बड़े और अकादमिक रूप से कठोर सख्त स्कूलों में से एक है। यहां पढ़ने का सपना तौसीफा समेत मध्यम और निम्न आय वर्ग के हर छात्र-छात्रा का होता है। लेकिन ब्रुकलिन टेक जैसे बड़े स्कूलों मेें गैर अमेरिकियों और अश्वेतों की बढ़ती संख्या से आलोचक सवाल उठाने लगे हैं।

वह दबाव डाल रहे हैं कि स्टुयवेसेंट, ब्रुकलिन टेक जैसे तमाम बड़े स्कूलों में प्रवेश परीक्षा बंद कर दी जाए, ताकि उन्हें मौका मिले, जो प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर सकते हैं। उनका तर्क है कि बाहरी टैलेंटेड छात्रों के साथ अगर औसत छात्र पढ़ेंगे तो वह भी पढ़ाई में अच्छा सकेंगे। वैसे भी ब्रुकलिन टेक जैसे स्कूलों में एशियाई मूल के बच्चों की संख्या 61% तक पहुंच चुकी है।

वहीं एलीट क्लास के बच्चों की संख्या 20% से भी कम है। इससे एलीट वर्ग के छात्र अलग-थलग पड़ने का अंदेशा रहता है। आलाेचकों की इस मंशा से एिशयाई छात्रों में डर बैठ गया है। उनका मानना है कि प्रवेश परीक्षा बंद हुई तो प्रतिभावान छात्रों को परेशानी होगी।

अश्वेत छात्रों की संख्या बढ़ सके, इसलिए बदलाव

प्रवेश परीक्षा की बहस न्यूयॉर्क के चुनिंदा हाई स्कूलों से बहुत आगे तक पहुंच चुकी है। सैन फ्रांसिस्को बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने योग्यता-आधारित प्रवेश नीति तक को छोड़ दिया है। उसने लोवेल हाई स्कूल में लॉटरी प्रणाली को पुन: लागू करने का फैसला किया है। इस स्कूल में 55% छात्र एशियाई मूल के थे।

फेयरफैक्स काउंटी, वीए के अधिकारियों ने थॉमस जेफरसन हाई स्कूल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी में ग्रेड और सामाजिक आर्थिक मानदंडों के संयोजन के साथ प्रवेश परीक्षा बदल दी है। इससे अगले सत्र से एिशयाईयों के मुकाबले अश्वेत, लैटिन छात्रों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

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