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उदयपुर में जघन्य हत्या के बाद कर्फ्यू

इंटरनेट बंद 7 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू, पूरे राजस्थान में इंटरनेट बंद

नूपूर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट की वजह से राजस्थान के उदयपुर में एक टेलर कन्हैयालाल की बर्बरता से हत्या कर दी गई। गला रेतकर की गई नृशंस हत्या की जांच में अब तक जो खुलासे हुए हैं वे बेहद चौंकाने वाले हैं। हत्याकांड का पाकिस्तान से भी लिंक सामने आया है। घटना को अंजाम देने वाले दो आरोपियों का कनेक्शन काराची बेस्ड सुन्नी इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी से सामने आया है। इसका पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से भी है। जांच से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी है।   मंगलवार को भीलवाड़ा निवासी 38 साल के रियाज अटारी और उदयपुर के रहने वाले 39 वर्षीय गौस मोहम्मद ने टेलर कन्हैयालाल की धारदार हथियार से गर्दन काटकर हत्या कर दी। पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाली बीजेपी की पूर्व प्रक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन की वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया गया। रियाज एक वेल्डर है और हत्या में इस्तेमाल हथियार को उसने इस विवाद से काफी पहले तैयार किया था। 

घटना को अंजाम देने के बाद उदयपुर से भागे आरोपियों को राजस्थान पुलिस ने राजसमंद जिले में नाका लगाकर दबोचा। दोनों आरोपी अजमेर शरीफ दरगाह की ओर बढ़ रहे थे और वहां एक अन्य वीडियो शूट करने वाले थे। कन्हैया की हत्या के तुरंत बाद इन्होंने हमले और इसकी जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए वायरल कर दिए थे। एक वीडियो में इन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को भी धमकी दी है। 
दोनों आरोपियों से अब तक हुई पूछताछ में इन्होंने खुलासा किया है कि वे सुन्नी इस्लाम के सूफी बरेलवी पंथ से जुड़े हुए हैं। इन्होंने काराची में मौजूद संगठन दावत-ए-इस्लामी से संबंध भी स्वीकार किया है। आतंकरोधी अभियान के अधिकारियों के मुताबिक, इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इनका भारत में मौजूद दूसरे कट्टरपंथी सुन्नी संगठनों और ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से भी लिंक है। दोनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और केस को एनआईए के हवाले किया जा रहा है।
कराची स्थित दावत-ए-इस्लामी का लक्ष्य कुरान और सुन्नाह का प्रचार प्रसार है। यह संगठन इस्लाम की शिक्षा के नाम पर लोगों को कट्टर बनाता है और दुनियभार में शरिया लागू करने की वकालत करता है। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में इसके समर्थक हैं और इस्लामिक देशों में ईशनिंदा कानून लागू कराने के लिए काम करता है।

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