दिल्ली वाले रहें तैयार! अगले तीन दिनों में कभी भी हो सकती है आर्टिफिशियल बारिश; अपडेट आया सामने

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दिल्ली वाले रहें तैयार! अगले तीन दिनों में कभी भी हो सकती है आर्टिफिशियल बारिश; अपडेट आया सामने

देश की राजधानी दिल्ली को प्रदूषण और धुंध से राहत दिलाने के लिए बहुप्रतीक्षित क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम वर्षा कराई जाएगी। इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। क्लाउड सीडिंग को अंजाम देने वाला विशेष विमान सेसना एयरक्राफ्ट कानपुर से मेरठ के लिए रवाना हो चुका है। यह विमान मेरठ में तैनात रहेगा और बादलों की अनुकूल स्थिति को देखते हुए कल से अगले तीन दिनों में कभी भी क्लाउड सीडिंग कराई जा सकती है।

ऑपरेशन के लिए विमान तैयार क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए विमान में आवश्यक उपकरण फिट कर दिए गए हैं और यह मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। वैज्ञानिकों और अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया शुरू करने की अंतिम अनुमति दिल्ली और सटे NCR क्षेत्र पर पर्याप्त बादल छाए रहने पर निर्भर करेगी।

मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने क्या कहा?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि क्लाउड सीडिंग के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सेसना विमान और आवश्यक उपकरण जगह पर हैं, पायलटों को लाइसेंस मिल चुका है।

मंत्री सिरसा ने बताया कि अब केवल भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से हरी झंडी मिलने का इंतजार है, ताकि जैसे ही बादल बनें, ऑपरेशन शुरू किया जा सके।

सिरसा ने कहा, “क्लाउड सीडिंग के लिए बादल होना अनिवार्य है। हमें IMD से पूरी अनुमति मिल चुकी है और सबकुछ नियंत्रण में है। विमान आ चुके हैं, जिनमें सेसना भी शामिल है, और सारा जरूरी उपकरण लग चुका है। पायलटों के पास लाइसेंस है। अब हम बस मौसम विभाग से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि अगले एक सप्ताह के भीतर, जैसे ही बादल बनेंगे, क्लाउड सीडिंग संचालन किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने केवल बातें कीं, हमने 7 महीनों में वास्तव में जमीनी काम किया। मंजूरी, समझौते, समझौता ज्ञापन (MOUs), वैज्ञानिकों के साथ परामर्श और पायलटों एवं विमानों के साथ व्यवस्था की।”

क्लाउड सीडिंग क्या है?

बता दें कि क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसका उपयोग वातावरण में कुछ पदार्थों को फैलाकर वर्षा की संभावना को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इन पदार्थों के कारण बादलों के भीतर पानी की बूंदों का संघनन तेज होता है, जिससे अंततः वर्षा होती है। आमतौर पर, सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड, या सोडियम क्लोराइड जैसे यौगिकों को विमानों या जमीन आधारित जनरेटर से नमी वाले बादलों में छोड़ा जाता है।

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