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मुख्यमंत्री बोले- बजट में जो चाहो मांग लो:ऐसा मौका कभी नहीं आएगा

गहलोत किसान आयोग अध्यक्ष महादेव सिंह खंडेला और उपाध्यक्ष दीपचंद खैरिया के पद संभालने के मौके पर बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- बजट में जो चाहे मांग लो, ऐसा मौका फिर नहीं आने वाला। 23 को बजट आ रहा है। उससे पहले कोई सुझाव देना चाहें तो किसान आयोग अध्यक्ष और उपाध्यक्ष आपस में बात कर दे सकते हैं। कृषि मंत्री को भी मैंने खास तौर से कहलवाया है। अगर विभाग की तरफ से और कोई बात करना चाहते हैं तो बताइएगा। जो चाहो वो मांग लो, ऐसा मौका कभी नहीं आएगा। गहलोत किसान आयोग अध्यक्ष महादेव सिंह खंडेला और उपाध्यक्ष दीपचंद खैरिया के पद संभालने के मौके पर बोल रहे थे।

गहलोत ने कहा- कृषि का क्षेत्र इतना बड़ा है, इसके बारे में कई तरह की चर्चाएं शुरू से ही होती रहती हैं। समय आ गया है कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाएं। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हम 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर देंगे। अभी तक शायद वो उसमें पूरी तरह कामयाब नहीं हुए हैं। हम लोग चाहेंगे कि किसान की आमदनी बढ़े। किसान मजबूत हों, इसीलिए सरकार में लगातार कई योजनाएं व नवाचार लागू किए जा रहे हैं।

गहलोत ने कहा- 23 तारीख को अलग से कृषि बजट की शुरुआत हो रही है। मैं उम्मीद करता हूं, आप लोगों को लगेगा कि पहला प्रयास अच्छा रहा है। कुछ कमियां भी रह सकती हैं। आप लोगों के सुझाव आएंगे तो अगली बार उसमें सुधार करेंगे।

कृषि बिजली की अलग कंपनी बनाने में दिक्कत गहलोत ने कहा- हमने अलग से कृषि बजट पेश करने का फैसला करके एक शुरुआत की है। हमने किसानों के लिए अलग से बिजली कंपनी बनाने का फैसला किया, लेकिन उसमें अभी थोड़ी दिक्कत आ रही है। वह काम भी बड़ा है। सारे जीएसएस और सिस्टम को कैसे अलग करें, क्या करें, इस पर काम चल रहा है।

इजराइल की तर्ज पर राजस्थान के किसानों को लाभ मिले गहलोत ने कहा- हम किसानों के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं ला रहे हैं। जब नारायण सिंह किसान आयोग के अध्यक्ष थे, तब किसानों का एक डेलिगेशन इजरायल गया था। मैं भी बाद में गया था। मुझे मालूम है कि इजराइल में उन्नत खेती का माहौल है। पहले इजराइल भी हमारी तरह रेगिस्तानी इलाका था। आज वहां की खेती की दुनियाभर में पहचान बन गई है। हम भी चाहेंगे कि हमारे किसानों को भी इजराइल की तरह लाभ मिले। कई तरह की नई तकनीकें वहां देखने को मिलीं थीं। राजस्थान में बहुत गुंजाइश है।

मैं बचपन से अंग्रेजी का विरोधी रहा गहलोत ने कहा- जमाना बदल गया है। हमारे राजस्थान जैसे प्रदेश में अंग्रेजी नहीं सीखने के कारण बच्चे को तकलीफ होती है। मैं खुद बचपन से अंग्रेजी का विरोधी रहा हूं। कल ही मैंने हाउस में कहा था। एक जमाना था जब दक्षिण में हिंदी का और उत्तर भारत में अंग्रेजी का बोर्ड जला देते थे। उस वक्त हम सोचते थे कि अंग्रेजी क्या काम आएगी, इसलिए हमारी भी अंग्रेजी में ढंग से बातचीत करने की हैबिट नहीं पड़ी। तुक्का लगाकर बात कर लो खाली बस।

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