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भारतीय कंपनियों ने विदेशों में निवेश बढ़ाया

भारतीय कंपनियों का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मार्च 2022 में सालाना आधार पर 8.5 फीसदी बढ़कर 3.34 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया

भारतीय कंपनियों का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मार्च 2022 में सालाना आधार पर 8.5 फीसदी बढ़कर 3.34 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। भारतीय कंपनियों ने एक साल पहले इसी महीने (मार्च) में अपनी विदेशी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों (WOSs) और संयुक्त उद्यमों (JVs) में 3.1 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया था। वहीं, अगर फरवरी 2022 की बात करें तो इस महीने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 940.62 मिलियन अमरीकी डालर था।

मार्च 2022 में किस खंड में कितना निवेश किया गया?

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 में निवेश की गई कुल राशि में से 1.31 बिलियन अमेरिकी डॉलर गारंटी जारी करने के रूप में की गई; 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण के रूप में और 866.93 मिलियन अमेरिकी डॉलर इक्विटी के रूप में निवेश किए। रिजर्व बैंक ने कहा है कि ये आंकड़े अस्थायी हैं और इनमें बदलाव हो सकता है।

किस-किसने कितना निवेश किया?

मार्च में अपने विदेशी उपक्रमों में पूंजी लगाने वाले प्रमुख निवेशकों टाटा कम्युनिकेशंस, जिंदल स्टील एंड पावर, विप्रो और जिंदल सॉ हैं। टाटा कम्युनिकेशंस ने सिंगापुर में 690 मिलियन डॉलर, जिंदल स्टील एंड पावर ने मॉरीशस में 366 मिलियन डॉलर, विप्रो ने साइप्रस में 204.96 मिलियन डॉलर और जिंदल सॉ ने संयुक्त अरब अमीरा तें 64.50 मिलियन डॉलर का निवेश किया। सभी ने अपनी WOS कंपनियों में पैसा निवेश किया।

रेस्टोरेंट ब्रांड आइसा और ल्यूपिन लिमिटेड ने क्रमशः इंडोनेशिया और अमेरिका में अपने संयुक्त उद्यम में 141.34 मिलियन अमरीकी डालर और 131.25 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया है। वहीं, आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस न्यू एनर्जी ने नॉर्वे में डब्ल्यूओएस में 87.73 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया, मोहल्ला इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड ने मॉरीशस में एक पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई में 86 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया और ओएनजीसी विदेश ने रूस में एक संयुक्त उद्यम में 83.31 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश किया।

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