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यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे शुरू होने जा रहा है यह पार्क,

यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) के किनारे रेडीमेंट गारमेंट यूनिट को लेबर आसानी से मिल जाए,

 शुरुआत में अपैरल पार्क (Apparel Park) की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 150 यूनिट लगने की उम्मीद है. देश तथा विदेश के 66 बड़े निवेशकों ने बीते चार वर्षों में टेक्सटाइल और गारमेंट के सेक्टर (Textile and garment sector) में 8715.16 करोड़ रुपए के निवेश करने संबंधी प्रस्ताव सरकार को सौंपे हैं. इन 66 प्रस्तावों में से 12 टेक्सटाइल फैक्ट्री राज्य में लग गई हैं और 18 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों के निर्माण का कार्य चल रहा है.

आने वाले एक से दो महीने में यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) के किनारे अपैरल पार्क (Apparel Park) शुरू हो जाएगा. पार्क वक्त से शुरू हो जाए इसके लिए यमुना अथॉरिटी (Yamuna Authority) ने एक बड़ा कदम उठाया है. इस पार्क के लिए अथॉरिटी 70 प्लाट का आवंटन कारोबारियों को कर चुकी है. अब प्लाट की रजिस्ट्री हो जाए इसके लिए अथॉरिटी ने लीज प्लान भी जारी कर दिया है. शुरुआत में 30 प्लाट के लिए लीज प्लान जारी किया जाएगा. प्लाट की रजिस्ट्री कराने के बाद कारोबारी प्लाट पर निर्माण कार्य करा सकेंगे. इस पार्क के शुरू होते ही गौतम बुद्ध नगर (Gautam Budh Nagar) जल्द ही रेडीमेड गारमेंट का हब बन जाएगा. कपड़ा मंत्रालय से भी अपैरल पार्क को मंजूरी मिल चुकी है. वहीं दूसरी ओर नोएडा (Noida) में 150 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क बनाने की तैयारी भी चल रही है. ये खास सुविधाएं होंगी अपैरल पार्क में यमुना अथॉरिटी की ओर से बनाए जा रहे अपैरल पार्क को खास बनाने और सभी तरह की सुविधाएं देने के लिए पार्क के पास ही फैक्ट्री शेड, भूखंड, वेयर हाउसिंग सुविधाएं, टूल रूम, रॉ मैटेरियल बैंक, टेस्टिंग और शोध व अनुसंधान के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर, कौशल उन्नयन केंद्र, ट्रक टर्मिनल, पार्किंग सुविधाएं, मशीनों की रिपेयरिंग के लिए दुकानें, कर्मचारियों के लिए डॉरमेट्री या हॉस्टल, इनक्यूबेशन सेंटर, फैशन इंस्टीट्यूट, ट्रेनिंग सेंटर और डिजाइनिंग आदि होंगे. 300 एकड़ में अपैरल पार्क बनकर तैयार होगा. शुरुआत में यहां करीब 150 यूनिट आएंगी. फ्लैटेड फैक्ट्री कॅन्सेप्ट से होगा रेडीमेड गॉरमेंट का काम जानकारों की मानें तो यमुना अथॉरिटी फ्लैटेड फैक्ट्री कॅन्सेप्ट पर ई इंडस्ट्री को अपने यहां मौका दे रही है. इसमे से एक रेडीमेड गॉरमेंट इंडस्ट्री भी है. फ्लैटेड फैक्ट्री कॅन्सेप्ट के तहत फैक्ट्री के लिए लम्बी-चौड़ी महंगी जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होती है. क्योंकि इस तरह की इंडस्ट्री में भारी-भरकम और बड़ी मशीनरी की जरूरत नहीं होती है तो अथॉरिटी इसके लिए फ्लैटनुमा बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कराएगी. इमारत के हर फ्लोर पर काम के हिसाब से स्ट्राक्चर तैयार किया जाएगा. जैसे जूता सिलाई, रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक-इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, हैंडीक्राफ्ट, फैशन डिजाइन, आईटी सेक्टर से जुड़े केपीओ, बीपीओ, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजाइनिंग, असेंबलिंग की छोटी फैक्ट्रियों के लिए इस तरह के फ्लोर तैयार किए जाते हैं. खास बात यह है कि फ्लैटेड फैक्ट्रियों में काम से जुड़े जरूरी संसाधन पहले से ही मौजूद होते हैं. जानकारों का कहना है कि फ्लैटेड फैक्ट्री कॉन्सेप्ट से ऐसे कारोबारी भी अपना काम कर सकते हैं जिनके पास कम लागत है. जो ज़मीन खरीदकर उस पर फैक्ट्री नहीं बनवा सकते हैं. ऐसे लोगों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री कॅन्सेप्ट बहुत काम आता है.  

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