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सम्भल में हैंडीक्राफ्ट का कार्य दुनियाभर में प्रसिद्ध

सम्‍भल ज‍िले की उपनगरी सरायतरीन का हैंडीक्राफ्ट कारोबार दुनिया भर में जाना जाता है।

सम्‍भल ज‍िले की उपनगरी सरायतरीन का हैंडीक्राफ्ट कारोबार दुनिया भर में जाना जाता है। यहां के कारीगर जानवरों के हड्डी सींग से नई-नई कलाकृतियां बनाकर विदेशी खरीदारों को इस ओर आकर्षित करते हैं। पहले इसकी शुरुआत सींग से बनी कंघी से हुई थी, इसके बाद समय-समय पर कारीगर इसमें परिवर्तन कर समय की मांग के अनुसार नए नए आइटम बनाते रहे।

सम्भल के हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में खूब धूम है। लगभग सराय तरीन के हर घर में पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग का काम होता है। सम्भल का हस्तशिल्प उद्योग लगभग 150 साल पुराना है। सम्भल वैसे तो एक छोटा जिला है। लेकिन इसके हस्तशिल्प उद्योग की पूरी दुनिया के बाजार में अपनी एक अलग पहचान है। अमेरिकन बाजार, यूरोपियन बाजार, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, यूके, बेल्जियम, नीदरलैंड, दुबई आदि देशों में यहां के हस्तशिल्प उत्पादों की बहुत अधिक डिमांड रहती है।

शहर के सराय तरीन में हड्डी और सींग पर कलाकृतियां उकेर नए-नए रूप देकर दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुके हैंडीक्राफ्ट कार्य देश नहीं दुनिया भर में प्रसिद्ध है। सबसे पहले यहां पर सींग से कंघी बनाई जाती थी। इसके बाद 1965 से 70 के बीच में हड्डियों ओर सींग की ज्वैलरी का प्रचलन हुआ जो दुनिया भर में पसंद की गई।

इसके बाद 80 से लेकर अब तक हैंडीक्राफ्ट में यहां के कारीगर नई-नई आकृतियों को उकेर कर हड्डी सींग को नया रूप देते हैं इससे इसकी पहचान दुनिया भर में हैं। शहर के लगभग 25000 लोग इस कार्य से जुड़े हैं। इसी वजह से उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कार्य को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया है। सालाना लगभग 500 करोड़ का टर्नओवर इस कार्य द्वारा किया जाता है।

रिपोर्टर – उवैस दानिश

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