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सियासी ताकत दिखाने की तैयारी में जिनपिंग, ओपनिंग सेरेमनी में पुतिन और इमरान खान समेत 32 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाया

ओपनिंग सेरेमनी में शामिल होने वाले राष्ट्राध्यक्षों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाख, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नाम प्रमुख है।

चीन की राजधानी बीजिंग में 4 फरवरी से शुरू होने वाले विंटर ओलिंपिक की तैयारियां अपने आखिरी पड़ाव पर हैं। ओलिंपिक के बहाने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी सियासी ताकत दिखाने की तैयारी भी कर रहे हैं। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, इस इवेंट की ओपनिंग सेरेमनी में 32 देशों के राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे। इनमें यूरोप से 6, मध्य एशिया से 5, मध्य पूर्व से 3, दक्षिण अमेरिका से 2 और एशिया, प्रशांत और अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं।

ओपनिंग सेरेमनी में शामिल होने वाले राष्ट्राध्यक्षों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाख, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नाम प्रमुख है। ओलिंपिक तैयारियों के बीच चीन में कोरोना और वायु प्रदूषण का खतरा भी बढ़ रहा है।

जिनपिंग के ड्रीम इवेंट पर 29 हजार करोड़ रुपए का खर्च

बीजिंग विंटर ओलिंपिक शी जिनपिंग का ड्रीम इवेंट है। इसके ऊपर 29 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

चीन ने विंटर ओलिंपिक पर लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का भारी भरकम खर्च किया है। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस ड्रीम इवेंट को लेकर विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा ने इसका डिप्लोमैटिक बायकॉट कर दिया है। इसके अलावा दुनिया भर के मानवाधिकार समूह और कार्यकर्ताओं ने भी मानवाधिकारों के हनन पर विंटर ओलिंपिक का बहिष्कार करने की मांग की है।

मानवाधिकारों का हनन को लेकर विरोध

अमेरिका समेत डिप्लोमैटिक बायकॉट करने वाले देश टीमें भेजेंगे, लेकिन डिप्लोमैट्स नहीं जाएंगे।

विरोध करने वाले देशों का आरोप है कि चीन में मानवाधिकारों का हनन यानी ह्यूमन राइट्स वायलेशन्स होते हैं। डिप्लोमैटिक बायकॉट करने वाले देश स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिए तो टीमें भेजेंगे, लेकिन इसके साथ जाने वाले डिप्लोमैट्स नहीं जाएंगे। कूटनीतिक तौर पर यह कदम सांकेतिक ही सही, लेकिन चीन के लिए बड़ा झटका है।

चीन की तरफ से भी इन देशों को चेतावनी दी गई। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा- हमारे यहां होने वाले विंटर ओलिंपिक गेम्स का कुछ देशों ने डिप्लोमैटिक बायकॉट किया है। हम साफ कर देना चाहते हैं कि खेलों में सियासत गलत है और इन देशों को इस बायकॉट की कीमत चुकानी होगी।

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