तंबाकू-पान मसाला और लंबी चलने वाली दवाओं से लार कम बन रही है। इससे मुंह में संक्रमण बढ़ने के साथ दांत-मसूड़े कमजोर हो रहे हैं। पेट के विकार बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा है। एमजी रोड स्थित होटल में एंडोडोंटिस्ट एक्सीलेंस फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यशाला एंडो रेस्टो कॉन्क्लेव के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
मुख्य वक्ता चेन्नई के डॉ. गोपी कृष्ण ने बताया कि 60-70 फीसदी लोगों में दांतों की परेशानी मिल रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू, पान-मसाला और फास्टफूड है। रोजाना 600 एमएल लार बनती है। मसाला, गुटका, तंबाकू में केमिकल होने से लार बनने में 30 फीसदी की कमी आई है। इससे मसूड़ों की पकड़ कमजोर हो रही है, जिससे दांत हिलने लगते हैं। तंबाकू के रसायन दांत और मसूड़ों से चिपक जाते हैं, जिससे संक्रमण होने लगता है। ऐसे युवाओं में मुख के कैंसर का तीन गुना खतरा भी अधिक है। मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग समेत अन्य मर्ज की लंबे समय तक दवा खाने वालों में भी ये परेशानी मिल रही है। इससे मुंह का सूखापन, अपच, अल्सर और पेट के विकार भी पनप रहे हैं।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा और डॉ. मालिनी भौमिक ने बताया कि बच्चों और युवाओं का खानपान बिगड़ गया है। इससे पायरिया, दांतों में दर्द, मसूड़ों में जख्म समेत अन्य परेशानी मिल रही है। समापन पर अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता ने सभी को स्मृति चिह्न दिए। कार्यशाला में आयोजन सचिव डॉ. विपुल अरोरा, डॉ. असीम शिरोमणि, डॉ. भरत चौहान, डॉ. सुषमा प्रतिहार, डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव, डॉ. चकित माहेश्वरी, डॉ. राहुल तेहरिया, डॉ. जया पंबू, डॉ. विवेक शाह, डॉ. जाह्नवी पटनी, डॉ. अभिषेक भार्गव आदि मौजूद रहे।
इन बातों का रखें ध्यान:
– तंबाकू, पान मसाला व गुटका खाने से बचे।
– अंगुली से मंजन न करें, तंबाकू वाले मंजन से बचे।
– सुबह नाश्ता करने के बाद ब्रश फायदेमंद है।
– दांतों में दर्द, ठंडा-गर्म लगने पर डॉक्टर को दिखाएं।

