स्वास्थ्य

नियमित रूप से कीजिए सूर्य नमस्कार का अभ्यास

इस योग के अभ्यास से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।

शरीर के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए तमाम तरह के योगासनों का अभ्यास करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है। इसमें भी सूर्य नमस्कार का अभ्यास आपके लिए विशेष फायदेमंद माना जाता है। जीवन देने वाली ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करने में सूर्य नमस्कार का अभ्यास आपके लिए लाभदायक हो सकता है। आधायात्म के अनुसार सूर्य, ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इस योग का अभ्यास आपको कई तरह से लाभान्वित कर सकता है। सूर्य नमस्कार करने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय से पहले का होता है। यह शारीरिक और मानसिक शक्ति को बढ़ाने के साथ, शरीर पर बेहतर नियंत्रण बनाने, मन को शांति देने, संतुलित ऊर्जा और आंतरिक शांति प्रदान करने में मददगार है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास आपको अधिक जागरूक बनाने की भी एक शक्तिशाली तकनीक है। नियमित अभ्यास से यह शरीर, श्वास और चेतना के बीच गहरा संबंध स्थापित करने में भी मदद करने वाला योग है। आइए आगे की स्लाइडों में इस योग के अभ्यास से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। सूर्य नमस्कार का अभ्यास कैसे करें? योग विशेषज्ञों के मुताबिक सूर्य नमस्कार सबसे आसान और अत्यंत प्रभावी अभ्यासों में से एक है। इसमें 12 अलग-अलग स्थितियों में सूर्य को प्रणाम करना होता है। प्रणाम मुद्रा, हस्त उत्तानासन, पश्चिमोत्तनासन, अश्व संचालन आसन, पर्वतासन, अष्टांग नमस्कार और भुजंगासन जैसे अभ्यास करना आपके लिए विशेष फायदेमंद हो सकते हैं। शुरुआत के दिनों में 5 चक्रों के साथ अभ्यास शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे इसे 11 चक्र प्रतिदिन तक बढ़ा सकते हैं। आसनों के सही जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें।
सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने के क्या लाभ हैं? योग विशेषज्ञों के मुताबिक सूर्य नमस्कार कई तरह से आपके मन और शरीर को लाभ प्रदान कर सकता है।
  • वजन कम करने में मदद करता है।
  • आपको रोगमुक्त और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
  • तन और मन के संतुलन को बढ़ाता है।
  • रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।
  • पाचन तंत्र में सुधार करता है।
  • दिल को मजबूत करता है।
  • पेट की मांसपेशियों, श्वसन प्रणाली, लसीका प्रणाली, रीढ़ की हड्डी और अन्य आंतरिक अंगों को उत्तेजित करता है।
  • रीढ़, गर्दन, कंधे, हाथ, हाथ, कलाई, पीठ और पैर की मांसपेशियों को टोन करता है, जिससे समग्र लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है।
  • मनोवैज्ञानिक रूप से यह शरीर, श्वास और मन के परस्पर संबंध को नियंत्रित करता है।
  • मन को शांत करते हुए शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है।

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