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बिजनौर में सरकारी जमीन पर सैकड़ों किसानों व भू माफियाओं ने किया कब्जा

बिजनौर में करोड़ों रुपए की हजारों बीघा सरकारी जमीन पर सैकड़ों किसानों व भू माफियाओं ने कब्जा करके जमीन में तरह-तरह की फसलें उगा रहे थे

बिजनौर में करोड़ों रुपए की हजारों बीघा सरकारी जमीन पर सैकड़ों किसानों व भू माफियाओं ने कब्जा करके जमीन में तरह-तरह की फसलें उगा रहे थे और इतना ही नहीं सरकारी अमला कुंभकरण की नींद सोता रहा और किसानों ने कब्जाई सरकारी जमीन पर कई बैंकों से बाकायदा करोड़ रुपए का लोन भी ले रखा है भले ही सरकार के नुमाइंदे देर से जागे हो लेकिन सरकारी राजस्व की करोड़ों रुपए की राशि जमीन घोटाले के भंवर में फंसती नजर आ रही है । बतादें कि, सरकार के नुमाइंदों की लापरवाही का आलम उस वक्त देखने को मिला जब सरकार ने जंगल झाड़ी की सरकारी करोड़ों रुपए की जमीन की अनदेखी की. जिसका नतीजा यह रहा कि साल 1950 और 1955 से बिजनौर की नगीना के तकरीबन 17 गांव में सैकड़ों किसानों व भू माफियाओं ने सरकारी जंगल झाड़ी की जमीन पर कब्जा करके बैठ गए कब्जाई जमीन पर किसानों ने बाकायदा कई बैंकों से जमीन के कागज रखकर तकरीबन 100 करोड़ रुपए के आसपास लोन भी ले रखा है हजारों बीघा सरकारी जमीन कब्जाए जाने के बाद हरकत में आया प्रशासन के अमले ने किसानों व भू माफियाओं द्वारा कब्जाई गई जमीन को मूल श्रेणी में तो दर्ज कर लिया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किसान व भू माफियाओं ने करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर लोन ले रखा है उसे सरकारी बैंक भूमाफिया किसानों के चंगुल से कब तक वसूल पाएगा । हालांकि सरकार के नुमाइंदे दबी जुबान में ज़्यादा कुछ मीडिया से बताने से भी कतरा रहे है।

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