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5 दशक तक विधायक और 6 बार सीएम रह चुके प्रतापसिंह राणे पर आजीवन कैबिनेट मंत्री के दर्जे पर बवाल

एडवोकेट व सामाजिक कार्यकर्ता आइरिस रोड्रिगिस ने बताया कि यह देश का पहला मामला है जब किसी को लाइफटाइम कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है

छह बार मुख्यमंत्री और 50 साल तक विधायक रह चुके 87 वर्षीय कांग्रेस नेता प्रतापसिंह राणे को आजीवन कैबिनेट मंत्री का दर्जा भले ही गोवा विधानसभा चुनाव से पहले दे दिया गया था लेकिन इस पद को लेकर अब बवाल मच रहा है। इस पद को असंवैधानिक बताते हए बाम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में दो मई को सुनवाई है। कौन है प्रतापसिंह राणे? क्या है मामला और क्या है दलील?

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी से की करियर की शुरुआत : प्रताप सिंह राणे का जन्म 28 जनवरी 1939 को गोवा के संक्वेलिम में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा गोवा में हुई। उसके बाद उन्होंने यूएस से बीबीए की डिग्री हासिल की थी। राजनीतिक करियर की शुरुआत महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी से किया था। वह पार्टी का बड़ा चेहरा माने जाते है। वह 11 बार विधायक रह चुके हैं।

मनाने के लिए दिया गया पद : राजनीतिक सूत्रों के अनुसार प्रताप सिंह राणे गोवा विधानसभा चुनाव में लडऩे को तैयार थे। एक ही सीट पर पिता और बेटे के आमने-सामने होने से वोट कटने की आशंका थी। इसके मद्देनजर प्र्रतापसिंह राणे को आजीवन कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर मनाया गया। बाद में इस सीट से उनकी पुत्रवधू दिव्या चुनाव लड़कर भाजपा सरकार में विधायक बनीं। उनके बेटे विश्वजीत राणे भी भाजपा सरकार में मंत्री हैं।

12 से ज्यादा नहीं हो सकते हैं मंत्री : नियमानुसार गोवा विधानसभा में 12 से ज्यादा कैबिनेट मंत्री नहीं हो सकते हैं। कांग्रेस के शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिगंबर कामथ ने पार्लियमेंट सेक्रेटरी के तौर पर दो लोगों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। वर्ष 2009 में कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। उसके बाद से गोवा विधानसभा में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। अब आजीवन कैबिनेट मंत्री पद के खिलाफ रोड्रिगिस फिर बाम्बे हाई कोर्ट पहुंचे हैं।

यह सुविधाएं मिलती हैं: आजीवन कैबिनेट मंत्री को अन्य मंत्रियों की तरह 12 लोगों का स्टाफ, सरकारी आवास, गाड़ी सहित यात्रा सुविधा दी जाती है।

एडवोकेट व सामाजिक कार्यकर्ता आइरिस रोड्रिगिस ने बताया कि वर्ष 2007 में मैंने ही पार्लियामेंटरी सेक्रेटरी के खिलाफ बाम्बे हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। वर्ष 2009 में कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला दिया था। उसके बाद गोवा विधानसभा में वह व्यवस्था खत्म हुई।

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