लाइफस्टाइल

कान छिदवाने के बाद हो जाए घाव, तो ऐसे करें सही देखभाल

आभूषण हमेशा से श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एक समय वह भी था जब महिलाएं केवल फूलों या लकड़ी, पत्थर आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बने गहने पहना करती थीं

नाक-कान छिदवाना या पियर्सिंग करवाना एक सामान्य प्रक्रिया रही है। यह नवजात शिशुओं के एक संस्कार के रूप में भी अपनाया जाता है और शौकिया रूप में स्त्री-पुरुष दोनों वयस्कों द्वारा भी। कई बार कान की पियर्सिंग करवाने के बाद एक छोटा घाव सा बन जाता है जिसके लिए ज्यादातर गर्म तेल और हल्दी लगाने की सलाह दी जाती है

स्किन का अधिक संवेदनशील होना, शरीर में किसी प्रकार की समस्या का मौजूद होना जिसकी वजह से घाव को ठीक होने में समय लगे

दर्द से लेकर पस पड़ने तक  कान छिदवाने के बाद कई लोगों को उस जगह पर या उसके आस पास एक उभार सा नजर आता है जिसे आम बोलचाल में मसूरी या फुंसी भी कहते हैं। यह असल में त्वचा के भीतर द्रव्य भर जाने से पैदा होती है और इसे ग्रेन्युलोमा कहा जाता है।

घरेलू उपचार और आराम  कान छिदवाने के बाद देशी इलाज के तौर पर हल्दी और गरम तेल का उपयोग किया जाता है। इससे दर्द में भी राहत मिलती है। इसके अलावा कुछ लोग सॉल्ट वाटर गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर भी घाव को साफ़ करते हैं।  यह अधिक पीड़ादायक हो सकता है। इसलिए इसके उपयोग को संभलकर करें।

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