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इमरान खान की कुर्सी पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। 2018 में सत्ता में आने के बाद से इमरान खान की कुर्सी पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। 2018 में सत्ता में आने के बाद से इमरान खान की कुर्सी पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इमरान खान ने अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से पहले पद छोड़ने के लिए विपक्षी पार्टियों की मांग को खारिज कर दिया है और कहा कि ‘ठगों’ के दबाव में इस्तीफा नहीं देंगे।

बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही शुरू करने के लिए पाकिस्तान की संसद शुक्रवार को बुलाई जाएगी। इमरान खान को हटाया जाएगा या नहीं, यह तय करने में वास्तविक वोटिंग से पहले सात दिन लग सकते हैं।

इमरान खान ने बहुमत खोया

विपक्षी दलों ने इस महीने अपना प्रस्ताव दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि पूर्व क्रिकेट स्टार खान ने अपनी पार्टी के 20 सांसदों के दलबदल के बाद अपना संसदीय बहुमत खो दिया है, उन्हें पद छोड़ना चाहिए। खान ने बुधवार देर रात एक बयान में कहा, “जो भी हो, मैं इस्तीफा नहीं दूंगा।”

खान ने कहा कि वह बिना किसी लड़ाई के आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि “ठगों” के दबाव में इस्तीफा क्यों दूं? उनकी पार्टी के लगभग 20 सांसदों के दलबदल के साथ, उनके कुछ गठबंधन सहयोगियों ने भी यह सुझाव दिया है कि वे विपक्ष में शामिल हो सकते हैं।

पाकिस्तान में बढ़ेगा आर्थिक संकट?

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष पाकिस्तान के लिए 6 बिलियन डॉलर के बचाव पैकेज की अगली किश्त देने से पहले समीक्षा करेगा, लेकिन उससे पहले अविश्वास प्रस्ताव की मांग ने संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक संकटों का खतरा बढ़ा दिया है। आईएमएफ की समीक्षा इस सप्ताह के लिए निर्धारित की गई थी लेकिन अभी तक नहीं हुई है।

सेना से बिगड़े इमरान खान के संबंध?

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी सदस्यों का कहना है कि खान का पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के साथ मतभेद हो गया है, जिसने दशकों से नागरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया है और चार साल पहले खान की पार्टी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इमरान खान इस बात से इनकार करते रहे हैं कि सेना ने उनको पीएम बनाने में मदद की। सेना का कहना है कि वह राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करती है। विपक्ष ने खान पर अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के गलत प्रबंधन का आरोप लगाया। हालांकि वह इससे इनकार करते हैं। बता दें कि किसी भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है।

पाकिस्तान में क्या है बहुमत का खेल?

असंतुष्ट सांसदों के दल बदलने से खान को संसद में साधारण बहुमत के लिए आवश्यक न्यूनतम 172 से कम संख्या के भरोसे छोड़ दिया है। विपक्ष के पास निचले सदन में कुल मिलाकर 163 सीटें हैं, लेकिन वह बहुमत हासिल कर सकता है अगर अधिकांश दलबदलू उसके साथ आ जाएं। 

खान ने अदालत में याचिका दायर कर दलबदलुओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की है और साथ ही उनसे सत्ताधारी दल में लौटने की अपील की है। उन्होंने इस्लामाबाद में एक “मिलियन-मैन” रैली आयोजित करके जनता से अपने प्रीमियरशिप के लिए समर्थन दिखाने का भी आह्वान किया है।

विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे भी अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में रैली करेंगे। तनाव बढ़ने के साथ ही सरकार ने गुरुवार को संसद और अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों के आसपास हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया।

पाकिस्तान का अगला आम चुनाव 2023 के अंत तक होने वाला है, लेकिन आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद ने एक संवाददाता सम्मेलन में सुझाव दिया कि आसन्न टकराव को कम करने के लिए चुनाव जल्दी कराया जा सकता है।

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