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हॉन्गकॉन्ग में इन दिनों पालतू कुत्ते प्राइवेट जेट का सफर कर रहे हैं, खुद के जाने पर क्वारेंटाइन का भारी खर्च

हॉन्गकॉन्ग में इन दिनों पालतू कुत्ते प्राइवेट जेट का सफर कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान वहां एक रोचक घटनाक्रम सामने आया है।

हॉन्गकॉन्ग में इन दिनों पालतू कुत्ते प्राइवेट जेट का सफर कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान वहां एक रोचक घटनाक्रम सामने आया है। दरअसल, कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में लोग जापान, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका चले गए। ऐसे में कई लोगों के पालतू कुत्ते, बिल्ली, चिड़िया और कछुए हॉन्गकॉन्ग में ही छूट गए। लेकिन इन पालतू कुत्तों के मालिक उन्हें लाने के लए हॉन्गकॉन्ग जाने से कतरा रहे हैं।

क्योंकि हॉन्गकॉन्ग में विदेश से आने आने पर क्वारेंटाइन के सख्त नियम हैं। सभी को 21 दिन तक महंगे होटलों में क्वारेंटाइन रहना पड़ता है। चाहे उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आए। लाखों रुपए का होटल का बिल अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। ऐसे में मालिक अपने पालतू जानवरों को लाने के लिए प्राइवेट जेट कर किराए पर ले रहे हैं। क्योंकि जेट का किराया महंगे होटल के किराए से काफी कम पड़ता है।

लोगों के सामने ये भी समस्या आती है कि वो अपने साथ फ्लाइट में पालतू जानवरों को नहीं ले जा पाते हैं, क्योंकि सहयात्री कोरोना काल के दौरान जानवरों के सफर पर ऐतराज करते हैं। लोगों ने अपने पालतू जानवरों को लाने के लिए एक क्लब भी बनाया हुआ है।

इसमें वे लोग मिलकर एक प्राइवेट जेट को किराए पर ले लेते हैं। हॉन्गकॉन्ग में केवल अमीर पैट ओनर ही प्राइवेट जेट किराए पर नहीं ले रहे हैं बल्कि मिडिल क्लास पैट ओनर भी इसमें आगे हैं। पेट ट्रांसपोर्ट से जुड़ीं ओल्गा रदस्का का कहना है कि कोरोना काल में ये बिजनेस लगभग 700 फीसदी तक बढ़ा है।

उड़ान के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट, महीनों का इंतजार भी पैट ट्रांसपोर्ट के लिए पालतू जानवरों के मालिकों को महीनों का इंतजार भी करना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट कंपनी लॉ वोयेज कंपनी की एक अफसर का कहना है कि मालिकों का अपने पालतू जानवरों से बहुत लगाव होता है। उड़ान की लंबी वेटिंग लिस्ट के बावजूद वे अपने जानवरों के लिए पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं।

 

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