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सम्भल में मुस्लिम व्यक्ति के द्वारा बनाये गए दिये से मनाई जाती है दीपावली

अतिसंवेदनशील शहर सम्भल हर त्यौहार पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल पेश करता है। यहां पर सबसे ज्यादा आबादी मुसलमानों की है। यहां हिंदू के हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके घर में दीपावली की पूजा मुसलमानों के हाथ से बनाए गए मिट्टी के दिये से होती है

अतिसंवेदनशील शहर सम्भल हर त्यौहार पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल पेश करता है। यहां पर सबसे ज्यादा आबादी मुसलमानों की है। यहां हिंदू के हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके घर में दीपावली की पूजा मुसलमानों के हाथ से बनाए गए मिट्टी के दिये से होती है जो एक आपसी सद्भावना और गंगा-जमुनी तहजीब की मिशाल है।

आज हम आपको एक ऐसे शहर से रूबरू कराने जा रहे हैं। जहां दीपावली पर मुस्लिम परिवार द्वारा बनाए गए दीपक से दीपावली का पर्व मनाया जाता है। यहाँ हिंदू के हजारों परिवार ऐसे हैं जिनके घर में दीपावली की पूजा मुसलमानों के हाथ से बनाए गए मिट्टी के दिये से होती है। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के अति संवेदनशील शहर सम्भल की जहां मुस्लिम परिवार चाक पर अपना हुनर दिखाकर एक से एक आकर्षक दीप बनाते हैं। यह काम करने वालों को न तो किसी धर्म से मतलब है और न ही किसी मजहब से। हिंदू और मुस्लिम दोनों एक दूसरे के त्योहार में सम्मिलित होते हैं।

यहां से मिट्टी के दीये पूरे जिले में भेजे जाते हैं। दीपावली का त्यौहार इनके द्वारा बनाए गए दीपों के बिना अधूरा सा लगता है। यह परंपरा इनकी तीन पीढ़ियों से चली आ रही है। जनपद सम्भल के सरायतरीन में रहने वाले कय्यूम 35 वर्षों से इस काम को अंजाम दे रहे हैं इनसे पहले यह दीपक इन के दादा परदादा बनाया करते थे। इनका पूरा परिवार दीपावली आने से एक महीने पहले दीपक तैयार करने की तैयारियों में जुट जाता है। लगभग 50 हजार के करीब दीपक तैयार करके यह जिले के अन्य स्थानों पर भेजते हैं। दीपक के साथ साथ यह परिवार हाथी, घोड़ा, ऊंट के अलावा अन्य सामान भी बनाकर दीपावली पर बेचता है।

रिपोर्टर – उवैस दानिश

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