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सफायी के नाम पर निजी कंपनी जमकर कर रहीं मनमानी,अधिकारियों की मिली भगत से विभाग को करोड़ों की लग रही है चपत

लखनऊ – सीवर के ढक्कन बदलो पेमेंट पाओ अभियान में एक बड़े घोटाले की बू आ रही है।दरअसल हालिया बारिस ने जलकल और नगर निगम की पोल खोलकर रख दी है ।

लखनऊ – सीवर के ढक्कन बदलो पेमेंट पाओ अभियान में एक बड़े घोटाले की बू आ रही है।दरअसल हालिया बारिस ने जलकल और नगर निगम की पोल खोलकर रख दी है ।पड़ताल में ये बात साफ देखी जा रही है दोनों विभाग के आलाधिकारियों की मिलीभगत होने की वजह से सीवर की सफायी में बड़ी धांधली का खेल चल रहा है ।दरअसल राजधानी लखनऊ में सीवर सफायी और उसके देखरेख की जिम्मेवारी स्वैज इंडिया और इको ग्रीन के हवाले है।अब खेल ये हो रहा है कि ये कंपनियां बगैर सीवर की सफायी किये ही केवल सीवर के टूटे फूटे ढक्कनों को बदलकर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की बिलिंग करा कर मौज काट रहे हैं।इस भुगतान के ऐवज में विभागीय अधिकारी जमकर कमिशन ले रहे हैं और हालात ये है कि थोड़ी बारिस में हीं राजधानी लखनऊ के कई ईलाके पूरी तरह से जलभराव की चपेट में आ जा रहे हैं।

अब समझने की बात ये भी है कि स्वैज इंडिया और इको ग्रीन समेत करीब एक दर्जन कंपनियों को पहले हीं उनकी कार्यप्रणाली पर नोटिस जारी की जा चुकी है लेकिन कार्यवाही तो दूर इन कंपनियों को लगातार जलकल और नगर निगम से करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की नीति पर सरकार काम कर रही है तो आखिर इन कंपनियों के भुगतान पर अब तक कोई रोक क्यों नही लगायी गयी है।जबकि इन निजी कंपनियों को साफ सफायी का काम सौंपने के पीछे तर्क ये दिया गया था कि राजधानी लखनऊ में स्मार्ट सीटी के रुप में काम संपादित किये जायेंगे।अब इस मौके का फायदा लेकर कई सरकारी कंपनी इन निजी कंपनियों के साथ भी मिलकर काम कर अतिरिक्त धन अर्जन कर रहे हैं ,ऐसे में बेशक राजधानी की सीवर व्यवस्था या साफ सफायी न हो पा रही हो लेकिन कंपनियों के लिये काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के दोनों हाथों में लड्डू हाथ लग गया है।दरअसल राजधानी लखनऊ में कूड़ा सफायी की जिम्मेवारी इको ग्रीन कंपनी के पास है जबकि स्वैज इंडिया के पास सीवर मेंन्टेंस का काम है। इन दोनों कंपनियों को इस काम के लिये भारी भरकम रकम अदा की जा रही है।अब इको ग्रीन की बाते कर ले तो ये कंपनी राजधानी से सटे ईलाकों में हरदिन सैकड़ो टन कूड़ा जमा कर रही है जबकि इनकी कामो के शर्त में कूड़ा प्रबंधन भी शामिल किया गया है ,शिकायत तो ये भी है कि कई ईलाकों से कूड़ा उठाने का काम तक नहीं किया जा रहा है और इन्हे पूरा भुगतान किया जा रहा है। वहीं स्वैज इंडिया को राजधानी के सारे सीवर की सफायी और रख रखाव का काम सौंपा गया है,हल्की बारिस में शहर के कई ईलाकों का जलमग्न होना ये बताने के लिये काफी है कि ये कंपनी कितनी गंभीरता से काम कर रही है।उम्मीद है हमारे खबर लिखने के बाद शायद खुद मुख्यमंत्री नगर निगम और जलकल विभाग में हो रहे इस बड़े धांधली को संज्ञान में लेकर सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगें।

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