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14 फरवरी को ही क्यों इस दिन को मनाया जाता है और आखिर इस दिन की शुरुआत हुई कैसे। बड़ी दिलचस्प है कहानी

कहते हैं प्यार करने के लिए किसी दिन महीने और हफ्ते की जरूरत नहीं होती है लेकिन प्यार का इजहार करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, ऐसे में इस तरह के लोगों की मदद करता है

कहते हैं प्यार करने के लिए किसी दिन महीने और हफ्ते की जरूरत नहीं होती है लेकिन प्यार का इजहार करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, ऐसे में इस तरह के लोगों की मदद करता है प्यार का हफ्ता यानी की वैलेंटाइन वीक। फरवरी के महीने को प्यार का महीना (Month of love) कहा जाता है और इसी प्यार के महीने में 7 फरवरी से शुरूआत होती है।  7 फरवरी से 14 फरवरी तक चलने वाले इस प्यार के त्योहार को प्यार के पंछी खूब मन से मनाते हैं। 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे(Valentine Day)आता है और इस दिन हर कोई अपने पार्टनर के साथ टाइम स्पेंड करता है। लेकिन क्या आपको इस बात की खबर है कि आखिर 14 फरवरी को ही क्यों इस दिन को मनाया जाता है और आखिर इस दिन की शुरुआत हुई कैसे। ऐसे में जानते हैं हर एक सवाल का जवाब कब हुई शुरुआत वैलेंटाइन डे मनाने की शुरुआत रोम के राजा क्लाउडियस के दौर में हुई थी। उस समय रोम के एक पादरी संत वैलेंटाइन थे। उन्हीं के नाम पर वैलेंटाइन मनाने की शुरुआत हुई। दिलचस्प है कहानी माना जाता है कि संत वैलेंटाइन दुनियाभर में प्यार का संदेश बांटते थे। संत वैलेंटाइन की यह बात उस समय रोम के सम्राट रहे क्लाउडियस को बिल्कुल पसंद नहीं थी। क्लाउडियस को लगता था कि रोम के लोग अपने परिवार और पत्नी के साथ मजबूत लगाव होने के कारण सेना में भर्ती नहीं हो रहे हैं। क्लाउडियस अपने किसी भी सैनिक को शादी नहीं करने देता था। सम्राट क्लाउडियस  की इस सोच का संत वैलेंटाइन ने विरोध करते हुए एक जोड़े की शादी करवा दी। उनके ऐसा करने पर राजा  क्लाउडियस ने 14 फरवरी को संत वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा दिया था। आंखें की थी दान संत वैलेंटाइन ने मरने से पहले राजा के मुख्य जेलर को एक चिट्ठी लिखी और मरने के बाद अपनी आंखें उसकी अंधी बेटी को देने की बात कही। संत वैलेंटाइन की मौत के बाद उन्हें याद करते हुए हर साल उनकी याद में यह प्यार का दिन मनाया जाने लगा।  

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