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धुंधली इमेज के आधार पर किया गया था हमला; इसमें 7 बच्चों समेत 10 लोगों की जान गई थी

बात है अगस्त की 2021 की।एक ड्रोन स्ट्राइक की अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया था और अमेरिकी सेना वापसी की तैयारी कर रही थी।

बात है अगस्त की 2021 की। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया था और अमेरिकी सेना वापसी की तैयारी कर रही थी। 31 अगस्त सेना की वापसी की आखिरी तारीख थी। इससे दो दिन पहले अमेरिकी सेना ने काबुल में एक ड्रोन स्ट्राइक की। अमेरिकी इंटेलीजेंस के मुताबिक ISIS आंतकियों को निशाना बनाया गया था, लेकिन इंटेलीजेंस गलत निकली और अमेरिकी हमले में 7 बच्चों समेत 10 नागरिकों की जान चली गई।

अब इस ड्रोन स्ट्राइक का एक नया डीक्लासीफाइड वीडियो सामने आया है, जिसमें ब्लास्ट होते हुए और इलाके में धुएं का गुबार उठते हुए दिखाई दे रहा है। यह वीडियो बता रहा है कि कैसे सेना ने ऐसी तस्वीर देखकर हमला करने का फैसला किया जो धुंधली थी और जिसे रियल-टाइम में समझ पाना मुश्किल था। अक्टूबर में अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन के लिए माफी मांगी थी। ड्रोन स्ट्राइक को भयंकर भूल मानते हुए सेना ने मृतकों के परिवार को आर्थिक मदद देने की पेशकश की थी।

वीडियो देखकर कुछ समझ पाना मुश्किल यह पहली बार है जब काबुल एयरस्ट्राइक का कोई वीडियो जारी हुआ है। 25 मिनट लंबे इस वीडियो को दो MQ-9 Reapers ड्रोन ने शूट किया था। इस फुटेज में हमले से पहले, हमले के दौरान और हमले के बाद का दृश्य देखा जा सकता है।

वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि एक रिहाइशी इलाके में एक घर के पास एक कार आकर रुकती है और आंगन में एंट्री करती है। आंगन में लोगों की धुंधली आकृति दिख रही है और सड़क पर बच्चे चलते दिख रहे हैं। इतने में ही आसमान से मिसाइल आकर गिरती है और घर लपटों में घिर जाता है। आस पड़ोस के लोग भागकर घर की तरफ आते दिखते हैं। पड़ोसी अपनी छतों से आग पर पानी डालने की कोशिश करते देखे जा सकते हैं।

फुटेज ने उठाए सवाल न्यूयॉर्क टाइम्स ने यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के खिलाफ फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन एक्ट जीतकर इस फुटेज को हासिल किया है। इस सेंट्रल कमांड के तहत ही अफगानिस्तान में मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था। इस फुटेज के सामने आने के बाद फिर से बहस शुरू हो गई है कि ड्रोन स्ट्राइक के नियम ऐसे बनाने चाहिए जिससे नागरिकों की जान खतरे में न आए।

ड्रोन में जो इमेज कैप्चर हुई वह धुंधली थी, ऐसे में उस पर भरोसा करके मिसाइल दागने के फैसले की लंबे समय तक जांच की जाएगी। इन सवालों के जवाब ढूंढने जरूरी हैं कि ऐसा क्या हुआ जो ऐसे भरी आबादी वाले इलाके में मिसाइल फायर करनी पड़ी।

सेना को मिली जानकारी गलत निकली इस घटना का एक पहलू यह भी है कि ड्रोन स्ट्राइक से तीन दिन पहले काबुल एयरपोर्ट पर आत्मघाती हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 182 लोगों की जान गई थी। ऐसे में अमेरिकी सेना पर जबरदस्त प्रेशर था कि वह ऐसे हमले न होने दे। सेना को जानकारी मिली थी कि ISIS-K का एक आतंकी काबुल एयरपोर्ट के पास बम ब्लास्ट करने वाला था। सेना इस आतंकी को ट्रैक कर रही थी। इसी आतंकी के धोखे में सेना ने नागरिकों पर मिसाइल दाग दी।

NYT की तरफ से स्कैन किए गए सिक्योरिटी कैमरा फुटेज में यह सामने आया था है कि इसकी बड़ी संभावना है कि अमेरिका ने अहमादी और उनके सहयोगियों को गाड़ी में पानी की बोतलें रखते और अपने बॉस के लिए लैपटॉप उठाते हुए देखा होगा और इसे आतंकी गतिविधि समझ लिया होगा।

मरने वालों में एक अमेरिकी सेना के लिए काम करता था काबुल के रहने वाले ऐमल अहमादी ने बताया था कि इस हमले में उनके परिवार के 10 लोग मारे गए थे। इनमें 7 बच्चे थे। मृतकों में एक तो अमेरिकी सेना के लिए काम करता था। अहमादी ने बताया कि हमले में मरने वाले उनके भाई एजमराई अहमादी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे जो कैलीफोर्निया स्थित न्यूट्रिशन एंड एजुकेशन इंटरनेशनल के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने अफगानिस्तान से बाहर निकलने के लिए भी अप्लाई किया हुआ था। ऐमल ने बताया कि हमारा परिवार बेहद साधारण है। आईएस खुरासान से तो दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। मेरा भाई घर के अंदर रॉकेट से मारा गया।

सही साबित हुआ NYT का दावा अमेरिका ने अपने हमले की सफाई देते हुए कहा था कि ड्रोन हमले के ब्लास्ट बाद एक और ब्लास्ट हुआ था, जिससे यह साफ हुआ था कि गाड़ी में विस्फोटक पदार्थ रखे थे। हालांकि इस दावे को भी न्यूयॉर्क टाइम्स ने खारिज कर दिया था। NYT ने कहा है कि दूसरे ब्लास्ट का कोई सुबूत नहीं है। हमले वाली जगह पर पास की दीवार में सिर्फ एक निशान आया था। न किसी दीवार या किसी और दरवाजे के परखच्चे उड़े थे, इससे साफ होता है कि उस दिन कोई दूसरा ब्लास्ट नहीं हुआ था।

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