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पाकिस्तान से सीमा विवाद पर तालिबान ने उठाया बड़ा कदम,समाधान के लिए एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया है

पिछले दिनों अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान द्वारा पाकिस्तानी सेना को बाड़बंदी व सैन्य चौकी निर्माण से रोकने के साथ ही दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी डूरंड रेखा का विवाद फिर उभरकर सामने आया था

पिछले दिनों अफगानिस्तान सीमा पर द्वारा पाकिस्तानी सेना को बाड़बंदी व सैन्य चौकी निर्माण से रोकने के साथ ही दोनों देशों के बीच वर्षों पुरानी डूरंड रेखा का विवाद फिर उभरकर सामने आया था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि तालिबान शासन के दौरान यह मुद्दा सुलझा लिया जाएगा लेकिन बाड़बंदी व सैन्य चौकी निर्माण को तालिबान ने रोक दिया था। इसी बीच तालिबान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार को इस समस्या के समाधान के लिए एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया है।
दरअसल, न्यूज एजेंसी ने टोलो न्यूज की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार प्रधानमंत्री के दूसरे उप-प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्रालयों की संयुक्त समिति के गठन का निर्णय लिया गया। बताया गया है कि संयुक्त समिति का उद्देश्य डूरंड रेखा की समस्याओं को हल करना और भविष्य में संभावित रूप से होने वाली सुरक्षा समस्याओं का समाधान करना है। इनसे जुड़े सभी मुद्दों को आपसी समझ के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद यूसुफ की काबुल यात्रा के बाद आया है। एनएसए यूसुफ के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय यात्रा में इस्लामिक अमीरात के कई अधिकारियों के साथ बातचीत करने के बाद रविवार शाम को इस्लामाबाद लौट आया है। उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यात्रा का उद्देश्य आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के पाकिस्तान के प्रस्तावों पर चर्चा करना था।
इस यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, सीमा शुल्क, रेलवे और विमानन सहित कई क्षेत्रों में अफगानिस्तान क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहायता की पेशकश की। दोनों पक्षों ने तीन प्रमुख संपर्क परियोजनाओं, कासा-1000, तापी और ट्रांस-अफगान रेल परियोजना को शीघ्र पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हालांकि इस मसले पर दोनों देशों के राजनीतिक विशेषज्ञों की राय अलग है। अफगानिस्तान में एक राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि एक ऐसी समिति स्थापित करनी चाहिए थी जो बाड़ हटाने पर काम करती। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे संयुक्त समिति के गठन के माध्यम से हल नहीं किया जाएगा। यह मुद्दा डूरंड रेखा के दोनों किनारों पर अफगानों के फैसले से संबंधित है। गौरतलब है कि डूरंड रेखा, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा का नाम है। इसे 1890 के दशक में एक ब्रिटिश कर्नल के नाम पर रखा गया है। अफगानिस्तान ने हमेशा इसे औपचारिक रूप से स्वीकार करने से इनकार किया है। हाल ही में सीमा विवाद का यह मामला तब सामने आया जब अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत में पाकिस्तानी सेना द्वारा कराई जा रही बाड़बंदी व सैन्य चौकी निर्माण को तालिबान ने रोक दिया था। सीमावर्ती जिले में रहने वाले प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान सीमा में 15 किलोमीटर भीतर घुस आई थी और निर्माण करवा रही थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत स्थित चाहर बुर्जक जिले में सैन्य चौकी के निर्माण का प्रयास कर रही थी। इस मामले में कुछ दिन पहले तालिबान के कमांडर मावल्लवी सनाउल्लाह सानगिन ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि हम कभी भी और किसी भी तरह से यह नहीं बनाने देंगे। पाकिस्तान ने पहले जो भी किया था, वह कर लिया। लेकिन अब हम उन्हें ऐसा कुछ भी करने नहीं देंगे। अब यहां कोई भी फेंसिंग नहीं हो पाएगी। हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पिछले दिनों कहा था कि अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद शांतिपूर्ण तरीके से और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए किया जाएगा।  

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