Kanpur News: सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, गाजियाबाद की दो टीमों ने ओईएफ हजरतपुर के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक और वर्तमान में कानपुर में तैनात अमित सिंह के आवास और कार्यालय में टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। शाहजहांपुर में भी एक टीम ने कार्रवाई की। सीबीआई रेड। डेमो पिक। – फोटो : अमर उजाला।
विस्तार कानपुर में आयुध उपष्कर निर्माणी हजरतपुर में करोड़ों के टेंडर घोटाले का खुलासा होने के बाद बृहस्पतिवार को सीबीआई की दो टीमों ने शहर में छापा मारा। टीमों ने मुख्य महाप्रबंधक के आवास और कार्यालय में दस्तावेज खंगाले।
सीबीआई ने शाहजहांपुर में भी कार्रवाई की। इस मामले ने निर्माणी की पूरी खरीद प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माणी के कई अफसर जांच की जद में आ गए हैं। पूरे मामले का रक्षा मंत्रालय ने भी संज्ञान लिया है।
CBI ने दर्ज की FIR, तत्कालीन CGM समेत 10 नामजद
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, गाजियाबाद ने इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इस मामले में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता सहित कई रसूखदार ठेकेदारों और निजी कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। दर्ज मुकदमों में कुल 10 लोगों को नामजद किया गया है।
दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा और पत्नियों के खाते में नकदी
सीबीआई की अब तक की जांच में जो सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, उन्होंने रक्षा मंत्रालय के अफसरों के भी होश उड़ा दिए हैं। जांच में सामने आया है कि साल 2022 से 2025 के बीच ओईएफ हजरतपुर में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी टेंडर बांटे गए।
हैरानी की बात यह है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म करने के लिए निर्माणी के भीतर लगे सरकारी कंप्यूटरों का ही इस्तेमाल किया गया और चहेती कंपनियों को टेंडर दिलाए गए। इसके एवज में आरोपी अफसरों को विलासिता का सामान और लाखों रुपये की रिश्वत दी गई। दलालों और ठेकेदारों ने अफसरों के लिए दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के हवाई टिकट बुक कराए और उनकी पत्नियों के बैंक खातों में मोटी रकम ट्रांसफर की।
आरोपी अफसर अमित सिंह का विवादों से पुराना नाता
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि आरोपी अमित सिंह पर आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले से ही चल रहा है। इस टेंडर घोटाले का प्रारंभिक खुलासा पिछले साल हुआ था, जिसके बाद उनका तबादला हजरतपुर से शाहजहांपुर स्थित आयुध निर्माणी किया गया था। बाद में जनवरी 2026 में उन्हें कानपुर के अरमापुर स्थित ट्रुप कंफर्ट्स लिमिटेड, ट्रेनिंग एकेडमी में भेज दिया गया, जहां वर्तमान में वे तैनात हैं और सीबीआई की रडार पर हैं।
रक्षा मंत्रालय ने लिया संज्ञान, बैठ सकती है अलग से जांच
इस घोटाले ने आयुध उपष्कर निर्माणी की पूरी खरीद प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में रक्षा मंत्रालय इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच कमेटी का गठन कर सकता है।
निर्माणी के भीतर चल रही आपसी खींचतान भी अब खुलकर सामने आ गई है, जहां कई वरिष्ठ अधिकारी खुद को बचाने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जब्त दस्तावेजों की स्क्रूटनी आगे बढ़ेगी, इसमें रक्षा विभाग के कुछ और बड़े नामों का सामने आना तय है।

