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#Ramadan – रमज़ान में इन ज़रूरी बातों का भी रखें ध्यान

रमज़ानों में सिर्फ रोज़ा रखना ही काफी नहीं

#Ramzaan – रमज़ान का महीना चल रहा है इस महीने का सभी मुसलमान बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। क्योंकि मुसलमानों के लिए रमज़ान का महीना बहुत ही पाक यानि पवित्र माना जाता है। इसलिए मुस्लिम लोग रमज़ान के पूरे महीने रोज़ा रखते हैं, ज़कात देते हैं, पांचों वक्त की नमाज़ अदा करते और अल्लाह की इबादत करते हैं। क्योंकि रमज़ान के महीने में अल्लाह की इबादत करने का 70 गुना सवाब मिलता है। मुस्लिम ग्रंथों के अनुसार यह भी कहा जाता है कि रमज़ान के महीने में अगर सच्चे और पाक दिल से दुआ मांगी जाती है, तो अल्लाह तमाम दुआएं कुबूल करता है। इतना ही नहीं, रमज़ान के महीने में लगभग सभी मुसलामानों के घर इफ्तार के समय स्वादिष्ट और लज़ीज़ पकवान बनाए जाते हैं और रोज़दार को परोसे जाते हैं। वैसे तो नमाज़ सभी मुसलमान पर फर्ज है लेकिन रमज़ान में नमाज़ और कुरान पढ़ना बहुत अच्छा माना जाता है। क्योंकि रमज़ान में अल्लाह की इबादत करने का 70 गुना सवाब मिलता है। इसलिए आप सभी कसरत से रोजा, नमाज़ और कुरान पढ़ें और अल्लाह की इबादत करें। लेकिन यह बहुत काम लोगों के मालूम होगा कि रमज़ान में क्या करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हो सकता है कि आपकी इबादत खराब या फिर बेकार हो जाए। इसलिए रमज़ानों में सिर्फ रोज़ा रखना ही काफी नहीं है बल्कि कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है लेकिन क्या, आइए जानते हैं।

रोज़ा रखें और इबादत करें रमज़ानों का सबसे पहला काम है कि आप रोज़ा रखें और कुछ भी खाने-पीने से परहेज करें। रोज़ा रखने के लिए आपको सुबह यानि सूरज निकलने से पहले और शाम को सूरज डूबने तक कुछ नहीं खाना है। हालांकि, आप इफ्तार के बाद पूरी रात कुछ भी खा सकते हैं।

स्नान कर सकते हैं कई लोगों का यह मानना है कि रोज़ा रखने के बाद नहाना नहीं चाहिए जबकि यह गलत है क्योंकि आप रोज़ा रखने के बाद आसानी से नहा सकते हैं। लेकिन नहाते समय आप इस बात का ध्यान रखें कि पानी आपके मुंह के अंदर नहीं जाए क्योंकि अगर आप पानी अंदर की और निगल लेते हैं, तो आपका रोज़ा टूट जाएगा।

जरूरतमंद को ज़कात दें इस महीने में सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप जरूरतमंदों को ज़कात दें। बता दें कि ज़कात का मतलब होता है कि अपनी आमदनी में से कुछ हिस्सा किसी गरीब, अनाथ या फिर उन लोगों को देना जो परेशान हैं या जिनके पास अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए संसाधन नहीं है। इसके अलावा, अगर आपके पास दान करने के लिए कुछ नहीं है, तो आप किसी रोज़ेदार को इफ्तार भी करवा सकते हैं।

क्या न करें रोज़ा रखने के बाद दवा नहीं खानी चाहिए जैसा कि आप सभी को पता है कि रोज़ा रखने के बाद कुछ भी खाना जैसे पानी पीना, चाय पीना या फिर खाना खाना आदि मना है। लेकिन क्या आपको पता है कि रोज़ा रखने के बाद दवा खाना भी मना है। लेकिन अगर आपको कोई बीमारी है तो आप रोज़ा न रखें क्योंकि ऐसी हालत में आप रोज़ा नहीं रख सकते हैं।

म्यूजिक और फिल्मों को न देखें रमज़ान में आप म्यूजिक सुनने, टीवी देखने या फिर कोई फिल्म देखने से बचें। क्योंकि रमज़ान के महीने में सिर्फ सिर्फ अल्लाह की इबादत करने का हुक्म है इसलिए आप किसी भी तरह की फिल्म देखने से बचें और अपना ज्यादातर समय अल्लाह को याद करने में गुजारें।

टूथब्रश नहीं करना चाहिए सुबह उठकर टूथब्रश करने की आदत लगभग सभी को होती है लेकिन क्या आपको पता है कि आप रोज़ा रखने के बाद टूथब्रश नहीं कर सकते? जी हां, लेकिन आप रोज़ा रखने से पहले और रोज़ा खोलने के बाद में टूथपेस्ट कर सकते हैं। लेकिन रोज़ा रखने के बाद आप टूथब्रश नहीं कर सकते हैं।

इस्लाम धर्म में क्या है रमज़ान का महत्व? रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक मुबारक महीना है, जो इस्लाम की पांच बुनियादों यानि स्तंभों में से एक है जैसे- पहला कलमा, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज आदि। साथ ही, इस्लामिक ग्रंथों के अनुसार इस महीने में मुसलमानों की प्रमुख किताब यानि कुरान भी पैगंबर मोहम्मद पर नाज़िल हुआ था। इसलिए इस महीने में कुरान पढ़ना फर्ज़ है यानि कुरान पढ़ना अच्छा माना जाता है और कई देशों में रमज़ान के महीने को “कुरान का महीना” भी कहा जाता है।

कौन-कौन रख सकता है रोज़ा? रमज़ान के महीने में सभी मुसलमानों पर रोज़ा रखना फर्ज़ है लेकिन मुस्लिम ग्रंथों के अनुसार लोग 7 से 8 साल की उम्र के बाद रोज़ा रखना शुरू करते हैं। रोज़ा रखने के लिए सभी लोग सहरी (फजर की अज़ान से पहले) से लेकर शाम यानि इफ्तार तक भूखे रहते हैं और न कुछ खाते हैं न पानी पीते हैं।

हालांकि, कई लोगों को रोज़ा न रखने की छूट भी दी गई है जैसे- गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, बच्चे और शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति आदि शामिल हैं। साथ ही, मासिक-धर्म के दौरान भी महिलाएं रोज़ा नहीं रखती हैं।

रमज़ान के महीने से जुड़े रोचक तथ्य- क्या आपको पता है कि पैंगम्बर के मुताबिक रमजान के महीने का पहला अशरा (दस दिन) रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत का माना जाता है और तीसरा अशरा दोज़ख से आजादी दिलाता है। इस महीने में लोग शराब पीना, सिगरेट पीना, तंबाकू या किसी भी नशीली चीज से दूर रहते हैं। रमज़ान के महीने में तमाम मुस्लिम लोग ज़कात देते हैं। बता दें कि ज़कात का मतलब अल्लाह की राह में अपनी आमदनी से कुछ हिस्सा गरीबों में देना होता है। रमज़ान के महीने में लोग हर तरह के बुरे काम को करने से बचते हैं और अल्लाह की दिल से इबादत करते हैं। रमज़ान के महीने का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस महीने में शब्बे-कदर की कई रातें आती हैं, जिसमें पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत की जाती है। माना जाता है कि रमज़ान के महीने में जन्नत के तमाम दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जो रोजे रखता हैं उन्हे ही जन्नत नसीब होती है। मुस्लिम लोग अपना रोज़ा खजूर से ब्रेक करते हैं और खजूर खाने से पहले इफ्तार की दुआ मांगते हैं। रमज़ान के महीने के अंत में क्या होता है? रमज़ान के महीने के आखिर में ‘ईद-उल-फितर’ यानि मीठी ईद मनाई जाती है, जो पूरे 30 दिन रोज़े रखने के बाद आती है। इसलिए यह मुसलमानों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है। बता दें कि ईद के दिन लोग ईद की नमाज़ पढ़कर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और आपस में प्यार बांटते हैं। साथ ही, इस दिन नए-नए पकवान बनाए जाते हैं जैसे- शीर, खीर, हलीम, दही-भल्ले आदि और सभी को ईदी भी बांटी जाती है।

ये भी है जरूरी 1. मुस्लिमों के लिए रोजाना 5 वक्त की नमाज करना अनिवार्य किया गया है. ऐसे में रमजान के महीनें में इस नियम का कठोरता से पालन करें. 2. रजमान के पवित्र महीने में खासतौर पर गरीबों और कमजोर लोगों की मदद करना चाहिए. हालांकि लोगों की मदद करने का सिलसिला साल भर जारी रहना चाहिए। 3. मुस्लिमों को कुरान की आयतें याद होना चाहिए और इस बात का भी इल्म होना चाहिए कि वे जो पढ़ते हैं उसके क्या मायने हैं। 4. रमजान के दौरान मुस्लिमों को धिक्र (Dhikr) यानि अल्लाह की इबादत और उनका हमेशा शुक्रिया अदा करना चाहिए। 5. इबादत के दौरान रोजेदारों को अपने परिवार की खुशहाली भी मांगना चाहिए। 6. रमजान में जो भी मुस्लिम रोजा रखते हैं उन्हें सूरज डूबने के बाद होने वाली मगरिब अज़ान के पहले कुछ भी खाने या पीने की सख्त मनाही होती है. 7. रोजे के दौरान सिगरेट पीना या जबरन उल्टी करना मना होता है. ऐसे में रोजा टूट सकता है. 8. रमजान में संगीत सुनने की भी मनाही होती है, खासतौर पर उस वक्त अगर आप ने रोजा रखा हुआ है. 9. किसी के प्रति बदले की भावना या कड़वाहट से रोजे रखने के मायने नहीं रह जाते हैं. रोजे के वक्त हमेशा अच्छी चीजों पर ही ध्यान लगाकर रखना चाहिए. 10. रोजा रखने वाले लोगों को किसी भी तरह की गलत सोच या गलत गतिविधियों में शामिल नहीं रहना चाहिए. 11. रजमान के पाक महीने में किसी से लड़ाई नहीं करनी चाहिए.

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