लाइफस्टाइल

जानें कब हो जाता है बच्चों का बिहेवियर नेगेटिव

बच्चे आपके साथ क्यों करने लगते हैं बदतमीजी? जानें कब हो जाता है उनका बिहेवियर नेगेटिव

टीनएज में ज्यादातर बच्चों का बिहेवियर लगभग एक जैसा ही होता है। ऐसे में पेरेंट के लिए उनकी उम्र को देखते हुए उनसे डील करना इतना भी मुश्किल नहीं होता क्योंकि वे भी इस उम्र से गुजर चुके होते हैं लेकिन प्रॉब्लम तब होती है जब 8-9 साल की उम्र के बच्चे भी मिसबिहेव करना शुरू कर देते हैं।शुरुआत होती है उनके बात न मानने से, इसके बाद धीरे-धीरे उनका व्यवहार इतना ज्यादा अग्रेसिव हो जाता है कि पेरेंट के लिए उन्हें डील करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि बच्चों के इस बिहेव के पीछे क्या कारण हैं, इस बात को समझा जाए। आमतौर पर कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिनकी वजह से बच्चे का व्यवहार अचानक ही बदल जाता है।

कोई बात परेशान कर रही है आप अगर कई दिनों से बच्चे का बदला हुआ व्यवहार नोटिस कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले अपने बच्चे से बात करनी चाहिए। हो सकता है कि उसे कोई बात परेशान कर रही हो, जिसकी वजह से उसे गुस्सा आ रहा हो या फिर वह अंदर से डरा हुआ हो।

कोई बुली कर रहा है  आमतौर पर बच्चे को जब कोई बुली करता है या परेशान करता है, तो बच्चे के मन में डर और गुस्सा भर जाता है। खासतौर पर जब वह खुद को अकेला और कमजोर महसूस करता हो। ऐसे में जब वह सामना नहीं कर पाता, तो घर पर मिसबिहेव करके अपना गुस्सा निकालता है। 

खुद को कमतर समझना  कभी भी बच्चे को दूसरे बच्चों से कम्पेयर करके यह फील न कराएं कि वह किसी से कम है। बच्चे मजाक में कही हुई बातों को भी दिल पर लगा लेते हैं और फिर उनका कॉन्फिडेंस कम हो जाता है। जब बच्चा खुद को कम समझने लगता है, तो वह खुद को प्रूव करने के लिए गुस्से का सहारा लेता है।

आपसे है नाराजगी  ऐसा भी हो सकता है कि आपका बच्चा आपसे किसी बात को लेकर नाराज है। ऐसे में वह खुलकर आपसे कुछ नहीं कह पा रहा है और अपनी नाराजगी आपसे बदतमीजी करके निकाल रहा है। ऐसे में आपको बच्चे से खुलकर बात करने की जरूरत है।

बीमारी या हेल्थ इश्यू  जब बच्चों की हेल्थ ठीक नहीं होती, तो भी कमजोरी की वजह से बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। ऐसे में कमजोरी के चलते बच्चों को हर बात बुरी लगती है और गुस्सा आने लगता है, जिसकी वजह से बच्चे अक्सर मिसबिहेव कर जाते हैं।

वॉयलेंट रोल मॉडल  बच्चों में काफी एनर्जी होती है इसलिए उन्हें एक्शन और अग्रेसिव लोग काफी अट्रैक्ट करते हैं। उस उम्र में अक्सर बच्चे वीडियो गेम या फिर एक्शन मूवी देखते हैं, जिसे देखकर बच्चों पर नेगेटिव असर पड़ता है। बच्चे सोचने लगते हैं कि चीखकर या चिल्लाकर अपनी बात मनवाई जा सकती है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button