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कच्ची झोपड़पट्टी देती है हादसे को न्योता, कच्ची झोपड़ी में रहने को मजबूर है लोग

बहुत से लोग इन मकानों से वंचित रह जाते हैं

उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा गरीबों को पक्के मकान दिए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी बहुत से लोग इन मकानों से वंचित रह जाते हैं । जो कि अपने परिवार का गुजर-बसर करने को कच्ची झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर होते हैं । पिछले दिनों हुई पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बरसात की वजह से पक्के मकानों की दीवारों में दरार आ चुकी है। तो कच्ची झोपड़पट्टी कैसे रुक जाती । कच्ची झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगो के पास कोई और जगह ना होने पर रहने को मजबूर है ।

दरअसल मामला खैर तहसील के क्षेत्र नौझील बाजना रोड स्थित गोमत गांव का है। जहां एक परिवार अपने छोटे-छोटे आधा दर्जन बच्चों के साथ कच्ची मिट्टी की बनी झोपड़ी में रहता है। जो कि मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है । पिछले दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मूसलाधार बरसात की वजह से पक्के मकानों की दीवारों में दरार देखी गई तो कच्ची झोपड़ी इस बरसात में कैसे रुक पाती बताया जाता है कि फरीद खान जिस झोपड़ी में रहते हैं उस झोपड़ी की दीवारें मिट्टी की बनी हुई है जो कि पिछले दिनों आई बरसात की वजह से ढहने की कगार पर हैं। फरीद खान के द्वारा बताया गया कि वह कई बार गांव प्रधान से पक्का मकान बनाने की बात कह चुका है। लेकिन गांव प्रधान के द्वारा उसकी एक न सुनी गई फरीद खान आखिर अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाए । फरीद खान शासन से फरियाद लगाई है कि जल्द से जल्द उसकी झोपड़ी की जगह पक्का मकान बनवा कर दे दिया जाए । जिससे वह अपने परिवार के साथ भयमुक्त तरीके से रह सके।

बाइट:– फरीद खान निवासी गोमत खैर अलीगढ़

बाइट:– शबनम बेगम निवासी गोमत खैर अलीगढ़

रिपोर्टर लक्ष्मन सिंह राघव

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