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रॉक एन रोल के बादशाह बप्पी लहरी का हुआ निधन

अस्‍सी और नब्‍बे के दशक में बप्‍पी लहिरी ने जो गाने बनाए, वो बाद की हिंदी फिल्‍मों में भी खूब इस्‍तेमाल हुए

बप्‍पी लाहिड़ी जिनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है का जन्‍म 27 नवंबर 1952 को जलपैगुड़ी पश्चिम बंगाल में हुआ था. बप्‍पी लाहिड़ी ने मात्र तीन वर्ष की आयु में ही तबला बजाना शुरू कर दिया था
जिस दौर में लोग रोमांटिक संगीत सुनना पसंद करते थे उस वक्त बप्पी ने बॉलीवुड में ‘डिस्को डांस’ को इंट्रोड्यूस करवाया. उन्हें अपना पहला अवसर एक बंगाली फ़िल्म, दादू (1972) और पहली हिंदी फ़िल्म नन्हा शिकारी (1973) में मिला जिसके लिए उन्होंने संगीत दिया था,
बप्‍पी दा नहीं रहे। 69 साल की उम्र में बप्‍पी लहिरी का मुंबई के एक अस्‍पताल में निधन हो गया। बप्‍पी लहिरी की उसकी लोकप्रियता देखनी हो उनके गानों के यूट्यूब व्‍यूज पर मत जाइए। अस्‍सी और नब्‍बे के दशक वाले भारत में बड़े हुए किसी भी शख्‍स से पूछिए कि उसके पसंदीदा डांस सॉन्‍ग्‍स कौन से हैं। यकीनन, बप्‍पी दो के गाने उसकी लिस्‍ट में जरूर होंगे। उस वक्‍त भारत और आसपास के देशों में डिस्‍को और पॉप म्‍यूजिक से झुमाने वाले दो ही नाम थे- बिद्दू और बप्‍पी दा। डिस्‍को डांसर, शराबी, नमक हलाल, चलते चलते… बप्‍पी दा के सुनहरे करियर की मशहूर फिल्‍में हैं। सिंथेसाइज्‍ड म्‍यूजिक से बॉलिवुड में छा जाने वाले बप्‍पी दा की पहचान ताउम्र भले ही ‘डिस्‍को किंग’ ही रही हो, मगर उन्‍होंने कुछ बेहद खूबसूरत गाने भी बनाए हैं। हिंदुस्‍तानी रागों पर आधारित इन गानों में चाशनी की तरह मेलोडी घुली हुई है। बप्‍पी दा के कई गाने टाइमलेस क्‍लासिक्‍स हैं। मेलोडी से भरे हुए हैं बप्‍पी दा के ये गाने बप्‍पी दा सिर्फ डिस्‍को और पॉप ही नहीं, हिंदुस्‍तानी और क्‍लासिकल पर भी बराबर अधिकार रखते थे। ‘बाजार बंद करो’ फिल्‍म में मुकेश से गवाया ‘मोहे कर दे बिदा…’ सुनिए। विदाई के इस गीत में बप्‍पी दा ने शहनाई से जो दर्दभरा भाव जगाया है, वह कलेजा चीर जाता है। 1974 में आई ‘एक लड़की बदनाम सी’ के ‘रहें ना रहें चाहें…’ में गजब का ऑर्कस्‍ट्रेशन है। 70 के दशक में बॉलिवुड पर आरडी बर्मन का जादू छाया हुआ था। उसी दरम्‍यान, 1975 में आई एक फिल्‍म ने पूरी इंडस्‍ट्री को मजबूर कर दिया कि वह बप्‍पी लाहिरी का टैलेंट पहचाने। वो फिल्‍म थी ‘जख्‍मी’। चाहे किशोर की आवाज में ‘जलता है जिया मेरा भीगी-भीगी रातों में…’ हो या लता मंगेशकर के गले से निकला ‘अभी अभी थी दुश्‍मनी…’ इस फिल्‍म के गानों में वेस्‍टर्न मेलोडी समाई हुई थी। ‘जख्‍मी’ में ही लता मंगेशकर और पूर्णिमा ने ‘आओ तुम्‍हें चांद पे…’ गाया जिसमें बप्‍पी दा ने अपनी वर्सटैलिटी दिखाई है। एक और फिल्‍म जिसमें बप्‍पी दा ने क्‍लासिकल म्‍यूजिक दिया, वह थी 1976 में आई चलते चलते। फिल्‍म का टाइटल गीत आज तक सुना जाता है। लता मंगेशकर की आवाज में ‘दूर दूर तुम रहे…’ में बप्‍पी दा पियानो पर अपनी बाजीगरी दिखाते हैं। ‘लहू के दो रंग’ का ‘जिद ना करो…’ भी ऐसा ही गाना है। ऐतबार’ का ‘किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है…’ हो या ‘टूटे ख‍िलौने’ का ‘माना हो तुम बेहद हसीन..’ या ‘दिल से मिले दिल’ का ‘ये नैना ये काजल ये जुल्‍फें…’ बप्‍पी दा अपने गीतों से हिंदी सिनेमा के टॉप-10 म्‍यूजिक डायरेक्‍टर्स में जरूर शुमार होंगे। 11 साल की उम्र में कम्‍पोज की पहली धुन बप्‍पी दा का जन्‍म 1952 में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में हुआ। उन्‍हें बचपन में ‘बापी’ नाम से बुलाते थे जिन्‍हें उन्‍होंने बाद में प्रोड्यूसर शोमू मुखर्जी के कहने पर ‘बप्‍पी’ कर दिया। इस तरह अलोकेश लाहिरी, बप्‍पी लाहिरी बने। बप्‍पी के माता-पिता का बंगाली सिनेमा में नाम था। लता मंगेशकर भांप गईं कि इस बच्‍चे में संगीत के प्रति गहरा लगाव है। उन्‍हीं के कहने पर बप्‍पी ने 5 साल की उम्र में तबला सीखना शुरू क‍िया। 11 साल की उम्र थी जब बप्‍पी लाहिरी ने अपनी पहली धुन बनाई। 20 की उम्र में बप्‍पी ने बंगाली फिल्‍म ‘दादू’ से बतौर म्‍यूजिक डायरेक्‍टर डेब्‍यू किया, मगर वह कलकत्‍ता (कोलकाता) तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। जब बड़े पर्दे पर आए बप्‍पी दा भारत पर छाने के लिए हिंदी सिनेमा में एंट्री जरूरी थी। बप्‍पी के सपने को पूरा करने के लिए उनके मां-बाप ने अपना कर‍ियर त्‍याग दिया। परिवार बॉम्‍बे (मुंबई) शिफ्ट हो गया। 1973 में मुखर्जी की फिल्‍म ‘नन्‍हा शिकारी’ से बप्‍पी दा ने हिंदी में डेब्‍यू किया। इस फिल्‍म के दो गाने साबित करते हैं कि बप्‍पी में कुछ तो बात थी। पहला मुकेश और सुषमा का गाया ‘तू ही मेरा चंदा, तू ही तारा’ और दूसरा आशा भोसले और किशोर कुमार की यॉडलिंग से सजा ‘तू मेरी मंजिल…।’ अगली फिल्‍म के लिए शोमू ने बप्‍पी के सामने एक शर्त रखी, वो ऐक्टिंग करेंगे। बप्‍पी दा हैरान थे मगर उन्‍होंने ऑफर कबूल लिया। ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ फिल्‍म में न सिर्फ बप्‍पी दा ने अभिनय किया, बल्कि गाने भी गाए। हर किसी को झुमा दें बप्‍पी के ये गाने ‘डिस्‍को डांसर’ शायद बप्‍पी दा और मिथुन चक्रवर्ती के करियर की सबसे बड़ी फिल्‍म रही। इस फिल्‍म का हर एक गाना सुपरहिट था। 1982 में आई इस फिल्‍म में हाई टेम्‍पो वाले कई गाने थे जो युवाओं के बीच आज भी लोकप्रिय हैं। इस फिल्‍म की रिलीज के साथ ही बप्‍पी दा ने एक ट्रेंड सेट कर दिया। नमक हलाल के ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची…’ से बप्‍पी दा ने अमिताभ बच्‍चन को नए स्‍टाइल में पेश किया। इसी फिल्‍म का ‘रात बाकी बात बाकी…’ की धुन बेहद आसान है मगर बीट्स झूमने को मजबूर करती हैं। 2013 में आई ‘द डर्टी पिक्‍चर’ में बप्‍पी ने ‘ऊ ला ला…’ गाने से एक बार फिर साबित किया कि कदम थिरकाने वाले गीत बनाने में उनका कोई मुकाबला नहीं। 1973 से 1981 के बीच बप्‍पी दो ने जो धुनें बनाई, वो उन्‍हें शंकर-जयकिशन, एसडी बर्मन, पंचम, लक्ष्‍मीकांत-प्‍यारेलाल और कल्‍याणजी-आनंदजी जैसे दिग्‍गजों की कतार में अलग खड़ा करती हैं।  

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