राजनीति

उत्तराखंड में कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

: आज शाम 4 बजे बीजेपी ने विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग जाएगी. इस बैठक में केंद्र की तरफ से भेजे गए पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे.

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उत्तराखंड (Uttarakhand) में विधान सभा चुनाव जीतकर बीजेपी (BJP) ने इतिहास रच दिया है. लेकिन इस पहाड़ी राज्य का मुख्यमंत्री (CM) किसे बनाया जाएगा ये अभी तक साफ नहीं है. इसकी वजह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) का चुनाव हार जाना है. वो खटीमा विधान सभा सीट से चुनाव हार गए हैं. बहरहाल उत्तराखंड में आज (सोमवार को) बीजेपी विधायक दल की बैठक (Legislature Party Meeting) बुलाई गई है. देहरादून में होने वाली इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह केंद्रीय पर्यवेक्षक और विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी सह पर्यवेक्षक के रूप में शिरकत करेंगी. उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला आज हो जाएगा.

मुख्यमंत्री बनने की रेस में कौन-कौन है?

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कार्यवाहक सीएम पुष्कर सिंह धामी सबसे आगे हैं. रविवार को यूपी, गोवा और उत्तराखंड में सरकार गठन को लेकर पीएम मोदी ने अहम बैठक की. इसमें गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे. उत्तराखंड के भावी सीएम के तौर पर पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के नाम पर विचार किया जा रहा है

आज होगी विधायक दल की बैठक

उत्तराखंड में आज विधायक दल की बैठक होगी जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाई जाएगी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने बताया कि आज विधान सभा में सभी नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण होगा और इसके बाद विधायक दल की बैठक होगी. नवनिर्वाचित विधायकों को प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत आज सुबह 11 बजे शपथ दिलाएंगे.

बैठक में सीएम के नाम पर लगेगी मुहर

उत्तराखंड में बीजेपी के मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि बीजेपी ने विधायक दल की बैठक पार्टी कार्यालय पर आज शाम 4 बजे बुलाई है. इस बैठक में मुख्यमंत्री को चुना जाएगा.

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 14 फरवरी को हुए विधान सभा चुनाव में बीजेपी 70 में से 47 सीटों पर जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार सत्तासीन होने जा रही है. ‘उत्तराखंड फिर मांगे, मोदी-धामी की सरकार’ के नारे के साथ विधान सभा चुनाव लड़ने वाली बीजेपी को धामी के अपनी परंपरागत सीट खटीमा से हारने के बाद नेतृत्व को लेकर नए सिरे से निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा है.

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