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वैक्सीन से भागे, देश से भगाया:ऑस्ट्रेलिया से निराश लौटे जोकोविच, वहां के 2 स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट से जानिए यह पॉलिसी है या पॉलिटिक्स?

दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच को ऑस्ट्रेलिया के हिरासत केंद्र में दो सप्ताह रखने के बाद रविवार को मेलबर्न की पहली फ्लाइट से दुबई के लिए रवाना कर दिया

दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच को ऑस्ट्रेलिया के हिरासत केंद्र में दो सप्ताह रखने के बाद रविवार को मेलबर्न की पहली फ्लाइट से दुबई के लिए रवाना कर दिया गया। वे दसवां ऑस्ट्रेलियाई ओपन खिताब जीतने का ख्वाब लेकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। अगर वे यह खिताब जीत जाते तो रोजर फेडरर और रफेल नडाल के 20 ग्रैंड स्लैम जीतने के खिताब से आगे निकल जाते, लेकिन उनका ये दौरा विवादों में घिरा रहा।

जोकोविच के वैक्सीन विवाद को समझने के लिए दैनिक भास्कर ने ऑस्ट्रेलिया के दो खेल पत्रकारों से बात की। वहां के चर्चित खेल पत्रकार क्रिस्टी डोरान मानते हैं कि जोकोविच के खिलाफ कड़ा फैसला लेकर ऑस्ट्रेलिया की सरकार खुद को मजबूत दिखाना चाहती है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के पत्रकार जितार्थ भारद्वाज का कहना है कि यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। इसीलिए जोकोविच पर सख्ती की गई है।

ऑस्ट्रेलिया में जोकोविच को लेकर विवाद क्यों शुरू हुआ? सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच वैक्सीन विरोधी हैं। वे बिना कोविड वैक्सीन लगवाए ही ऑस्ट्रेलिया में दाखिल हुए थे। यह ऑस्ट्रेलिया के कोविड और प्रवासन नियमों का उल्लंघन है। वहां की सरकार ने उन्हें आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानते हुए उनका वीजा रद्द कर दिया। इसके बाद ही पूरा विवाद शुरू हुआ।

ऑस्ट्रेलिया के टेनिस फेडरेशन ने दी थी खेलने की अनुमति ऑस्ट्रेलिया के टेनिस फेडरेशन और प्रांतीय सरकार ने विक्टोरिया प्रांत में टूर्नामेंट में हिस्सा लेने जा रहे जोकोविच को खेलने की अनुमति दी थी। बाद में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उनका वीजा रद्द कर दिया। उन्हें संघीय सरकार के अवैध प्रवासी हिरासत केंद्र में रखा गया। ये जगह किसी जेल जैसी है।

जोकोविच ने सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। अदालत ने कहा कि संघीय सरकार के पास वीजा रद्द करने का अधिकार है। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती है, लिहाजा जोकोविच निराश लौट गए हैं, लेकिन जो विवाद खड़ा हुआ है वो अभी थमा नहीं है।

आज से शुरू हो रहा ऑस्ट्रेलियाई ओपन, जोकोविच नहीं खेलेंगे ऑस्ट्रेलियाई ओपन आज, यानी 17 जनवरी से शुरू हो रहा है और टेनिस का सबसे बड़ा खिलाड़ी वापस लौट चुका है। ऑस्ट्रेलिया से वापसी जोकोविच के करियर के लिए एक बड़ा झटका है। ऑस्ट्रेलिया के सख्त वीजा नियमों के तहत अब उन्हें अगले तीन साल तक वीजा नहीं मिलेगा। हालांकि, सरकार चाहे तो उन्हें राहत दे सकती है।

सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है। ऑस्ट्रेलिया इस तर्क पर उनका वीजा रद्द किया है कि देश में उनकी मौजूदगी वैक्सीन के खिलाफ भावनाएं भड़का सकती है। जोकोविच के वीजा विवाद में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत की सरकार, प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की संघीय सरकार, अदालत, टेनिस फेडरेशन और स्वयं जोकोविच घिरे हैं।

सोमवार को शुरू हो रहा ऑस्ट्रेलियाई ओपन। वैक्सीन विवाद के बाद दुनिया भर में इसकी चर्चा हो रही है।

ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार बोले- लग रहा है कि यहां राजनीति हो रही है ऑस्ट्रेलिया के चर्चित खेल पत्रकार क्रिस्टी डोरान कहते हैं, “ऐसा लग रहा है कि यहां राजनीति हो रही है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार अपने आप को मजबूत दिखाने का मौका देख रही है। सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर कमजोर नहीं दिखना चाहती है। ये गठबंधन सरकार सीमा संप्रभुता और प्रवासन से जुड़े मुद्दे पर अपनी सख्त नीति के लिए जानी जाती रही है। प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने वालों के विरोध का चेहरा रहे हैं। मॉरिसन की सरकार में ऑस्ट्रेलिया की सीमाएं बाहरी लोगों के लिए बंद हैं।”

ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में किसी रेस्त्रां या बार जैसे सार्वजनिक स्थान पर बिना वैक्सीन पासपोर्ट दिखाए जाने पर पाबंदी है।

डोरान कहते हैं, “टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच के डिपोर्टेशन (ऑस्ट्रेलिया से वापस भेजे जाने का) विवाद ऐसे समय हो रहा है जब ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में बहुत कुछ हो रहा है। मॉरिसन दूसरे कार्यकाल का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पोल में वो पिछड़ रहे हैं। वो कई विवादों में फंसे हैं। ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जो उनके पक्ष में नहीं रही हैं। अब मॉरिसन और उनके मंत्री नोवाक जोकोविच के मामले के बहाने देश की जनता को ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार के लिए लोगों का स्वास्थ्य सबसे पहले है।”

वैक्सीन पासपोर्ट दिखाना जरूरी विक्टोरिया प्रांत में 12 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकतर लोगों को वैक्सीन लग चकी है। यहां किसी रेस्त्रां या बार जैसे सार्वजनिक स्थान पर बिना वैक्सीन पासपोर्ट दिखाए नहीं जाया जा सकता है। डोरान कहते हैं, “ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के पास वैक्सीन पासपोर्ट नहीं है तो वो सार्वजनिक स्थलों पर जा ही नहीं पाएगा। उसकी गतिविधियां भी बहुत हद तक सीमित रहेंगी। मैं मानता हूं कि जोकोविच लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहत बड़ा खतरा नहीं थे।”

विक्टोरिया में 90% आबादी को वैक्सीन लग चुकी​ है​​​​​​ विक्टोरिया प्रांत में कोविड को लेकर कई प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन अधिकतर प्रदर्शन उस समय हुए थे जब वैक्सीन नहीं लगी थी। विक्टोरिया और मेलबर्न में लॉकडाउन के दौरान भी कुछ प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन हाल के दिनों में ऐसे प्रदर्शन नहीं हुए हैं क्योंकि विक्टोरिया और ऑस्ट्रेलिया में लोग वैक्सीन लगवा रहे हैं और अब तक 90 फीसदी आबादी को वैक्सीन लग चुकी है।

 

डोरान कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि जोकोविच ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों या समाज के लिए कोई बड़ा खतरा थे। आम लोगों की प्रतिक्रिया भी बदल गई है। पहले लोगों को लग रहा था कि जोकोविच गलत हैं, लेकिन अब वो समझ रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार जोकोविच के बहाने राजनीति कर रही है। दोनों तरफ से से जो हो रहा है उसे लेकर लोग हैरान हैं। इस विवाद में किसी की जीत नहीं हो रही है।”

दुनिया के सबसे सख्त कोविड नियम ऑस्ट्रेलिया में पिछले एक सप्ताह से रोजाना एक लाख से अधिक कोविड संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। यहां दुनिया के सबसे सख्त कोविड नियम लागू है और आम लोग कोविड नियमों का सख्ती से पालन करते हैं।

डोरान कहते हैं, “जोकोविच एक शानदार टेनिस खिलाड़ी हैं। वो ग्रैंड स्लेम चैंपियन हैं। एक व्यक्ति के तौर पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया में बहुत पसंद नहीं किया जाता है। दिसंबर में जब उन्हें कोविड था इस दौरान भी वो इंटरव्यू दे रहे थे और लोगों के साथ फोटो खिंचा रहे थे। इसे लेकर लोगों में नाराजगी थी।”

विवाद से ऑस्ट्रेलिया की छवि भी खराब हो रही जोकोविच विवाद ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जुड़ा है। लोगों को लग रहा है कि इस विवाद से ऑस्ट्रेलिया की छवि भी खराब हो रही है। डोरान कहते हैं, “जोकोविच ने ट्विटर पर एक इमोजी पोस्ट की थी जिसने ऑस्ट्रेलिया की खराब छवि पेश की। इससे ऐसा लगा कि जब बॉर्डर कंट्रोल या शरणार्थियों की बात होती है तो ऑस्ट्रेलिया का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है।”

बहुत से लोगों का मानना है कि जोकोविच को लेकर जो विवाद हुआ है वह अनावश्यक है और ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कानून सम्मत कदम उठाए हैं। वहीं मेलबर्न में रहने वाले भारतीय मूल के पत्रकार जितार्थ भारद्वाज का मानना है कि ये टेनिस या राजनीति का विवाद नहीं है, बल्कि ये आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।

विवाद ना ही ये राजनीति से जुड़ा है और ना ही टेनिस से जितार्थ कहते हैं, “टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच विवाद को राजनीति से जोड़ा जा रहा है, लेकिन ना ही ये राजनीति से जुड़ा है और ना ही टेनिस से। ये ऑस्ट्रेलिया के वीजा नियमों और वैक्सीन नियमों से जुड़ा है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार बीते डेढ़ साल में कई बार ये कह चुकी है कि जो व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया का नागरिक या स्थाई निवासी नहीं है वो बिना पूर्ण टीकाकरण के ऑस्ट्रेलिया नहीं आ सकता है।”

जितार्थ कहते हैं, “जोकोविच वैक्सीन के खिलाफ हैं और जिस तरह की वैक्सीन विरोधी भावना का वो प्रदर्शन करते हैं वो यहां की सरकार के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है और खुले आम कहा है कि वो वैक्सीन के खिलाफ हैं। ऑस्ट्रेलिया में इस समय 90 फीसदी से अधिक लोगों को वैक्सीन लग चुकी है।

वैक्सीन विरोधी भावना को रोकना चाहती है सरकार ऑस्ट्रेलिया सरकार नहीं चाहती है कि देश में वैक्सीन विरोधी भावना फैले। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि जोकोविच कोविड संक्रमित होने के बाद भी छोटे बच्चों के साथ खेल रहे थे। इससे जोकोविच की जो छवि बन रही थी उससे ऑस्ट्रेलिया की सरकार बहुत खुश नहीं थी। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उनका वीजा रद्द करने का फैसला लिया और इसे अदालत ने भी अब सही ठहराया है।”

सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए जितार्थ कहते हैं, “एक संप्रभु राष्ट्र ने ये निर्णय लिया है कि वो किसी व्यक्ति को अपनी सीमाओं में दाखिल नहीं होने देना चाहता है और ये विवाद वहीं समाप्त हो जाना चाहिए।”

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