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अब सभी रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन और मालगाड़ियां चलेंगी

रेलवे ट्रैक पर जल्द अब जल्द कार्बन मुक्त ट्रेन दौड़ती नजर आएंगी।

भारतीय रेल को वर्ष 2030 तक कार्बन मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस राह पर दिल्ली मंडल तेजी से काम कर रहा है। शत प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन यानी विद्युतीकरण का काम भी पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही अब सभी रूट पर सिर्फ इलेक्ट्रिक इंजन से रेल और मालगाड़ियों को चलाया जाएगा।

इसके साथ ही ट्रेनों में डीजल के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में काम चल रहा है। हेड ऑन जनरेशन (HOG) तकनीक के प्रयोग पर बल दिया जा रहा है। 56 ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध हो गई है।

डीजल पर होने वाले करोड़ों रुपए की होगी बचत

ट्रेनों के लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) वाली ट्रेनों की कोच को सभी हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) तकनीक में परिवर्तित कर दिया जाएगा। इन ट्रेनों के कोच में AC, पंखे और रोशनी की व्यवस्था के लिए डीजल जनरेटर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इससे प्रति वर्ष डीजल पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की बचत होगी।

क्या है एचओजी तकनीक

ट्रेनों में परंपरागत तरीके से जनरेटर यान लगाया जाता है, इससे कोच में बिजली आपूर्ति होती है और इसी से कोच के सारे काम होते हैं। इसके इतर हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) तकनीक से कोच में बिजली सीधे ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रिक वायर) से मिलेगी। इससे जनरेटर की जरूरत नहीं रहेगी।

पर्यावरण संरक्षण में भी मिलेगी मदद

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में इस काम में और तेजी लाई जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलने के साथ ही डीजल पर होने खर्च से भी राहत मिलेगी। नॉर्दन रेलवे की कई ट्रेनों में इसकी शुरुआत कर दी गई है।

ज्यादा यात्री कर सकेंगे यात्रा

राजधानी और अन्य वातानुकूलित ट्रेनों में दो जनरेटर यान लगाए जाते हैं। अन्य ट्रेनों में एक जनरेटर यान होता है। जब ट्रेनों में जनरेटर की जरूरत नहीं होगी, तो इसके स्थान पर अतिरिक्त यात्री कोच लगाए जा सकते हैं, जिससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा। ज्यादा यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलेगी।

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