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नेता संजय राउत को गुवाहाटी में मिला बागी विधायकों में शामिल होने का ऑफर

संजय राउत ने कहा, "इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक, सांसद होने के नाते मेरा ये कर्तव्य है कि जब देश की कोई भी जांच एजेंसी मुझे बुलाती है तो मैं उनके समक्ष जाकर बयान दूं।

शिवसेना के सीनियर नेता संजय राउत ने शनिवार को खुलासा किया कि उन्हें भी गुवाहाटी जाने का प्रस्ताव मिला था। राउत ने कहा, “मुझे भी गुवाहाटी जाने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन मैं बालासाहेब ठाकरे का अनुसरण करता हूं इसलिए मैं वहां नहीं गया। जब सच्चाई आपके पक्ष में है, तो डर क्यों है?”

मालूम हो कि शिवसेना से बगावत के बाद शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में आठ दिन तक रुके हुए थे। शिवसेना के बागियों के लिए इस होटल के सभी 70 कमरे बुक किए गए थे। वहीं बाहरी लोगों के लिए होटल के रेस्टोरेंट, बैंक्वेट समेत अन्य सुविधाओं पर 22 से 29 जून तक रोक लगा दी गई थी।

संजय राउत ने कहा, “इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक, सांसद होने के नाते मेरा ये कर्तव्य है कि जब देश की कोई भी जांच एजेंसी मुझे बुलाती है तो मैं उनके समक्ष जाकर बयान दूं। मुझे बुलाया गया, लोगों के मन में कुछ शंका है कि ये राजनीतिक दबाव में हुआ है, ऐसी कोई बात नहीं है।”

राउत शुक्रवार को धनशोधन के मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए ईडी के समक्ष पेश हुए और 10 घंटे से अधिक समय बाद बाहर निकले। उन्होंने कहा कि उनके मन में शंका थी, टाइमिंग की थोड़ी समस्या है कि यही टाइमिंग क्यों रखी। 10 घंटे तक मैं उनके साथ रहा, अधिकारी बहुत अच्छे से मेरे साथ पेश आए। मैंने सभी प्रश्नों का उत्तर दिया। मैंने उन्हें कहा कि अगर आपको लगता है कि मुझे वापस आना चाहिए तो मैं फिर आ जाऊंगा।

ईडी ने मुंबई की एक ‘चॉल’ के रिडेवलपमेंट और राउत की पत्नी व दोस्तों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए राज्यसभा सदस्य को तलब किया था। एजेंसी ने राउत को 28 जून को तलब किया था। हालांकि, राउत ने ईडी के समन को उन्हें पार्टी के विधायकों की बगावत के मद्देनजर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से लड़ने से रोकने की साजिश बताया था।

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