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पाकिस्तान में तख्तापलट की आशंका,उन्होंने कहा है कि अगले डेढ़ साल में पाकिस्तान में अहम बदलाव देखने को मिलेंगे।

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विपक्षी पार्टियां इमरान को सत्ता से बेदखल करने की हर संभव कोशिश कर रही हैं।

पाकिस्तान में इमरान खान सरकार की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विपक्षी पार्टियां इमरान को सत्ता से बेदखल करने की हर संभव कोशिश कर रही हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ में भी कई स्तर पर फूट पड़ी हुई है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सेना से भी इमरान खान के संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं। इन सभी मसलों को लेकर पाकिस्तान में भारत के पूर्व हाई कमिश्नर जी पार्थसारथी ने अपनी बात रखी है। कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है पाकिस्तान ट्रिब्यून में पार्थसारथी ने लिखा है कि पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल हामिद गुल ने इमरान खान की एंट्री कराई है और यह सच है कि पाकिस्तान सेना के समर्थन से ही इमरान खान की सरकार चल रही है। उन्होंने तुर्की और मलेशिया जैसे देशों से बेहतर संबंध बनाने के लिए भारत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से संबंध खराब कर लिए हैं। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान सरकार कर्ज के जाल में लगातार फंसती जा रही है। चीन पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर के नाम पर पाकिस्तान लापरवाही से कर्ज उठाए जा रहा है। इमरान खान सरकार के पास सबसे सख्त अंतरराष्ट्रीय कर्जदाता, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से दान के लिए लेनदारों द्वारा लगाई गई बढ़ती शर्तों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सैन्य तख्तापलट की आशंका? पार्थसारथी ने लिखा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में जो भी किया अमेरिका उससे नाराज चल रहा है। और अब अफगानिस्तान और तालिबान के संबंध भी खराब होते जा रहे हैं। जो बाइडेन ने सत्ता में आने के बाद इमरान खान से बातचीत नहीं की है, यह दोनों देशों के बीच खराब संबंधों का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा है कि अगले डेढ़ साल में पाकिस्तान में अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा सितंबर 2022 में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वह अपना उत्तराधिकारी चुनेंगे। लेकिन इमरान खान चाहेंगे कि फैज हमीद नए सेना प्रमुख बनें राकी उनका रास्ता आसान रहे और फिर से पीएम बन सकें। ऐसे हालात में सेना और इमरान सरकार में रार बढ़ने वाली है। ऐसे में बहुत संभव है कि पाकिस्तान में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन या सैन्य तख्तापलट हो।

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