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पसमांदा मुस्लिम समाज के आयोग में नुमाइंदगी दी जाये—अनीस मंसूरी

लखनऊ - पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व राज्य मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में पूर्व चीvफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के.जी. बाला कृष्णन की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया

लखनऊ – पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व राज्य मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में पूर्व चीvफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के.जी. बाला कृष्णन की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया जिस में कहा गया कि धर्म बदलने वालों को अनुसूचित जाति दर्जे के आरक्षण पर विचार किया जाएगा। इस कमीटी में दो सदस्य भी बनाया लेकिन आयोग जिनके लिए बना उसमे एक भी पसमांदा मुसलमान नहीं है। हम सरकार से मांग करते हैं कि पसमांदा मुसलमानो को आयोग में ज़्यादा से ज़्यादा शामिल करें जिस से पसमांदा के बारे में सही रिपोर्ट आ सके।इससे पूर्व में केंद्र की सरकारों ने कई आयोगों का गठन

1- काका कलेनकर आयोग 2- मुंगीरी लाल कमीशन 3- बी. पी. मण्डल कमीशन 4- जस्टिस सच्चर आयोग 5- रंगनाथ मिश्र कमीशन किया जिसमे काका कलेनकर तथा मुंगीरी लाल आयोग को मिला कर बिहार में कर्पूरी ठाकुर फार्मूला तैयार कर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर ने लागू किया जिससे कुछ फायदाहुआ। इसके अलावा बी. पी. मण्डल एवं सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्र कमीशन बना और उन्होंने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी लेकिन अभी तक सरकारों ने विचार नहीं किया।

पसमांदा मुस्लिम और धर्म बदलने वाले दलितों को आरक्षण दिए जाने के लिए अगर केंद्र सरकार सच में हितैषी है तो पुराने आयोगों की रिपोर्ट पटल पर रखकर एक बार समीक्षा कर लेती जिस से पुराने रिपोर्ट की खामियाँ सामने आ जाती और इन में भी सभी वर्गो के हालात भी सामने आ जाते और सरकार समय के साथ आर्थिक खर्चे भी कम होते।

अनीस मंसूरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सकारें पसमांदा मुसलमानो को जोड़ना तो चाहती हैं लेकिन पसमांदा तबके के लोगों को देना कुछ नहीं चाहती यदि सरकारें पिछड़े मुसलमानो के उत्थान के लिए काम करना है तो उन्हें 2024से पहले संवैधानिक तौर पर पिछड़े मुसलमानो के ज़मीनी स्तर पर काम करना पड़ेगा। अनीस मंसूरी ने के. जी. बाला कृष्णन आयोग के गठन का स्वागत तो किया लेकिन आयोग में पसमांदा मुसलमानो को नहीं रखा जिस मक़सद के लिए आयोग बनाया गया उसमें पसमांदा को शामिल किया जाये ताकि पसमांदा मुसलमानो के हालात के बारे में सही जानकारी हो सके इससे पूर्व में जो रिपोर्ट आयी हैं उन कमीटियों में पसमांदा को न रखने से कहीं न कहीं खामियां आयी हैं। इस अवसर पर मोहम्मद वसीम राईन, फ़ाज़िल अंसारी, पप्पू कुरैशी, राजू कुरैशी, के अलावा काफ़ी तादाद में लोग मौजूद थे।

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