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विश्व अंग्रेजी भाषा दिवस आज : झारखंड के आदर्श गांव के इस सरकारी स्कूल में इंग्लिश मीडियम से पढ़ते हैं बच्चे

आज विश्व अंग्रेजी भाषा दिवस पर जानें क्यों अंग्रेजी को विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाती है और क्यों अग्रेजी में दुनिया के ज्यादातर के देशों में काम किया जाता है।

पूर्वी सिंहभूम जिला के पटमदा प्रखंड स्थित प्लस टू आदिवासी हाई स्कूल बांगुड़दा के इंटर साइंस के छात्रों पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से होती है। यह गांव आदर्श गांव के रूप में जाना जाता है। प्लस टू के बच्चों को पढ़ने और लिखने में सहूलियत हो इस कारण यह प्रयास वर्ष 2013 से प्रारंभ किया गया था। अंग्रेजी में पढ़ने तथा लिखने के कारण स्कूल का रिजल्ट भी अच्छा होने लगा। जब इस बात की जानकारी वर्ष 2016 में तत्कालीन उपायुक्त अमित कुमार को मिली तो उन्होंने स्वयं स्कूल जाकर पठन-पाठन की स्थिति का जायजा लिया। बच्चें भी इस दौरान प्रश्नों का जवाब अंग्रेजी में देते दिखे। शिक्षकों के इस कार्य से प्रभावित हो शिक्षकों को तत्कालीन उपायुक्त ने सम्मानित भी किया।

आईएससी की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से करते हैं बच्चे

आज भी इस सरकारी स्कूल के बच्चे अपनी आइएससी की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से करते हैं। वर्ष 2013 से यह सिलसिला शुरू हुआ था। उस समय विज्ञान के चार शिक्षक थे, लेकिन अब यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक विवेकानंद दरिपा ही एकमात्र विज्ञान शिक्षक है। अपनी व्यवस्तता के बावजूद वे बच्चों को पढ़ाने का कोई कसर नहीं छोड़ते। वर्तमान में विद्यालय में 93 छात्र-छात्राएं इंटर साइंस में अध्ययनरत है।

कक्षा नवम से ही ट्रेंड हो जाते हैं बच्चे

इस स्कूल में साइंस पढ़ने वाले विद्यार्थियों को कक्षा नवम से ही अंग्रेजी में विज्ञान पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। वे कई टापिक को इंग्लिश में लिखते व बोलते भी है। इस स्कूल के बच्चों को यह पता होता है उन्हें दसवीं के बाद इस स्कूल में विज्ञान पढ़नी है तो उन्हें अंग्रेजी से पढ़ना होगा। इस कारण वे इसके लिए प्रयासरत रहते हैं। शिक्षक भी उनका सहयोग करते हैं।

रेफरेंस बुक खुद खरीद कर देते हैं प्रभारी प्रधानाध्यापक

प्लस टू आदिवासी हाईस्कूल बांगुड़दा के प्रभारी प्रधानाध्यापक विवेकानंद दरिपा ने कहा कि विज्ञान के शिक्षक नहीं होने के कारण उन्हें थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन वे इस कार्य को अपना धर्म मानते हैं। लेट होने पर पर छात्र इंतजार करते हैं और छात्रों को मैं निराश नहीं करता। वर्ष 2013 में इंटर साइंस की पढ़ाई करने में दिक्कत हुई थी, उसके बाद से सब सामान्य हो गया। बच्चें अंग्रेजी में विज्ञान की किताबें खुद खरीदते हैं। हां रेफरेंस बुक मेरी ओर से छात्रों को दी जाती है। इन छात्रों के लिए उन्होंने खुद एक छोटा सा बुक बैंक बनाया है। बच्चे इस बैंक से अपनी आवश्यक किताबें लेते हैं तथा अंग्रेजी में ही ग्रुप डिस्कशन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि इंटर साइंस के उत्तरों को हिंदी में लिखना कठिन है। अंग्रेजी में उन्हें लिखने में कोई परेशानी नहीं होती। उन्होंने कहा कि छात्रों की इस विशेष योग्यता के कारण सरकार की कई योजनाओं में विद्यालय के छात्रों का बेहतर प्रदर्शन रहता है। कई प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में भी यहां के छात्र उत्तीर्ण हो रहे हैं।

आज के दौर में अंग्रेजी की अहमियत

  • अंग्रेजी एक ग्लोबल लैंग्वेज है।
  • उच्च कक्षाओं में विज्ञान विषय को पढ़ने तथा लिखने के लिए यह एक आसान भाषा है।
  • यह भाषा देश-विदेशों में हमारी पहुंच को आसान बनाती हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर के समाचार खोज व आविष्कार के बारे में जानकारी इसी भाषा के माध्यम से होती है।
  • उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी भाषा में बोलना और लिखना दोनों जरूरी है
  • झारखंड सरकार ने भी अंग्रेजी की अहमियत को माना है। इस कारण राज्य के सभी जिलों में माडल स्कूल आफ एक्सीलेंस को अगले वर्ष से प्रारंभ करने की योजना पर कार्य चल रहा है। पूर्वी सिंहभूम में इस योजना के तहत तीन स्कूलों के भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है। ये स्कूल पूरी तरह से जैक बोर्ड से हटकर सीबीएसई में परिवर्तित हो जाएंगे। यहां कक्षा एक से लेकर 12वीं तक की शिक्षा पूरी तरह से अंग्रेजी माध्यम से दी जाएगी।

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