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‘ए थर्सडे’ स्टार यामी गौतम ने कहा-अब समय आ गया है कि वेब सीरीज और फिल्मों को फीमेल एक्टर्स भी लीड कर सकती हैं

इस फिल्म और अपनी पर्सनल-प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं।

एक्ट्रेस यामी गौतम इन दिनों अपनी फिल्म ‘ए थर्सडे’ को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। उनकी यह फिल्म एक दिन पहले शुक्रवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है। बेहजाद खंबाटा के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में यामी के अलावा डिंपल कपाड़िया, नेहा धूपिया और अतुल कुलकर्णी लीड रोल में नजर आ रहे हैं। अब हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में यामी ने इस फिल्म और अपनी पर्सनल-प्रोफेशनल लाइफ से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं।

अब तक ऐसा कौन-सा किरदार रहा, जिससे निकलने में सबसे ज्यादा समय लगा? मैं कहूंगी कि टाइम नहीं लगा, पर ‘ए थर्सडे’ में नैना का किरदार निभाते वक्त कुछ अलग फील हुआ। जिस तरह से उसका जो इमोशनल वेट है, जो मुझे पकड़कर रखा था। अमूमन शूटिंग का आखिरी दिन होता है, तब बहुत खुश होते हैं कि अच्छा काम हुआ, फीलिंग अच्छी है, सबको अच्छी तरह से गुड बॉय बोलना चाहिए। लेकिन, मुझे याद है, जिस दिन ए थर्सडे के सेट पर शूटिंग का आखिरी दिन था, उस दिन बहुत इमोशनल थी। एक सुकून भी था और सेम टाइम ऐसा भी लगा कि यह कैरेक्टर ऐसा भी कर सकता है।

ओटीटी पर कुछ ऐसी सीरीज और फिल्में आ रही हैं, जिसे एक्ट्रेस लीड कर रही हैं, इस जिम्मेदारी का प्रेशर, परिवर्तन आदि के बारे में बताइए? यह बहुत अच्छी बात है। मैं चाहूंगी कि चाहे यह ओटीटी हो या बड़ा पर्दा, पर इसे कायम रहना चाहिए। सेम टाइम चाहूंगी कि हम अच्छी फिल्में बनाएं। सिर्फ यही होना काफी नहीं होगा कि यह एक ऐसी फिल्म है, जिसे फीमेल एक्ट्रेस लीड कर रही है। हालांकि, यह बहुत बड़ी साहस की बात है। यह साहस राइटर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर में आया है। यह जानने के बाद भी हमारा स्ट्रक्चर सालों से रहा है कि फिल्म का इकोनॉमी आदि सारी चीजें मेल एक्टर पर निर्भर करता है। इन चीजों को बदलने में समय लगता है। आई थिंक, वह समय आ गया है, जहां पर लोग चीजों को अलग नजरिए से देख रहे हैं। मुझे लगता है कि ऑडियंस का नजरिया बहुत प्रोग्रेसिव है। उनको फर्क नहीं पड़ता कि इसे मेल या फीमेल एक्टर कर रहे हैं। उनको अच्छी फिल्में, अच्छे शोज और अच्छी परफॉर्मेंस चाहिए।

अब समय है कि अच्छी राइटिंग हो। अच्छे किरदार लिखे जाएंगे, तब अच्छे हमें मिलेंगे और अच्छे किरदार निभाए जाएंगे। टैलेंट में कमी कहीं नहीं है। जितनी अच्छी फिल्में बनेंगी, वह उतना अच्छा परफॉर्म करेंगी। वह अच्छा परफॉर्म करेंगी, तब रेवेन्यू अच्छा होगा और तब प्रोड्यूसर को लगेगा कि हां, बिल्कुल बैक कर सकते हैं। सोचिए, उस जमाने में मदर इंडिया आई। उस जमाने की नूतन, मधुबाला, मीना कुमारी, श्रीदेवी, स्मिता पाटिल आदि से लेकर अब विद्या बालन, कंगना रनोट, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण आदि हैं। अगर आप इस साल का फरवरी महीना देखें, तब पहले तापसी पन्नू की फिल्म ‘लूप लपेटा’, भूमि पेंडेकर की फिल्म ‘बधाई दो’, मेरी और नेहा धूपिया की ‘ए थर्सडे’, आलिया भट्‌ट की ‘गंगूबाई’ आदि फिल्में आ रही हैं। आई थिंक, अब वक्त बदल रहा है। मैं चाहूंगी कि थिएटर ‘बधाई दो’ जैसी लो बजट की फिल्में थिएटर में बहुत अच्छा करें। यह मुश्किल होगा, इसे झुठला नहीं सकते। क्योंकि हम सब मुश्किल वक्त से गुजर रहे हैं। टाइम लगेगा, पर हो जाएगा। अच्छी चीजों को लोग गले लगाने के लिए मौजूद हैं।

अपने उस स्वभाव और अदा के बारे में बताइए, जो कम लोगों को पता है? मुझे लगता है कि मैं बहुत जल्दी किसी के हाव-भाव को पकड़ लेती हूं। कुछ समय किसी के साथ वक्त बिता लेती हूं, तब अगली बार उनकी तरह बात कर करने लग जाती हूं। उसको फनी बनाना और एकदम बातों में ले आने में मुझे बहुत मजा आता है। पता नहीं लोग जानते हैं कि नहीं, पर मुझे पहाड़ों से बहुत प्यार है, नेचर से बहुत प्यार है। ऑफकोर्स, मेरा जन्म वहां हुआ है। जब ऐसे किसी लोकेशन पर शूट करती हूं, या स्पेशली घूमने जाती हूं, तब उसे देखती हूं और पिक्चर बहुत कम लेती हूं। मुझे लगता है कि आंखें जो देखती हैं, उससे रूह को बहुत सुकून मिलता है। वहीं पर मुझे बहुत गुस्सा आता है, जब देखती हूं कि कुछ लोग उसे गंदा करके जाते हैं। आपको अच्छा लगता है, इसलिए सेलिब्रेट करने के लिए वहां जा रहे हैं। लेकिन, गंदा करते हैं, तब गुस्सा आता है। वैसे मुझे गुस्सा बहुत कम बातों पर आता है, लेकिन जिन बातों पर आता है, उसमें से यह एक है।

कुछ साल पहले पोल डांस सीख रही थीं? कितना सीख पाईं और कितना रह गया? तीन साल पहले सीख रही थी। साल 2020 लगने के बाद तो अब सब कुछ रह गया। वह किसी किरदार के लिए नहीं सीख रही थी। मुझे फिटनेस में कुछ न कुछ करना अच्छा लगता है। जैसे मैंने लॉकडाउन के दौरान योग पर काफी काम किया। वह भी खुद से किया। मुझमें जो क्षमता है, जिस पर लगता है कि वर्क कर सकती हूं, उसे किया। कुछ अलग करते रहना चाहिए। उसमें एफर्ट भी लगता है और कुछ नया सीखते भी रहते हैं।

कुछ महीनों पहले अपनी स्किन के बारे में पोस्ट किया था, अब तबियत कैसी है? देखिए, यह तो एक कंडीशन है और यह कंडीशन मुझे टीन एज ईयर से थी। यह बहुत कॉमन कंडीशन है। इसको पोस्ट करने का मतलब भी यही था कि इस कंडीशन को ठीक करना बहुत मुश्किल है। चूंकि यह आपकी स्किन पर है, तब दिखता है। बहुत बार ऐसा होता है कि लोग बोलते हैं- अरे! ओहो… यह क्या हुआ? या फिर शूट करते हैं, तब कोई बोलता है कि इसको कवर करना है, इसको ए-ब्रश कर देते हैं। इसको एक्सप्रेस करने का मतलब यही था। यह शूट मेरा खुद का था, वह किसी ब्रांड या किसी चीज से रिलेटेड नहीं था। मेरा मन किया कि इसे शेयर करूं। इस पर जिस तरह रिस्पांस आया है, वह बहुत सराहनीय रहा। अगर सोशल मीडिया का अच्छा वाला पार्ट देखें, तब यह है। अगर आप अच्छी बात कहना चाहते हैं, जिससे लोगों को अच्छा लगे, तब यह अपनी बात रखने का एक अच्छा जरिया है।

आपकी खूबसूरती का राज क्या है और इसे मेनटेन रखने का तरीका क्या होता है? देखिए, यह सच है कि सबसे बड़ी खूबसूरती आपकी आंखों में होती है। मैंने तो बताया कि मुझे तो स्किन कंडीशन है। खूबसूरती का राज यही है कि आप जैसे हैं, वैसे खुद को एक्सेप्ट करें और प्यार करें। सभी सुंदर हैं। मेरा मानना है कि हर किसी का एक स्वभाव होता है और वह स्वभाव चेहरे पर उभर कर आता है। अगर अच्छा है, तब अच्छा ही आएगा। उसमें आपके फीचर वगैरह कुछ मायने नहीं रखता है। आपकी खूबसूरती की पहचान मुझे लगता है कि आपके स्वभाव से होती है। अगर आप चेहरे की बात करें, तब कहूंगी कि यह तो मेरे माता-पिता की देन है। इसमें मैं क्या क्रेडिट लूं। हां, यह कहूंगी कि आप अच्छा खाएं, पानी खूब पिएं और खुश रहें। अगर आप खुश रहेंगे, तब अच्छे लगेंगे। जिस दिन आप खुश नहीं रहेंगे, तब खुद ही देख सकते हैं कि उस दिन वह तनाव चेहरे पर आता है। फिर आपने चेहरे पर कुछ भी लगाया हो, उसका कोई फायदा नहीं होता है

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