नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बांग्लादेश चुनाव पर पहला बयान सामने आया है। उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की बंपर जीत के लिए इसके चेयरमैन तारिक रहमान को बधाई दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा:”मैं श्री तारिक रहमान को बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी को निर्णायक जीत दिलाने के लिए अपनी हार्दिक बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों द्वारा आपके नेतृत्व में रखे गए गहन विश्वास को दर्शाती है।
भारत निरंतर बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में निरंतर खड़ा रहेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारी बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का इंतजार कर रहा हूं।”
दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस पोस्ट के बाद भारत-बांग्लादेश के संबंधों में सुधार की उम्मीद की जा रही है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के बीमार होने के दौरान उनके स्वास्थ्य के लेकर गहरी चिंता जाहिर की थी और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। बाद में खालिदा के निधन पर गहरा दुख जाहिर किया था। इसे बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों में सुधार के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। पीएम मोदी ने अब बीएनपी की ऐतिहासिक जीत और तारिक रहमान के नेतृत्व के लिए उनको बधाई दी है।
I convey my warm congratulations to Mr. Tarique Rahman on leading BNP to a decisive victory in the Parliamentary elections in Bangladesh.
This victory shows the trust of the people of Bangladesh in your leadership.
India will continue to stand in support of a democratic,…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
कैसे बिगड़े भारत-बांग्लादेश के संबंध
अगस्त 2024 से पहले तक शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत-बांग्लादेश के संबंध सबसे मजबूत स्थिति में रहे। मगर जुलाई-अगस्त में एक छात्र आंदोलन के जरिये शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को सत्ता से बेदखल कर दिया गया। लिहाजा उनको भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद भारत विरोधी जमात-ए-इस्लामी ने देश में कट्टरपंथ और उग्रवाद को बढ़ावा दिया। कार्यवाहक मुहम्मद यूनुस की सरकार भी जमात के कृत्यों का समर्थन करती रही। हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की बांग्लादेश में लगातार हत्याएँ हो रही हैं। हिंदुओं के घरों को तोड़ा जा रहा है, उनके घरों को जलाया जा रहा है। इस दौरान भारत-बांग्लादेश के संबंध लगभग टूट चुके हैं। अब 20 साल बाद बीएनपी की सत्ता में वापसी के बाद दोबारा दोनों देशों के संबंधों में काफी हद तक सुधार की उम्मीद की जा रही है।

