पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पोलो मैदान में गुरुवार को आयोजित होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित सभा से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। सभा से ठीक पहले भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे चुनावी माहौल और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है।
‘बस मालिकों को बुकिंग कैंसिल करने के लिए किया मजबूर’ भाजपा की ओर से गंभीर आरोप लगाते हुए पश्चिम बर्धमान जिला के जनरल सेक्रेटरी केशव पोद्दार ने दावा किया है कि कुलटी विधानसभा क्षेत्र से हजारों लोगों को सभा में शामिल कराने के लिए बुक की गई करीब 200 बसों को तृणमूल कांग्रेस के दबाव में कैंसिल करवा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बस मालिकों को न केवल बुकिंग रद्द करने के लिए मजबूर किया गया, बल्कि उन्हें एडवांस में दी गई रकम भी वापस करने के लिए बाध्य किया गया।
‘गिरता जा रहा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का स्तर’
केशव पोद्दार ने अपने बयान में कहा कि कुलटी विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की “प्रतिहिंसा की राजनीति” पहले कभी देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में यहां के लोगों ने अलग-अलग विधायकों—मानिक बाबू, उज्ज्वल बाबू और वर्तमान में डॉ. अजय पोद्दार—को चुना, लेकिन इस तरह की घटनाएं कभी सामने नहीं आईं। उनके अनुसार, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का स्तर गिरता जा रहा है।
आर्थिक नुकसान उठाने की दी धमकी
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े श्रमिक संगठनों ने बस मालिकों को धमकी दी कि यदि उन्होंने भाजपा समर्थकों को प्रधानमंत्री की सभा में ले जाने के लिए अपनी बसें दीं, तो उनके वाहनों को खड़ा करा दिया जाएगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पोद्दार ने इसे “गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा, “यह केवल बस कैंसिल करने का मामला नहीं है, बल्कि लोगों को उनकी लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश है। लेकिन कुलटी की जनता इस गुंडागर्दी का जवाब जरूर देगी।”
बीजेपी के आरोपों पर TMC ने क्या कहा?
वहीं, भाजपा के इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस ने पूरी तरह से पलटवार किया है। तृणमूल के श्रमिक नेता राजू अहलुवालिया ने इन सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि जिन बसों की बात भाजपा कर रही है, वे अधिकतर तृणमूल से जुड़े श्रमिकों और यूनियनों द्वारा संचालित हैं। राजू अहलुवालिया के अनुसार, “अगर कोई बस तृणमूल से जुड़े श्रमिक चला रहे हैं, तो वे किसी अन्य राजनीतिक दल की सभा में जाकर उनके झंडे के साथ भाग नहीं ले सकते। यह उनका अपना निर्णय है, इसमें किसी तरह की जबरदस्ती या धमकी का सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर भाजपा का संगठन मजबूत होता, तो उन्हें इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी है, जिसकी वजह से उन्हें ऐसे मुद्दे उठाने पड़ रहे हैं।
पीएम मोदी की सभा के इंचार्ज का आया बयान
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा के राज्य स्तरीय नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के इंचार्ज कृषनेन्दु मुखर्जी का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उन्हें भी जानकारी मिली है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों से बसों की बुकिंग रद्द की गई है। कृषनेन्दु मुखर्जी ने आरोप लगाया कि बस मालिकों को तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठनों की ओर से धमकाया गया। उन्होंने कहा, “बस मालिकों से कहा गया कि अगर उन्होंने प्रधानमंत्री की सभा के लिए अपनी बसें दीं, तो उनके वाहनों को सात दिनों तक खड़ा कर दिया जाएगा। यह साफ तौर पर डराने और दबाव बनाने की कोशिश है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन सब बाधाओं के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सभा में भारी भीड़ उमड़ेगी और लाखों लोग इसमें शामिल होंगे।

