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गोरखपुर में बारिश बनी मुसीबत, राप्ती और रोहिणी नदी डेंजर लेवल के पार, 6 तहसील के 64 गांव प्रभावित

गांव वालों की मदद के लिए 22 छोटी-बड़ी नाव लगाई गई है

जनपद गोरखपुर में बीते दो से तीन दिन से हो रही आफत की बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरयू और रोहिन के बाद राप्ती नदी भी तेजी से बढ़ते हुए डेंजर लेवल को क्रास कर गई है। गांव वालों की मदद के लिए 22 छोटी-बड़ी नाव लगाई गई है। राहत सामग्री के वितरण के साथ मनुष्य और मवेशियों के उपचार के लिए चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं। खाद्यान्न और चारा की व्यवस्था के साथ शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीणों और बच्चों को नदी और जलजमाव वाले क्षेत्र में जाने से मना किया गया है।

पूर्वी यूपी में बीते 2 से 3 दिनों से लगातार हो रही बारिश का असर दिखाई दे रहा है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भी बारिश से वर्षा का जल पूर्वी यूपी के तराई बेल्ट में पहुंच रहा है। यही वजह है कि अचानक से नदियां उफान पर आ गई है। गोरखपुर में सरयू हो रोहित के बाद अब राप्ती ने भी डेंजर लेवल पार कर लिया है और तेजी के साथ बढ़ रही है। जिला प्रशासन के साथ आपदा प्रबंधन विभाग, बाढ़ चौकियां और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। जिला आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने बताया कि 7 तहसील में से 6 तहसील के 64 गांव बाढ़ से प्रभावित है जिसमे कैंपियरगंज, सहजनवा, बांसगांव, गोला, खजनी और चौरी चौरा का कुछ क्षेत्र प्रभावित है।

गोरखपुर के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन खतरे के निशान को पार चुकी है। राप्‍ती भी तेजी से चढ़ान पर है। कुआनो और गुर्रा नदियां भी तेजी के साथ चढ़ान पर है। लगातार हो रही बारिश की वजह से सभी नदियां उफान पर हैं। सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ग्रामीणों ने नदी और गांव में बढ़ते पानी का हाल बताया। एडीएम वित्त राजेश कुमार सिंह और जिला आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने बताया कि विगत दिनों से लगातार हो रही बारिश की वजह से नदियां उफान पर है। घाघरा और रोहिन के साथ राप्ती भी खतरे का निशान पार कर गई है और तेजी के साथ बढ़ रही है।राहत और बचाव कार्य के लिए 22 छोटी-बड़ी नाव लगाया गया है। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य के साथ एनडीआरएफ एसडीआरएफ की टीम भी लगी हुई है। राशन के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी आलाधिकारी नजर बनाए हुए हैं। मवेशियों के चारे की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों और खासकर बच्चों को नदी और पानी गिरे हुए गड्ढे के आस-पास जाने से मना किया गया है।

बाइट, अमर, ग्रामीण

बाइट, गौतम गुप्ता, जिला आपदा विशेषज्ञ

रिपोर्टर…प्रवीण कुशवाहा

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