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आखिर क्या होता है समुद्री खीरे?, जिसे मार्केट में करोड़ों रुपए देने को तैयार हैं लोग

तमिलनाडु पुलिस के तटीय सुरक्षा समूह (सीएसजी) ने नागपट्टिनम से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये मूल्य का 1080 किलोग्राम समुद्री खीरे जब्त किये हैं.

तमिलनाडु पुलिस के तटीय सुरक्षा समूह (सीएसजी) ने नागपट्टिनम से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये मूल्य का 1080 किलोग्राम समुद्री खीरे जब्त किये हैं. सूत्रों ने बुधवार को यहां यह जानकारी दी. कई किलोग्राम समुद्री खीरे को अवैध रूप से संरक्षित करने वाले एक व्यक्ति के बारे में एक गुप्त सूचना के आधार पर, पुलिस और सीएसजी ने मंगलवार शाम को अक्कराईपेटी के पास एक पुरानी इमारत पर छापा मारा. छापेमारी के दौरान, सीएसजी ने पाया कि बड़ी मात्रा में समुद्री खीरे को देश से बाहर अवैध रूप से निर्यात करने के लिए संरक्षित किया जा रहा था.

समुद्री जीव की दक्षिण भारत में होती है तस्करी

अधिकारियों ने पाया कि 248 किलो समुद्री खीरे पहले से ही संरक्षित थे और 812 किलो संरक्षित किया जाना था. छापेमारी में 4 किलो समुद्री घोड़े (अश्वमीन) और 15 किलो शार्क के पंख पाए गए, जिन्हें जब्त कर लिया गया. प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) ने समुद्री खीरे को लुप्तप्राय प्रजाति बतायी है, समुद्री घोड़ों (अश्वमीन) को लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में और शार्क को कमजोर और लुप्तप्राय बताया है.

तमिलनाडु पुलिस ने जब्त किए कई समुद्री जीव

स्टोव, गैस सिलेंडर, तिरपाल की चादरें, जो समुद्री खीरे को संरक्षित करने के लिए गर्म करने और सुखाने के लिए इस्तेमाल की जाती है, उन्हें भी बरामद किया गया. पुलिसकर्मियों ने कोल्ड स्टोरेज बॉक्स और बैरल भी जब्त किए हैं. पुलिस ने एक टी. मुरुगनाथम को गिरफ्तार किया और कहा कि वह समुद्री खीरे, समुद्री घोड़ों और शार्क पंखों को विदेशों में अवैध रूप से निर्यात करने के लिए संरक्षित कर रहा था. पुलिस टीम ने जब्त नशीला पदार्थ वन विभाग को सौंप दिया है. यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि तस्करी में और लोग शामिल थे या नहीं. आखिर क्या होता है समुद्री खीरे? इस जीव को लोग ‘सी कुकुम्बर’ (Sea Cucumber) भी कहते हैं. दक्षिण भारत और श्रीलंका में इस समुद्री जीव की तस्करी की जाती है. नाम से लगता है कि यह कोई समुद्री सब्जी है, लेकिन ऐसा नहीं है. गौरतलब है कि समुद्री जीव सी कुकुम्बर की विदेश में काफी डिमांड है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तस्करी की जाती है. इसे लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल किया जाता है.

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