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आग से बचने के लिए रियलिटी चेक

दिल्ली के मुंडका में आग में ऐसा तांडव मचाया की 29 लोगों की जान ले ली कई लोगों का कोई अता पता नहीं रहा

दिल्ली के मुंडका में आग में ऐसा तांडव मचाया की 29 लोगों की जान ले ली कई लोगों का कोई अता पता नहीं रहा इस आग में, लेकिन इस धधकती हुई आग से आपने कितना सीखा, इस आग ने मुंडका में  कई परिवारों उजाड़ दिए लेकिन गौतम बुध नगर के सरकारी अस्पतालों का क्या हाल है इसका रियलिटी चेक करना भी जरूरी है क्योंकि 3 महीने पहले ही फायर विभाग ने सरकारी अस्पताल को अपना फायर सिस्टम दुरुस्त करने की बात कही थी। सबसे पहले आपको बताते हैं कि चाइल्ड पीजीआई और सरकारी अस्पताल एक कंबाइंड अस्पताल हैं दोनों का कैंपस मिलाजुला है

और दोनों का बेसमेंट भी मिलाजुला है। फर्क सिर्फ इतना है दोनों का मैनेजमेंट अलग है सरकारी अस्पताल में छोटे-बड़े सभी का इलाज होता है और चाइल्ड पीजीआई में सिर्फ बच्चों का इलाज होता है। अब आपको बताते हैं असल बाद तो चलिए सबसे पहले शुरुआत करते हैं चाइल्ड पीजीआई से और यहां के फायर सिस्टम के बारे में आपको बताते हैं यहां ऊपर बिल्डिंग में तो सब कुछ सही मिला फायर सिस्टम दुरुस्त है, लेकिन पीजीआई के बेसमेंट में जब हम गए तो हैरान रह गए क्योंकि यहां जो तस्वीरें सामने आई वह देखने के बाद हालात समझ आ गई यह तस्वीरों में आप देखिए फायर सिस्टम की क्या हालात हो रखी है इक्विपमेंट का कनेक्शन कटा है

पाइप गला सड़ा पड़ा है। सिलेंडर एक्सपायर हो चुका है और यहां देखने के बाद ऐसा लग रहा है जैसे बरसों से इसकी सफाई नहीं हुई हो, इस के हालात भी जस के तस बने हुए हैं फायर सिलेंडर नीचे जमीन पर पड़ा है 

तो ऐसे में अगर इस अस्पताल में कभी आग लगती है या कोई हादसा होता है तो इसके जिम्मेदार कौन होगा। क्योंकि जितना वक्त इस सिस्टम को दुरुस्त करने में लगेगा उतने वक्त में तो आग अपना तांडव मचा चुकी होगी। जब इस पूरे मसले पर हमने चाइल्ड पीजीआई के डायरेक्टर से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने लखनऊ में होने की बात कही और साथ ही फोन पर मैं बताया कि 3 महीने पहले फायर विभाग ने उनको ए सर्टिफिकेट दिया है जिसके मुताबिक उनके यहां फायर सिस्टम दुरुस्त है। जब की तस्वीर ये है

आपको हैरान और परेशान कर देंगे यह ठीक ओपीडी के सामने की तस्वीरें हैं और आप देखिए यहां फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ रेड कलर का बॉक्स बना है उसमें ना कोई फायर इक्विपमेंट लगे हैं, ना पाइप लगा है और ना ही यहां फायर सिलेंडर मौजूद है अगर कभी यहां हादसा होता है तो इस जगह पर तमाम लोग रहते हैं क्योंकि इससे कुछ ही दूरी पर पर्चे बनाए जाते हैं 

जब इस पूरे मामले पर हमने जिला अस्पताल की सीएमएस से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल कुछ ही दिनों में दूसरी जगह पर शिफ्ट होना है और सेंट्रल फायर इक्विपमेंट सिस्टम को ठीक कराने में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का खर्च आएगा इसलिए सेंट्रल सिस्टम को ठीक नहीं कराया गया है बल्कि जो फ्लोर पर सिलेंडर रखें उनको सभी को रिफिल करा लिया गया है लेकिन सवाल यह है कि अगर हॉस्पिटल शिफ्ट होने से ही पहले यहां आग लग जाती है तो यहां हर रोज हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी मैं आते हैं अस्पताल में मरीज एडमिट भी रहते हैं। अगर आग लगी तो उन मरीजों का क्या होगा।

बाइट: विनीता अग्रवाल, CMS, जिला अस्पताल

रिपोर्टर –साजिद अली नोएडा

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