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Facebook twitter wp Email affiliates बॉलीवुड में बज रहा है साउथ इंडियन फिल्मों का डंका, आखिर कैसे हिन्दी बेल्ट में भी कर रहीं हैं धांसू कमाई

केजीएफ चैप्टर 2 ‘आरआरआर’ ‘राधे श्याम’ ‘आदिपुरुष’ ‘लाइगर’ ‘सालार’ जैसी दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी में रिलीज होंगी। इनकी कहानी निर्माण का अंदाज संस्कृति हिंदी फिल्मों से अलग है पर दर्शक इनका इंतजार कर रहे हैं। क्या वजह है कि बढ़ती जा रही है इनकी स्वीकार्यता?

तेलुगु स्टार अल्लू अर्जुन अभिनीत फिल्म ‘पुष्पा- द राइज पार्ट 1’ र्के हिंदी संस्करण की बाक्स आफिस पर 95 करोड़ रुपए कमाई ने इस बात को पुष्ट किया कि दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी दर्शकों के बीच जबरदस्त जगह बना चुकी हैं। आगामी दिनों में ‘केजीएफ चैप्टर 2, ‘आरआरआर’ , ‘राधे श्याम’ , ‘आदिपुरुष’, ‘लाइगर’ , ‘सालार’ जैसी दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी में रिलीज होंगी। इनकी कहानी, निर्माण का अंदाज, संस्कृति हिंदी फिल्मों से अलग है, पर दर्शक इनका इंतजार कर रहे हैं। क्या वजह है कि बढ़ती जा रही है इनकी स्वीकार्यता? पिछले दिनों आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को 14 अप्रैल को रिलीज करने की पुष्टि की। उसी दिन कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘केजीएफ- चैप्टर 2’ रिलीज हो रही है। इस तरह से आमिर ने उन खबरों व आशंकाओं पर विराम लगाया कि ‘केजीएफ- चैप्टर 2’ की वजह से ‘लाल सिंह चड्ढा’ की कमाई पर फर्क पड़ सकता है। क्या दक्षिण भारतीय कंटेंट हिंदी कंटेंट को टक्कर दे रहा है? इस बाबत निर्माता सिद्धार्थ राय कपूर कहते हैं, ‘इसमें कोई दो राय नहीं कि साउथ की इंडस्ट्री ऐसी फिल्मों का निर्माण कर रही है, जिनके जरिए वह देश के सभी दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पूरे देश के दर्शकों के बीच स्वीकार्यता प्राप्त करने वाली इन फिल्मों को आमतौर पर पैन (प्रेजेंस एक्रास नेशन) इंडिया फिल्मों के तौर पर निरुपित किया जाता है। ऐसी फिल्मों को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। हमें उनसे इस संबंध में सीखने की जरूरत है कि वे दर्शकों की रुचि को किस प्रकार समझकर बड़े बजट की फिल्मों को आकार दे रहे हैं।’ अपनी जमीन पर पकड़ रखें: कहानियां वही पसंद आती हैं, जिनकी भावनाएं वैश्विक हों। वे कहानियां हमारे आसपास की हों या फिर ऐसी दुनिया गढ़ी गई हो जो काल्पनिक होने के बावजूद आकर्षक लगे। दक्षिण भारतीय फिल्में दर्शकों के बीच जमीन से जुड़ी कहानियां ला रही हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों की बढ़ती पैठ को लेकर फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि अब हमें कमर कसनी चाहिए। हालीवुड की फिल्में यहां पर बहुत चलती हैं। साउथ की फिल्में भी अच्छा कंटेंट लाती हैं और पसंद की जाती हैं। कन्नड़ सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है। मलयालम सिनेमा शुरुआत से अच्छा रहा है। भले ही आप उसे आर्ट सिनेमा कहें, लेकिन अब वो दूरी भी खत्म हो गई है। उनकी फिल्में बहुत अच्छी बन रही हैं, इसलिए अच्छा बिजनेस भी कर रही हैं। हमारी इंडस्ट्री को भी कमर कसनी चाहिए। साउथ की फिल्मों के किरदार जमीन से जुड़े होते हैं। हमें दोबारा अपने समाज को समझकर फिर से लिखना पड़ेगा। हालीवुड की नकल करके लाभ नहीं मिलेगा।’ बढ़ेंगे पैन इंडिया फिल्मों के शोज: क्या दक्षिण भारतीय फिल्मों की देश में व्यापक रिलीज पर उन्हें हिंदी फिल्मों के बीच ज्यादा शोज मिलेंगे? यह सवाल अक्सर सामने आता रहता है। इस बाबत फिल्म एक्जीबिटर अक्षय राठी कहते हैं, ‘ऐसा हो सकता है कि पहले के मुकाबले अब दक्षिण भारतीय फिल्मों को ज्यादा शोज मिलें, लेकिन उसका यह मतलब नहीं है कि हिंदी फिल्मों को मंच नहीं मिलेगा। फिल्म चाहे हिंदी हो, दक्षिण भारतीय या हालीवुड, सिनेमाघरों में जो शोज लिए जाते हैं, उसका निर्णय सिर्फ इस आधार पर किया जाता है कि फिल्म कितने दर्शकों का मनोरंजन करने का दम रखती है। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों का टकराव रोकने के बजाय दर्शकों को वैरायटी देने की जरूरत है। ‘पुष्पा’ जब रिलीज हुई थी तो उसे इतने शोज नहीं मिले थे, जितने ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ को मिले थे। आज सैकड़ों सिनेमाघरों में ‘पुष्पा’ के शोज चल रहे हैं। दक्षिण भारत की फिल्मों के किरदार अपनी संस्कृति से जुड़े होते हैं, वहीं हिंदी फिल्मों में वल्र्ड सिनेमा का असर दिखाई देता है। इसमें कुछ सही या गलत नहीं है। यह फिल्ममेकर का निजी नजरिया होता है कि उन्हें क्या कहानी सुनानी है। ‘सूर्यवंशी’ फिल्म में लोकल एलिमेंट्स थे, इसलिए वह पसंद की गई। हिंदी फिल्म एक राष्ट्रीय प्रोडक्ट है, जिसे राजस्थान, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश हर जगह बिजनेस मिलना जरूरी है। इनमें से एक या दो मार्केट अगर बंद हो गए तो हिंदी फिल्म की रिकवरी पर असर पड़ता है।’

नजरिए का अंतर है: अभिनेत्री तापसी पन्नू उन कलाकारों में से हैं, जो हिंदी के साथ दक्षिण भारतीय फिल्में भी कर रही हैं। वह कहती हैं, ‘यह नजरिए का फर्क है कि दक्षिण भारतीय फिल्में डामिनेट कर रही हैं। जब मैं साउथ में काम करती हूं तो वहां के लोग कहते हैं कि हिंदी फिल्मों का कंटेंट कितना आगे बढ़ चुका है। जब यहां पर काम करती हूं तो लोग कहते हैं कि साउथ का कंटेंट मासेस के लिए बनता है। हर तरह की फिल्मों के दर्शक हैं। दक्षिण भारत में जब फिल्म बनती है तो वह बी एंड सी या मास आडियंस के लिए ज्यादा बनती हैं। बी यानी सेमी-अर्बन और सी यानी ग्रामीण दर्शकों को दिमाग में रखकर कहानियां बनाई जाती हैं, क्योंकि वहां से सबसे ज्यादा बाक्स आफिस कलेक्शन आते हैं। कई बार जब ये फिल्में हिंदी बेल्ट में रिलीज होती हैं तो जो बी और सी सेंटर्स होते हैं, उनको अपील करती हैं। वहां पर ए सेंटर्स यानी शहरी दर्शक हिंदी मार्केट के मुकाबले कम हैं। उसके लिए फिल्म निर्माण में प्रयोग किए जाते हैं। ऐसी फिल्में उनके लिए बनाई जाती हैं, जिन्होंने वल्र्ड सिनेमा देखना शुरू किया है और वे हिंदी में रेग्यूलर फार्मूला फिल्मों के बजाय कुछ नया देखना चाहते हैं। हिंदी बेल्ट में ऐसे दर्शक अपेक्षाकृत अधिक हैं, इसलिए यहां ए सेंट्रिक फिल्में ज्यादा बनती हैं और उनकी रिकवरी हो जाती है।’

साथ मिलकर बन सकती हैं बेहतरीन फिल्में: नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘मीनल मुरली’ को भी पसंद किया जा रहा है। यह फिल्म हिंदी सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। इस फिल्म के अभिनेता टोविनो थामस कहते हैं, ‘मलयालम फिल्में हमेशा अलग रही हैं। उन्हें हाल में जैसा एक्सपोजर मिलना शुरू हुआ है, वैसा पहले नहीं था। डिजिटल प्लेटफार्म की वजह से ये फिल्में लोगों तक पहुंच रही हैं। सबटाइटल और डबिंग की वजह से हर भाषा की फिल्मों को देखा जा रहा है। मुझे लगता है कि अब हमें पैन इंडिया फिल्मों को ज्यादा एक्सप्लोर करने की जरूरत है। भारत एकमात्र दुनिया का ऐसा देश है, जहां कई फिल्म इंडस्ट्री हैं। अगर हम एकसाथ आए तो बेहतरीन फिल्में बना सकते हैं।’ पैन इंडिया फिल्म ‘आरआरआर’ इस साल जनवरी में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, पर दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सिनेमाघर बंद हुए तो इसकी रिलीज को टाल दिया गया। तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार और इस फिल्म के अभिनेता जूनियर एनटीआर कहते हैं, ‘हमारे लिए हिंदी दर्शक बहुत मायने रखते हैं, खासकर ‘बाहुबली’ फिल्म के बाद से। क्षेत्रीय भाषा के दायरों को तोड़कर ‘बाहुबली’ फिल्म ने सभी फिल्म इंडस्ट्रीज को मिलाकर एक इंडस्ट्री बना दिया। इसके लिए उत्तर भारत के दर्शकों का मैं शुक्रिया अदा करना चाहूंगा। पूरे देश के दर्शक मिलकर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को और आगे लेकर जाएंगे।’

बॉलीवुड में बज रहा है साउथ इंडियन फिल्मों का डंका, आखिर कैसे हिन्दी बेल्ट में भी कर रहीं हैं धांसू कमाई

केजीएफ चैप्टर 2 ‘आरआरआर’ ‘राधे श्याम’ ‘आदिपुरुष’ ‘लाइगर’ ‘सालार’ जैसी दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी में रिलीज होंगी। इनकी कहानी निर्माण का अंदाज संस्कृति हिंदी फिल्मों से अलग है पर दर्शक इनका इंतजार कर रहे हैं। क्या वजह है कि बढ़ती जा रही है इनकी स्वीकार्यता?
  संस्करण की बाक्स आफिस पर 95 करोड़ रुपए कमाई ने इस बात को पुष्ट किया कि दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी दर्शकों के बीच जबरदस्त जगह बना चुकी हैं। आगामी दिनों में ‘केजीएफ चैप्टर 2, ‘आरआरआर’ , ‘राधे श्याम’ , ‘आदिपुरुष’, ‘लाइगर’ , ‘सालार’ जैसी दक्षिण भारतीय फिल्में हिंदी में रिलीज होंगी। इनकी कहानी, निर्माण का अंदाज, संस्कृति हिंदी फिल्मों से अलग है, पर दर्शक इनका इंतजार कर रहे हैं। क्या वजह है कि बढ़ती जा रही है इनकी स्वीकार्यता?
पिछले दिनों आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को 14 अप्रैल को रिलीज करने की पुष्टि की। उसी दिन कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘केजीएफ- चैप्टर 2’ रिलीज हो रही है। इस तरह से आमिर ने उन खबरों व आशंकाओं पर विराम लगाया कि ‘केजीएफ- चैप्टर 2’ की वजह से ‘लाल सिंह चड्ढा’ की कमाई पर फर्क पड़ सकता है। क्या दक्षिण भारतीय कंटेंट हिंदी कंटेंट को टक्कर दे रहा है? इस बाबत निर्माता सिद्धार्थ राय कपूर कहते हैं, ‘इसमें कोई दो राय नहीं कि साउथ की इंडस्ट्री ऐसी फिल्मों का निर्माण कर रही है, जिनके जरिए वह देश के सभी दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पूरे देश के दर्शकों के बीच स्वीकार्यता प्राप्त करने वाली इन फिल्मों को आमतौर पर पैन (प्रेजेंस एक्रास नेशन) इंडिया फिल्मों के तौर पर निरुपित किया जाता है।

  ऐसी फिल्मों को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। हमें उनसे इस संबंध में सीखने की जरूरत है कि वे दर्शकों की रुचि को किस प्रकार समझकर बड़े बजट की फिल्मों को आकार दे रहे हैं।’ अपनी जमीन पर पकड़ रखें: कहानियां वही पसंद आती हैं, जिनकी भावनाएं वैश्विक हों। वे कहानियां हमारे आसपास की हों या फिर ऐसी दुनिया गढ़ी गई हो जो काल्पनिक होने के बावजूद आकर्षक लगे। दक्षिण भारतीय फिल्में दर्शकों के बीच जमीन से जुड़ी कहानियां ला रही हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों की बढ़ती पैठ को लेकर फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि अब हमें कमर कसनी चाहिए। हालीवुड की फिल्में यहां पर बहुत चलती हैं। साउथ की फिल्में भी अच्छा कंटेंट लाती हैं और पसंद की जाती हैं। कन्नड़ सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है। मलयालम सिनेमा शुरुआत से अच्छा रहा है। भले ही आप उसे आर्ट सिनेमा कहें, लेकिन अब वो दूरी भी खत्म हो गई है। उनकी फिल्में बहुत अच्छी बन रही हैं, इसलिए अच्छा बिजनेस भी कर रही हैं। हमारी इंडस्ट्री को भी कमर कसनी चाहिए। साउथ की फिल्मों के किरदार जमीन से जुड़े होते हैं। हमें दोबारा अपने समाज को समझकर फिर से लिखना पड़ेगा। हालीवुड की नकल करके लाभ नहीं मिलेगा।’
बढ़ेंगे पैन इंडिया फिल्मों के शोज: क्या दक्षिण भारतीय फिल्मों की देश में व्यापक रिलीज पर उन्हें हिंदी फिल्मों के बीच ज्यादा शोज मिलेंगे? यह सवाल अक्सर सामने आता रहता है। इस बाबत फिल्म एक्जीबिटर अक्षय राठी कहते हैं, ‘ऐसा हो सकता है कि पहले के मुकाबले अब दक्षिण भारतीय फिल्मों को ज्यादा शोज मिलें, लेकिन उसका यह मतलब नहीं है कि हिंदी फिल्मों को मंच नहीं मिलेगा। फिल्म चाहे हिंदी हो, दक्षिण भारतीय या हालीवुड, सिनेमाघरों में जो शोज लिए जाते हैं, उसका निर्णय सिर्फ इस आधार पर किया जाता है कि फिल्म कितने दर्शकों का मनोरंजन करने का दम रखती है। दक्षिण भारतीय और हिंदी फिल्मों का टकराव रोकने के बजाय दर्शकों को वैरायटी देने की जरूरत है। ‘पुष्पा’ जब रिलीज हुई थी तो उसे इतने शोज नहीं मिले थे, जितने ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ को मिले थे। आज सैकड़ों सिनेमाघरों में ‘पुष्पा’ के शोज चल रहे हैं। दक्षिण भारत की फिल्मों के किरदार अपनी संस्कृति से जुड़े होते हैं, वहीं हिंदी फिल्मों में वल्र्ड सिनेमा का असर दिखाई देता है। इसमें कुछ सही या गलत नहीं है। यह फिल्ममेकर का निजी नजरिया होता है कि उन्हें क्या कहानी सुनानी है। ‘सूर्यवंशी’ फिल्म में लोकल एलिमेंट्स थे, इसलिए वह पसंद की गई। हिंदी फिल्म एक राष्ट्रीय प्रोडक्ट है, जिसे राजस्थान, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश हर जगह बिजनेस मिलना जरूरी है। इनमें से एक या दो मार्केट अगर बंद हो गए तो हिंदी फिल्म की रिकवरी पर असर पड़ता है।’

नजरिए का अंतर है: अभिनेत्री तापसी पन्नू उन कलाकारों में से हैं, जो हिंदी के साथ दक्षिण भारतीय फिल्में भी कर रही हैं। वह कहती हैं, ‘यह नजरिए का फर्क है कि दक्षिण भारतीय फिल्में डामिनेट कर रही हैं। जब मैं साउथ में काम करती हूं तो वहां के लोग कहते हैं कि हिंदी फिल्मों का कंटेंट कितना आगे बढ़ चुका है। जब यहां पर काम करती हूं तो लोग कहते हैं कि साउथ का कंटेंट मासेस के लिए बनता है। हर तरह की फिल्मों के दर्शक हैं। दक्षिण भारत में जब फिल्म बनती है तो वह बी एंड सी या मास आडियंस के लिए ज्यादा बनती हैं। बी यानी सेमी-अर्बन और सी यानी ग्रामीण दर्शकों को दिमाग में रखकर कहानियां बनाई जाती हैं, क्योंकि वहां से सबसे ज्यादा बाक्स आफिस कलेक्शन आते हैं। कई बार जब ये फिल्में हिंदी बेल्ट में रिलीज होती हैं तो जो बी और सी सेंटर्स होते हैं, उनको अपील करती हैं। वहां पर ए सेंटर्स यानी शहरी दर्शक हिंदी मार्केट के मुकाबले कम हैं। उसके लिए फिल्म निर्माण में प्रयोग किए जाते हैं। ऐसी फिल्में उनके लिए बनाई जाती हैं, जिन्होंने वल्र्ड सिनेमा देखना शुरू किया है और वे हिंदी में रेग्यूलर फार्मूला फिल्मों के बजाय कुछ नया देखना चाहते हैं। हिंदी बेल्ट में ऐसे दर्शक अपेक्षाकृत अधिक हैं, इसलिए यहां ए सेंट्रिक फिल्में ज्यादा बनती हैं और उनकी रिकवरी हो जाती है।’

साथ मिलकर बन सकती हैं बेहतरीन फिल्में: नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई मलयालम फिल्म ‘मीनल मुरली’ को भी पसंद किया जा रहा है। यह फिल्म हिंदी सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। इस फिल्म के अभिनेता टोविनो थामस कहते हैं, ‘मलयालम फिल्में हमेशा अलग रही हैं। उन्हें हाल में जैसा एक्सपोजर मिलना शुरू हुआ है, वैसा पहले नहीं था। डिजिटल प्लेटफार्म की वजह से ये फिल्में लोगों तक पहुंच रही हैं। सबटाइटल और डबिंग की वजह से हर भाषा की फिल्मों को देखा जा रहा है। मुझे लगता है कि अब हमें पैन इंडिया फिल्मों को ज्यादा एक्सप्लोर करने की जरूरत है। भारत एकमात्र दुनिया का ऐसा देश है, जहां कई फिल्म इंडस्ट्री हैं। अगर हम एकसाथ आए तो बेहतरीन फिल्में बना सकते हैं।’ पैन इंडिया फिल्म ‘आरआरआर’ इस साल जनवरी में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, पर दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सिनेमाघर बंद हुए तो इसकी रिलीज को टाल दिया गया। तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार और इस फिल्म के अभिनेता जूनियर एनटीआर कहते हैं, ‘हमारे लिए हिंदी दर्शक बहुत मायने रखते हैं, खासकर ‘बाहुबली’ फिल्म के बाद से। क्षेत्रीय भाषा के दायरों को तोड़कर ‘बाहुबली’ फिल्म ने सभी फिल्म इंडस्ट्रीज को मिलाकर एक इंडस्ट्री बना दिया। इसके लिए उत्तर भारत के दर्शकों का मैं शुक्रिया अदा करना चाहूंगा। पूरे देश के दर्शक मिलकर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को और आगे लेकर जाएंगे।’
 
  हिंदी निर्माता चुनें पैन इंडिया विषय: साउथ का फोकस पैन इंडिया फिल्मों पर है। हिंदी फिल्म के निर्माताओं के लिए पैन इंडिया फिल्मों पर जोर देना कितना जरूरी हो गया है? इस बाबत सिद्धार्थ कहते हैं, ‘फिल्म को विश्वसनीय बनाना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर आप ‘दंगल’ फिल्म बना रहे हैं तो उसे खास तरीके से बनाना होगा। वह कहानी हरियाणा की है। उस फिल्म ने चीन में दो सौ करोड़ की कमाई की है, क्योंकि वो आडियंस को पसंद आई। उनका भी कल्चर हमसे मिलता-जुलता है। वहां भी पितृसत्तात्मक समाज है, वहां पर कन्या जन्म को बहुत अहमियत नहीं दी जाती, इसलिए वह फिल्म वहां पसंद आई। मुझे लगता है कि आप एक फिल्म को ऐसे डिजाइन कर सकते हैं, जो पूरी दुनिया में पसंद की जाए, पर स्टोरी शानदार होनी चाहिए।
हम साथ-साथ हैं 18 मार्च: रणबीर कपूर अभिनीत ‘शमशेरा’, अक्षय कुमार अभिनीत ‘बच्चन पांडे’। फिल्म ‘आरआरआर’ को 18 मार्च या 28 अप्रैल में किसी एक तारीख को हालात के अनुरूप रिलीज करने की निर्माताओं ने घोषणा की है।   14 अप्रैल: फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘केजीएफ-चैप्टर 2 ’और ‘सालार’ साथ रिलीज होंगी।   11 अगस्त: अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘रक्षा बंधन’, प्रभास और सैफ अली खान अभिनीत फिल्म ‘आदिपुरुष’ आमने-सामने होंगी। दक्षिण दे रहा है जोरदार दस्तक। आरआरआर: एसएस राजामौली निर्देशित इस पीरियड फिल्म में जूनियर एनटीआर और राम चरण मुख्य किरदार में हैं। फिल्म पिछली सदी के दूसरे दशक के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोमाराम भीम और अल्लूरी सीताराम राजू के जीवन पर आधारित होगी।   राधे श्याम: इस पीरियड रोमांटिक फिल्म में प्रभास और पूजा हेगड़े की जोड़ी है।   आदिपुरुष: ओम राउत के निर्देशन में बन रही इस पौराणिक ड्रामा फिल्म में प्रभास श्रीराम और सैफ अली खान लंकेश का किरदार निभा रहे हैं।

  स्पिरिट: यह प्रभास की 25वीं फिल्म होगी। इस फिल्म को हिंदी के साथ कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में डब करके को रिलीज किया जाएगा।   केजीएफ- चैप्टर 2: यह फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘केजीएफ- चैप्टर 1’ का दूसरा पार्ट होगी। फिल्म में इस बार कन्नड़ अभिनेता यश के साथ संजय दत्त और रवीना टंडन भी नजर आएंगे।   लाइगर: विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे अभिनीत यह फिल्म एक स्पोट्र्स एक्शन फिल्म होगी, जिसे हिंदी और तेलुगु में साथ में शूट किया गया है।   सालार: निर्देशक प्रशांत नील के निर्देशन में बन रही यह फिल्म अंडरवल्र्ड एक्शन थ्रिलर फिल्म होगी। प्रभास और श्रुति हासन फिल्म में मुख्य किरदार में होंगे।  

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