पहाड़ों को चीरकर रेलवे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड में 10.847 किमी लंबी सुरंग का ब्रेकथ्रू

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पहाड़ों को चीरकर रेलवे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड में 10.847 किमी लंबी सुरंग का ब्रेकथ्रू

उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों तक रेल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना अब तेजी से आकार ले रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल परियोजना में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने 11 सितंबर 2026 को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। परियोजना की Escape Tunnel-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके साथ ही 10.847 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पूरी तरह आपस में जुड़ गई है और यह परियोजना की दूसरी सबसे लंबी सुरंग बन गई है। यह उपलब्धि परियोजना का 41वां टनल ब्रेकथ्रू है।

बेहद कठिन हिमालयी भूगर्भ के बीच पूरी हुई सुरंग

Escape Tunnel-1 का निर्माण सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ। सुरंग का मार्ग अत्यधिक टूटे-फूटे, फॉल्टेड और कमजोर चट्टानी क्षेत्र से होकर गुजरता है। परियोजना के इस हिस्से में चट्टानों के अत्यधिक टेक्टोनाइज्ड और मल्टी-फोल्डेड होने के साथ कई जगह शियरिंग और क्रशिंग जैसी भूगर्भीय चुनौतियां सामने आईं।

सुरंग का मार्ग मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) के नजदीक होने के कारण कई हिस्सों में कमजोर चट्टानी संरचनाओं और मोटे मायलोनाइट जोन जैसी परिस्थितियां भी मिलीं। ऐसे भूभाग में सुरंग खोदने के दौरान लगातार भूगर्भीय निगरानी, सुरक्षा उपायों और तकनीकी नियंत्रण की जरूरत होती है।

RVNL की ऋषिकेश प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट और निर्माण से जुड़ी तकनीकी टीमों ने इन चुनौतियों के बीच सुरंग के दोनों सिरों को सफलतापूर्वक जोड़ा।

41 ब्रेकथ्रू पूरे, अब सिर्फ 5 बाकी

इस उपलब्धि के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब तक 41 टनल ब्रेकथ्रू पूरे हो चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब केवल पांच ब्रेकथ्रू बाकी हैं, जिन्हें अगले एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

रेल मंत्रालय के जुलाई 2026 के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 16 मुख्य सुरंगें करीब 104 किलोमीटर और 12 एस्केप सुरंगें करीब 98 किलोमीटर लंबी हैं। जुलाई तक मुख्य सुरंगों में करीब 101 किलोमीटर और एस्केप सुरंगों में 95 किलोमीटर से अधिक खुदाई पूरी हो चुकी थी। परियोजना में 19 महत्वपूर्ण/बड़े पुल भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 11 का काम पूरा हो चुका था।

125 किमी लंबी रेल लाइन, पांच जिलों से होकर गुजरेगी

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन करीब 125 किलोमीटर लंबी है। इसका अलाइनमेंट उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरता है। इसका उद्देश्य ऋषिकेश को देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों से रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना उत्तराखंड में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली है। परियोजना की संरचना भी इसे सामान्य रेल लाइन से अलग बनाती है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा सुरंगों के जरिए हिमालयी भूभाग को पार करता है।

चारधाम और पहाड़ी पर्यटन के लिए क्यों अहम?

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। ऋषिकेश से आगे रेल कनेक्टिविटी मिलने से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

इसका लाभ देवप्रयाग और कर्णप्रयाग के साथ-साथ आसपास के हिमालयी धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों की यात्रा को भी मिल सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय कारोबार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। रेल मंत्रालय ने भी इस परियोजना को राज्य की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

सिर्फ रेल लाइन नहीं, हिमालय में इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौती

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका कठिन भूभाग है। लगभग 125 किलोमीटर की पूरी लाइन में बड़ी मात्रा में सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना में 16 मुख्य लाइन सुरंगों और 12 समानांतर एस्केप सुरंगों का प्रावधान है।

इसी वजह से Escape Tunnel-1 का 10.847 किलोमीटर लंबा हिस्सा पूरा होना केवल एक और निर्माण उपलब्धि नहीं है। यह हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में लंबे समय तक चलने वाले सुरंग निर्माण की क्षमता का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है।

उत्तराखंड की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को केंद्र सरकार उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी विस्तार की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल कर रही है। जुलाई 2026 में रेल मंत्रालय ने बताया था कि राज्य में रेल बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश और परियोजनाओं में तेजी आई है तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना में सुरंग और पुल निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।

41वें टनल ब्रेकथ्रू के बाद अब परियोजना का ध्यान बचे हुए सुरंग कार्यों को पूरा करने पर है। अगर शेष पांच ब्रेकथ्रू निर्धारित समय के अनुसार पूरे होते हैं, तो उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में रेल पहुंचाने का यह दशकों पुराना सपना अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएगा।

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