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यूक्रेन से भारतीयों की वापसी नहीं थी आसान, पीएम मोदी की यह कूटनीति आई काम

रूस से जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन में फंसे 20 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. इसके लिए तीन हफ्ते के भीतर मिशन मोड पर भारत सरकार ने काम किया.

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध पर भारत के प्रयासों का ब्योरा दिया है. उन्होंने बताया कि यूक्रेन से भारतीय छात्रों को लाना आसान नहीं था. पीएम मोदी के अथक प्रयास के बाद इस कठिन कार्य को सफलता पूर्वक पूरा किया जा सका.

3 हफ्ते में भारतीय छात्रों को यूक्रेन से वापस लाना गर्व की बात

पीयूष गोयल ने कहा कि 20,000 से अधिक भारत के नागरिक, जिसमें अधिकतर छात्र हैं, जो यूक्रेन में फंसे थे, उन्हें तीन हफ्ते के अंदर भारत में वापस लाना, ये हम सभी लोगों के लिए बहुत गर्व की बात है. आज पूरे देश में विश्वास खड़ा हुआ है कि किसी भी संकट के समय में भारत सरकार और भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी हमें संकट से निकालेंगे.

पीएम मोदी ने खुद संभाली कमान

उन्होंने करीब 11 बार दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं से बात की. कूटनीति का हर संभव प्रयोग किया गया, जिससे हमारे नागरिक सकुशल वापस आ सकें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विषय को खुद गंभीरता से लिया. 8 हाई लेवल मीटिंग उन्होंने की. हर मीटिंग के बाद कठोर कदम उठाए जाते थे कि कैसे एक-एक नागरिक को भारत में वापस लाया जाए.

पीएम मोदी ने किया अभियान का नेतृत्व

पीयूष गोयल ने कहा कि इस संकट के समय में प्रधानमंत्री ने इस अभियान का नेतृत्व किया. ऐसा किसी और देश का उदाहरण नहीं होगा, जिसने इतनी गंभीरता से अपने नागरिकों को वापस लाने का काम किया. आज हमें गर्व है कि वहां छात्रों का जो आखरी बैच था, वो भी अब युद्ध के इलाके से बाहर निकलकर तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्हें बॉर्डर पार करके, जल्द नजदीक के देश के रास्ते भारत वापस लाया जाएगा.

पीएम मोदी जी ने सरकार के हर तंत्र को, समाज के अलग-अलग लोगों को इस काम में लगाया था, ताकि हमारे नागरिक सुरक्षित वापस आ सकें. प्रधानमंत्री के अथक प्रयासों से जो सरकार ये सफल evacuation कर पाई, मैं इस कार्य में शामिल उन सभी संस्थाओं को, कर्मचारियों को धन्यवाद देना चाहता हूं.

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना

दुर्भाग्य है कि कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों ने और कुछ मुख्यमंत्रियों ने इस पर भी राजनीति करने की कोशिश की. संकट के समय में तो सभी लोग एकजुट होते हैं, लेकिन इस संकट में लोगों को सांत्वना देने के बदले विपक्ष के नेता गलत प्रचार करने में लगे रहे.

 

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