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यूक्रेन पर हमले के बाद भी भारत को कोयला भेज रहा रूस, रुपया से भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

कोयले के लिए रूस पर भारत की निर्भरता बढ़ती जा रही है। रिसर्च डेटा बताते हैं

कोयले के लिए रूस पर भारत की निर्भरता बढ़ती जा रही है। रिसर्च डेटा बताते हैं कि मार्च में रूस से भारत का कोयला आयात दो साल से अधिक समय में सबसे अधिक हो सकता है। रूस आमतौर पर कोकिंग और थर्मल कोयले का भारत का छठा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। प्रतिबंधों के कारण रूस भारतीय और चीनी खरीदारों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों की पेशकश शुरू कर सकता है। व्यापारियों ने कहा है कि व्यापार को एक रूसी और भारतीय करेंसी रूबल और रुपया से भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

अप्रैल में आएगा और कोयला

भारतीय कंसल्टेंसी कोलमिंट का कहना है कि करीब 8,70,000 टन रूसी कोयले की डिलीवरी पहले ही हो चुकी है या 20 मार्च तक भारतीय तटों पर पहुंचने की उम्मीद है, जो अप्रैल 2020 के बाद सबसे अधिक है। कोलमिंट में कोयला बाजार प्रमुख अदिति तिवारी ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा है कि फरवरी के मध्य से रूसी बंदरगाहों पर अधिक कोयला लोड होने पर यह संख्या अधिक होगी क्योंकि आमतौर पर रूसी जहाजों को भारत तक पहुंचाने में करीब एक महीने का समय लगता है।

यूक्रेन पर हमले के बाद भी भारत को कोयला भेज रहा रूस

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय खरीदारों ने स्विफ्ट प्रतिबंध और रूस पर प्रतिबंधों के बाद पीछे हटना शुरू कर दिया है। वे ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन रिफाइनिटिव पोत ट्रैकिंग डेटा और एक इंडस्ट्री सोर्स के अनुसार 24 फरवरी को रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद रूसी बंदरगाहों से कोयला ले जाने वाले कम से कम तीन जहाज भारत के लिए रवाना हुए हैं।

इंडस्ट्री सूत्रों की मानें तो भारतीय खरीदारों को अभी भी रूस से यहां के बाजार में कोयला मिल रहा है लेकिन यह मुश्किल होना शुरू हो रहा है क्योंकि बैंक क्रेडिट लेटर्स खोलने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक बैंक योग्य दीर्घकालिक ग्राहकों को विश्वास के आधार पर कोयला सौंपा जा रहा है, जबकि अपेक्षाकृत नए ग्राहक वित्तपोषण के मुद्दों के कारण कोयले की खरीद नहीं कर पा रहे हैं।

रूस से कोयला आयात में होगी मुश्किल

जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने कहा कि रूस से आयात तब तक मुश्किल होगा जब तक कि रुपया-रूबल व्यापार नहीं होता। रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का भारत पर कम से कम असर पड़े इसके लिए नई दिल्ली रूस के साथ रुपया भुगतान तंत्र स्थापित करने के तरीके तलाश रहा है। उन्होंने बताया है कि अगर रुपया-रूबल व्यापार को मंजूरी दी जाती है, तो हम रूस से और सस्ती कीमतों पर कोयला प्राप्त कर सकते हैं।

रूस के प्रमुख निर्यातकों में से एक सिबगलेमेट के एक व्यापारी ने कहा है कि फर्म और उसके प्रतिस्पर्धियों ने भारत को कोयले की आपूर्ति जारी रखी है लेकिन कुछ मुद्दे सामने आ रहे हैं। कल, अगर वे भुगतान पर सख्त नियंत्रण रखते हैं, तो अन्य देशों में खरीदारों के जरिए व्यापार किया जाएगा।

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